पुलिस या बटालियन की वाहन से रौंदने का लगाया आरोप, पुलिस जांच में जुटी  

गिरिजा ठाकुर 

अंबिकापुर। मंगलवार की रात अंबिकापुर-मनेंद्रगढ़ मुख्य मार्ग में हुए सड़क हादसे में बिजली मिस्त्री गंभीर रूप से घायल हो गया। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जांच के बाद चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर स्वजन अस्पताल पहुंचे, इसके बाद कोहराम की स्थिति बन गई। बुधवार को मृतक का पोस्टमार्टम चिकित्सक ने किया, इसके बाद स्वजन शव को घर ले जाने के लिए तैयार नहीं थे। इनका कहना था कि मृतक का भरा-पूरा परिवार है, उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए। पोस्टमार्टम के बाद लगभग डेढ़ घंटे शव अस्पताल के मर्च्युरी में रखा रह गया। बाद में पुलिस अधिकारियों की समझाइश व कार्रवाई के आश्वासन पर स्वजन शव ले जाने के लिए तैयार हुए।

जानकारी के मुताबिक अजिरमा निवासी हीरा सिंह पिता रामबलि सिंह 42 वर्ष पांच मार्च की रात लगभग नौ बजे अजबनगर की ओर से मोटरसाइकिल में बिजली का काम करके आ रहा था। इस दौरान वाहनों के लाइट की चकाचैंध में संभवत: सड़क के किनारे खड़ी एक कार के साइड विंडो से टकराकर गिर गया। रात में वाहनों का निरंतर आना-जाना हो रहा था। इस दौरान एक कार का चालक मोटरसाइकिल सवार को बचाते निकल गया, वहीं सुमो वाहन जिसके नंबर प्लेट से पुलिस विभाग या बटालियन में संचालित होने का संदेह बना हुआ है, वह युवक को रौंदते आगे निकल गया। इसकी जानकारी गांव के पूर्व सरपंच बंटू सिंह मरावी ने पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पर सेवारत मृतक हीरा सिंह के भाई मोतीलाल को दी, इसके बाद स्वजन अस्पताल पहुंचे। मृतक के भाई लक्ष्मण सिंह, पारस राम, दिलीप विश्वास सहित अन्य का कहना है कि दुर्घटना के बाद जिस खड़ी कार के साइड विंडो से टकराकर हीरा सिंह गिरा था, उसी कार के स्वामी ने मानवता का परिचय देते हुए उसे अस्पताल तक पहुंचाया, सुमो चालक घायल को अस्पताल पहुंचाने की जरूरत महसूस नहीं किया। कुछ लोगों ने सुमो वाहन को रोककर उसका फोटो भी खींचा था। घटना किस वाहन से हुई, इसका कोई प्रत्यक्षदर्शी सामने नहीं आने से पशोपेश की स्थिति बनी हुई है। पुलिस सीसीटीवी देखकर घटना को अंजाम देने वाले वाहन के पतासाजी में लगी है।  

स्वजन ने कहा-सक्षम अधिकारी लें मुआवजा, आर्थिक सहायता की जिम्मेदारी
सड़क हादसे में मृत युवक का शव नहीं ले जाने की सूचना पर तहसीलदार अस्पताल पहुंचे। वे मृतक के स्वजन से मुलाकात किए। स्वजनों ने कहा कि प्रशासन की ओर से सक्षम अधिकारी, दोषी वाहन चालक के विरूद्ध कार्रवाई व मुआवजा दिलाने की जिम्मेदारी ले। परिवार के कमाऊ सदस्य की मौत के बाद उसकी पत्नी और तीन बच्चों की परवरिश कैसे होगी, इसका जवाबदेह प्रशासन को बनना होगा। इसी बात को लेकर शव लेकर जाने वे तैयार नहीं थे। तहसीलदार ने इनकी बातों को वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए आश्वस्त किया। एक घंटे से अधिक बीतने के बाद भी कोई अधिकारी इनकी सुध लेने नहीं पहुंचा। बाद में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुपलेश कुमार व नगर पुलिस अधीक्षक रोहित शाह अस्पताल पहुंचे और मृतक के स्वजनों को आवश्यक कार्रवाई के लिए आश्वस्त किया। इसके बाद शव लेकर स्वजन रवाना हुए।

Categorized in: