आपात परिस्थिति में दवा, सैंपल लाने-ले जाने के प्रोजेक्ट का मेडिकल कॉलेज से डेमो
प्रधानमंत्री के पॉयलट प्रोजेक्ट को साकार करने अधिष्ठाता ने ली रूचि

अंबिकापुर। भारत सरकार के पॉयलेट प्रोजेक्ट यूज ऑफ ड्रोन टेक्नॉलॉजी इन हेल्थ सर्विस डिलीवरी में जिले के राजमाता श्रीमती देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर का चयन हुआ है। इसी क्रम में सोमवार को मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर से हवाई मार्ग से 40 किलोमीटर दूर उदयपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ड्रोन के माध्यम से सैंपल भेजने का सफल ट्रायल हुआ। लगभग 20 मिनट में उदयपुर तक दवा और सैंपल पहुंच गया। इसके बाद पुन: उदयपुर से शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय तक सैंपल लाया गया। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस पॉयलट प्रोजेक्ट को लेकर लोगों में उत्सुकता बनी रही। इसका संचालन ड्रोन दीदियों के माध्यम से किया जाएगा। प्रथम चरण में पॉयलट प्रोजेक्ट की अवधि तीन माह होगी।  

मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि देश के 25 मेडिकल कॉलेजों में अंबिकापुर के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय का इस टेक्नोलॉजी से सैंपल, दवा लाने-ले जाने के लिए चयन हुआ है। सरगुजा संभागवासियों के लिए यह गौरवशाली क्षण है। इस मौके पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से ड्रोन के माध्यम से लेप्टोस्पीरा, स्क्रबटाइप्स और डेंगु एलजीएमईएल आइएसए जांच हेतु सैंपल लाए गए। साथ ही ओटी कल्चर हेतु सैंपल ड्रोन से मेडिकल कॉलेज भेजा गया। मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा प्रयोग सफल रहा तो आपात परिस्थितियों में दूरांचल में स्थित अस्पतालों तक न सिर्फ दवा, वैक्सीन पहुंचाने में आसानी होगी बल्कि सैंपल भी लाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस पॉयलट प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए उत्कर्ष स्व सहायता समूह की आरती व आराधना समूह की संध्या को दिल्ली में 11 दिवसीय नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण के दौरान इन्हें ड्रोन संचालन की गतिविधि, सैंपल चढ़ाने-उतारने जैसी तमाम प्रक्रियाओं से अवगत कराया गया है। आरती अंबिकापुर में और संध्या उदयपुर से ड्रोन का संचालन करेंगी। इस दौरान जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आरसी आर्या भी उपस्थित थे।

आरती-संध्या पहले प्रयास में हुईं सफल
ड्रोन से दवा और सैंपल के आदान-प्रदान का प्रशिक्षण लेने के लिए एम्स सहित अन्य संस्थानों से ड्रोन दीदियां पहुंची थी। गौरव की बात यह भी है कि अंबिकापुर और उदयपुर के समूह की जिन दीदियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया वे पहले बार में सफल हुईं। अन्य को अवरोधों का सामना करते हुए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ी। प्रशिक्षण दौरान मिले अनुभवों को हासिल कर ड्रोन दीदी बनी आरती प्रसन्नचित्त नजर आई। वहीं उदयपुर में संध्या इस जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन कर रही थी। नगर विमानन महानिदेशालय, भारत सरकार की ओर से इन्हें किए गए नि:शुल्क कोर्स का लॉग बुक और रिमोट पॉयलट कोर्स का प्रमाण पत्र प्रदान दिया गया है। यह प्रशिक्षण में कम से कम से दो लाख रुपये शुल्क देकर प्राप्त किया जा सकता है।  

ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया से अधिकृत वेंडर ही शामिल
अधिष्ठाता डॉ. मूर्ति ने बताया कि ई-निविदा निकालकर शासन के तय मापदंडों को पूरा करते हुए पर चार ड्रोन कंपनियों का चयन किया गया है। सभी कंपनियों का चरणबद्ध ट्रायल लिया जाएगा। इसमें ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया से अधिकृत वेंडर ही शामिल हैं। सोमवार को जिस कंपनी को ड्रोन से दवा, सेंपल आदान-प्रदान करने का पहला मौका मिला, वह बैंगलोर की रेड रिबन काइट मैप कंपनी है। इसके बाद नोएडा की स्काई एयर, ईगल स्पेश व चंडीगढ़ की टेकनेट स्पेश कंपनी को ड्रोन के माध्यम से दवा, सैंपल जैसी आवश्यक सामग्री को गंतव्य तक लाने-ले जाने के लिए दक्षता प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा, जिसकी सर्विस सही होगी, उसे आगामी तीन माह के लिए जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी।

प्रशासन की ओर से मिली शुभकामनाएं

सोमवार को ड्रोन संचालन के पूर्व इसकी सूचना नगर विमानन महानिदेशालय, कलकत्ता, रायपुर, दिल्ली, दरिमा एयरपोर्ट सहित सरगुजा रेंज के आईजी, संभागायुक्त, जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, गांधीनगर थाना को मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता ने दी थी। इस नए आयाम को तय करने के लिए अधिकारियों ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को शुभकामनाएं दी। लगभग 400 फिट की उंचाई से ड्रोन के माध्यम से दवा, सैंपल को मेडिकल कॉलेज से उदयपुर स्वास्थ्य केंद्र तक लाना-ले जाना था। ऐसे में किसी प्रकार के अवरोध की स्थिति न बनने पाए, इसका ध्यान रखना जरूरी था। बताया जा रहा है कि वर्तमान में जिस ड्रोन का ट्रायल लिया जा रहा है, उससे एक किलोग्राम वजन तक की सामग्रियां भेजी जा सकती हैं। बाद में तीन से पांच किलो तक वजन ले जाने वाले ड्रोन का संचालन किया जाएगा।

12.26 में भेजी गई पहली खेप
शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर से प्रथम चरण में ट्रायल बतौर सोमवार को दोपहर 12.26 बजे कोल्ड चैन में संक्रमण गाइड लाइन का पालन करते हुए उदयपुर स्वास्थ्य केंद्र सैंपल भेजा गया था, ड्रोन से इसकी डिलीवरी उदयपुर में 12.55 बजे हुई। वापसी में दोपहर सवा एक बजे उदयपुर से कल्चर का सैंपल ड्रोन के माध्यम से अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जो 25 मिनट के अंतराल में सुरक्षित अंबिकापुर पहुंच गया। ड्रोन के ऑपरेशन की हर गतिविधि पर रेड रिबन काइट मैप कंपनी के रोहित देवांगन व टीम की नजर थी। इसके लिए मेडिकल कॉलेज में कंपनी की ओर से कंट्रोल रूम बनाया गया था।  

आपातकालीन में वरदान साबित होगा ड्रोन तकनीक-सीएमएचओ  
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी आरएन गुप्ता ने बताया कि इस प्रोजेक्ट मेें जिला स्तर पर मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति नोडल, इंचार्ज डॉ. अरविंद कुमार सिंह हैं। प्रोजेक्ट सफल होता है तो इसे राज्य के समस्त जिलों में इसे लागू किया जाएगा। दूरस्थ इलाके से भर्ती मरीज को तत्काल जांच व सैंपल रिपार्टिंग के लिए वायु परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराना सरगुजा जिले के लिए वरदान साबित होगा। इससे समय की बचत के साथ आपातकालीन स्थिति में मरीजों को बचाने में सुविधा होगी। उदयपुर के झिरमिटी स्टेडियम मैदान में ड्रोन का सफल लैडिंग कराने के बाद पुन: इसे मेडिकल कालेज अंबिकापुर भेजा गया। इस अवसर पर पैथोलाजिस्ट डॉ. दीपक गुप्ता, लैब टैक्निशियन अशोक पुरकैत, खंड कार्यक्रम प्रबंधक भानेष गौरव, ड्रोन दीदी संध्या बारी उपस्थित रहे।

शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय का चयन किसी प्रकार की विभीषिका की स्थिति में ड्रोन से दवा, सैंपल सहित जरूरी सामग्री भेजने के लिए होना अंचल के लिए प्रतिष्ठित उपलब्धि है। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत निविदा की शर्तों के अनुरूप ड्रोन का डेमो करके कौशल दक्षता का परीक्षण शुरू किया गया है। चार कंपनियों का डेमो पूरा होने के बाद चयनित कंपनी को तिमाही पॉयलट प्रोजेक्ट में शामिल किया जाएगा। इसके संचालन में प्रति किलोमीटर 150 रुपये खर्च आएगा।
डॉ. रमणेश मूर्ति
अधिष्ठाता, मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर

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