श्रम विभाग में जिले के पंजीकृत मजदूरों की संख्या 1,05295, काम नहीं मिलने पर कई कर रहे पलायन

girija thakur
अंबिकापुर। सरगुजा जिले में दो लाख 62 हजार ई-श्रमिक पंजीकृत हैं, लेकिन इनके लिए केंद्र सरकार की ओर से छत्तीसगढ़ में किसी प्रकार की विशेष योजना का संचालन नहीं किया गया है, जिससे उन्हें प्रत्यक्ष लाभ मिल सके। श्रम विभाग से प्राप्त आंकड़ों पर नजर डालें तो 24 जनवरी 2024 की स्थिति में जिले में पंजीकृत मजदूरों की संख्या एक लाख 5295 है। इनमें असंगठित मजदूरों की संख्या 57 हजार 476 है। 47819 मजदूर भवन निर्माण कार्य में लगे हैं। सर्वाधिक 36334 मजदूरों की संख्या अंबिकापुर ब्लॉक में है। जिले में लगभग तीन हजार ऐसे मजदूर हैं, जो काम सरकार के द्वारा रोजगार के तमाम अवसर उपलब्ध कराने और मनरेगा जैसे कार्यों में अवसर देने के बाद भी अन्य शहरों में काम के लिए पलायन करने विवश हैं। इसे विभागीय अधिकारियों की उदासीनता व पंचायत प्रतिनिधियों की मनमानी कहा जाए तो गलत नहीं होगा। मनरेगा को श्रम विभाग के दायरे से भी अलग रखा गया है।

जिले में मनरेगा के नाम पर बड़े पैमाने पर खानापूर्ति चल रही है। मजदूरों को पर्याप्त काम नहीं मिलने व कई बार महीनों मजदूरी भुगतान नहीं किए जाने जैसी खबरें सामने आती हैं। इसके अलावा मृतकों व अपने ही परिवार के सदस्यों का नाम फर्जी तरीके से डालकर मजदूरी भुगतान करने जैसी खबरें आए दिन समाचारों की सुर्खियां बनते आ रही हैं। इन हालातों के बीच गांव में ही काम नहीं मिलने और कागजों में मजदूरों के काम करने के कारण जरूरतमंद ग्रामीण काम के लिए हाथ मलते रह जाते हैं। आवश्यकता अनुरूप काम नहीं मिलने की स्थिति में पलायन इनके लिए मजबूरी बन जाती है। हर साल पंजाब, उत्तरप्रदेश, जम्मू कश्मीर सहित अन्य शहरों में मजदूरों का पलायन होता है। कई बार काम करने के बाद मजदूरी की जगह प्रताड़ना की बातें सामने आती हैं। इन्हें बंधक बनाकर रखने जैसे मामले भी कई सामने आ चुके हैं। कई मजदूरों की वापसी सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से शेयर किए जाने वाले वीडियो, आडियो को सुनने के बाद शासन व प्रशासन के पहल पर भी हुई है।

मजदूरों के बच्चों व प्रसूताओं के लिए यह योजना
श्रम अधिकारी ने बताया कि शासन के गाइडलाइन के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में 10 हजार व शहरी क्षेत्र में 15 हजार रुपये से कम आय वाले श्रमिक के दायरे में आते हंै। जिले में पंजीकृत श्रमिकों में 40 प्रतिशत महिलाएं हैं। श्रम विभाग की ओर से प्रसूता महिलाओं को शासन के मापदंड के अनुरूप 20 हजार रुपये प्रति महिला देने का प्रावधान है। अपै्रल 2022 से दिसंबर 2022 तक लगभग 550 गर्भवती महिलाओं का इस योजना का लाभ मिला है। इनके बच्चों की शिक्षा के लिए एक हजार रुपये से चार-पांच हजार रुपये तक छात्रवृत्ति भी श्रम विभाग की ओर से दी जाती है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में इसका लाभ लगभग 900 बच्चों को मिल चुका है।  

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