अंबिकापुर। सरगुजा जिले के बतौली तहसील अंतर्गत रहने वाले एक परिवार ने इच्छा मृत्यु की इजाजत देने संबंधी महामहिम राष्ट्रपति के नाम आवेदन जिला प्रशासन को सौंपा था, जिसे संज्ञान में लेकर कलेक्टर ने त्वरित कार्रवाई करते हुये अवगत कराया था कि, ग्राम बटईकेला स्थित खसरा क्रमांक 1784 शासकीय मद की भूमि है, उक्त भूमि पर आंगनबाड़ी भवन निर्माण विभागीय स्वीकृति के आधार पर ग्राम पंचायत द्वारा कराया जा रहा है। इधर पीड़ित परिवार पुन: सोमवार को न्याय एवं उचित कार्रवाई की मांग को लेकर एक दिवसीय धरना में अन्य ग्रामीणों के साथ बैठा नजर आया। ये अपने हाथों में राष्ट्रपति महोदया, हमें इच्छा मृत्यु की सहमति प्रदान करें, गूंगे, बहरे, अंधों के परिवार की जमीन छीन रही भाजपा सरकार, जैसे नारे लिखे तख्तियों को लेकर बैठे थे।

इनके द्वारा बाहरी राज्य से आये एक व्यक्ति के नाम का उल्लेख करते हुये खसरा नंबर 1748 की शासकीय भूमि पर अतिक्रमण करके निवास करने और आज दिनांक तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित परिवार के साथ आये लोगों ने बताया कि बटईकेला निवासी केवला बाई के परिवार में 12 सदस्य हैं, जिनके जीवकोपार्जन का सहारा करीब एक एकड़ से भी कम भूमि है। इनमें चार शारीरिक रूप से अशक्त हैं, कोई देख नहीं सकता, तो कोई सुनने और बोलने में असमर्थ है। इन हालातों के बीच इस भूमि से उन्हें बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है। इनका कहना है कि तीन पीढ़ी गुजर गई, अब पता चल रहा है कि जो जमीन उनका सहारा है, वह शासकीय है। इसकी जानकारी कलेक्टर सरगुजा को देने के बाद भी किसी प्रकार की सकारात्मक कार्रवाई नहीं करने का आरोप पीड़ित लगा रहे हंै।

हालांकि, मामला संज्ञान में आने के बाद कलेक्टर ने जांच के निर्देश दिये थे। जांच प्रतिवेदन के आधार पर स्पष्ट किया गया था कि, आवेदिका के परिवार के पास ग्राम बटईकेला एवं ग्राम महेशपुर में पृथक खातों में भूमि दर्ज है। आवेदिका द्वारा जिस भूमि को निजी कब्जे की भूमि बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई गई है, वह राजस्व अभिलेख में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज पाया गया है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि, शासकीय भूमि पर पूर्व में निर्मित आंगनबाड़ी भवन को हटाकर उसी स्थल पर नवीन आंगनबाड़ी भवन का निर्माण कराया जा रहा है। ऐसे में निर्माण कार्य निर्धारित शासकीय स्थल पर ही होने का दावा किया गया है। वहीं शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के आरोप को निराधार बताया है।  

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