आठ लोगों के विरूद्ध डेढ़ दशक चला जेल ब्रेक का मामला, न्यायालय ने किया दोषमुक्त

गिरिजा कुमार ठाकुर

अंबिकापुर। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन जिले में रामोत्सव की धूम के बीच पुराने कारसेवक संघर्ष के उन पलों को याद कर रहे हैं, जिसे वे 1992 में न सिर्फ देखा बल्कि जेल ब्रेक के मामले में तीन दिन जेल भी गए थे। अंबिकापुर से जाने वाले कारसेवक बताते हैं कि अयोध्या कूच करने से पहले ही पुलिस ने उन्हें रामानुजगंज नाका से गिरफ्तार कर लिया था और थाना लाने के बाद गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। तत्समय अयोध्या जाना अपराध था, खुले आम जय श्री राम का उद्घोष करने से पुलिस के नजर में आने का भय बना रहता था। ऐसे कारसेवक आज राम मंदिर बनने और भगवान श्री राम के प्राण प्रतिष्ठा के अवसर को बेहद खुशी का पल मान रहे हैं। छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में रामभक्तों का सैलाब उमड़ा था। कारसेवक बड़ी संख्या में अयोध्या गए थे। उस दिन भी जय श्रीराम के जयकारे की गूंज चहुंओर हो रही थी। 22 जनवरी 2024 को यह सपना साकार होने जा रहा है। कारसेवा के लिए अंबिकापुर से अयोध्या जाने के लिए कारसेवकों में लरंग साय, पं. रविशंकर त्रिपाठी, त्रिलोक कपूर कुशवाहा, स्व. विनोद पाण्डेय, संजय अग्रवाल गणित, राजबहादुर सिंह, अनुराग सिंहदेव, बासु मुखर्जी, गोपाल चोपड़ा, भारत सिंह सिसोदिया, नितिनकांत दत्ता, अखिलेश सोनी सहित अन्य भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता शामिल थे। यह मामला डेढ़ दशक तक न्यायालय में विचाराधीन रहा। जेल ब्रेक की घटना साबित नहीं होने के कारण सभी को न्यायालय ने दोषमुक्त करार दे दिया।      


37 लोगों को पुलिस की थी गिरफ्तार
भाजपा के वरिष्ठ नेता त्रिलोक कपूर कुशवाहा व भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अनुराग सिंह देव बताते हैं कि दिसंबर 1992 में अंबिकापुर से 34 लोगों की टीम एकजुट होकर अयोध्या में कारसेवा के लिए जाने निकली थी। रामानुजगंज नाका के पास बस का पड़ाव था, यहां वे अयोध्या जाने की तैयारी करके पहुंच गए। पुलिस को इसकी भनक कहीं से लग गई और उन्हें पकड़कर सदर थाना ले आई। वे पूरे जोश खरोस के साथ थाना पहुंचते तक जय श्री राम का उद्घोष कर रहे थे। पुलिस को डर था कि अगर इन्हें छोड़ दिया तो पुन: अयोध्या के लिए प्रस्थान कर सकते हैं, ऐसे में वे इन्हें तत्समय के जिला जेल अंबिकापुर ले गए। यहां लाने के बाद इन्हें जेल के नए बन रहे भवन में रख दिया गया, जहां पानी तक की व्यवस्था नहीं थी।

इसलिए बनी जेल ब्रेक की स्थिति
भाजपा के द्वय नेताओं ने बताया कि जेल में जिस जगह उन्हें रखा गया था, वहां न तो शौच के लिए कोई व्यवस्था और न ही कोई उनकी सुध लेने वाला था। जब वे बाहर निकले तो वहां कोई भी मौजूद नहीं था। इसके बाद कोई जेल के पास तालाब में शौच के लिए चला गया, तो कोई अपने घर आ गया। इनकी मंशा जेल से भागने की नहीं थी, लेकिन जब जेल के प्रहरी व जेलर उक्त स्थल पर पहुंचे तो यहां लाए गए कारसेवकों को गायब देखकर इनके होश उड़ गए। इसकी जानकारी प्रशासन को लगी और वहां कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सहित पूरा प्रशासनिक अमला उमड़ पड़ा। इसी बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके स्व. लरंग साय जेल के पास तालाब से फ्रेस होकर जेल पहुंच गए थे और वे केस, फौजदारी से मुक्त रहे।

इनके विरूद्ध पुलिस ने किया अपराध दर्ज
कारसेवकों के जेल अभिरक्षा से भागने की घटना को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया था। इनके गायब रहने की सूचना जैसे ही जेल प्रबंधन को मिला, सायरन बजने लगा, कारसेवकों की खोजबीन शुरू हो गई थी। हालांकि सभी एक-एक करके आधे से एक घंटे के अंतराल में पुन: जेल पहुंच गए थे। इसके बाद भाजपा के तेज तर्रार नेता पंडित रविशंकर त्रिपाठी, त्रिलोक कपूर कुशवाहा, अनुराग सिंह देव, अखिलेश सोनी, भारत सिंह सिसोदिया, स्व. संजय अग्रवाल गणित, कृष्ण त्रिपाठी, नितिनकांत दत्ता के विरूद्ध जेल ब्रेक का मामला पुलिस ने दर्ज किया था। सभी को पुलिस के द्वारा पृथक से अपराध पंजीबद्ध करने के कारण तीन दिन तक जेल में रहना पड़ा।

शर्त लगी और 68 पूड़ी खा गए बासु मुखर्जी
जेल में बिताए गए चटखारे भरे पलों को याद करते हुए भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अनुराग सिंह देव बताते हैं कि जेल में उनके लिए पूड़ी सब्जी बनकर आया था, पूड़ी मोटी थी। शर्त लगा कि कौन ज्यादा पूड़ी खा सकता है, तो बासु मुखर्जी ने कहा वे एक सौ पूड़ी खा सकते हैं। यह बात अन्य लोगों को नहीं पची और शर्त की स्थिति बन गई। इसके बाद बासु मुखर्जी ने शर्त स्वीकार कर लिया और 68 पूड़ी खाकर माने। पूड़ी खाने की रफ्तार देख साथियों ने ही उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बाद में और पूड़ी खाने से रोक दिया था।

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