जारी आदेश पत्र में शासनादेश का उल्लेख नहीं, भाई-भतीजा व परिवारवाद को प्रश्रय देने की बातें सामने आ रही

GIRIJA THAKUR

अंबिकापुर। मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर में भर्ती प्रक्रिया व नियम विरूद्ध तरीके से कर्मचारियों की सेवा वृद्धि सुर्खियों में है। मामले की जांच हो तो छत्तीसगढ़ के पीएससी घोटाला की तरह यहां एक ही परिवार के सदस्यों की नियुक्ति व भाई-भतीजावाद को प्रश्रय देने की सच्चाई सामने आ सकती है। छत्तीसगढ़ चिकित्सा, शिक्षा विभाग, तृतीय श्रेणी अराजपत्रित लिपिक वर्गीय एवं अलिपिक वर्गीय सेवा भर्ती नियम 2011 का उल्लंघन कर सहायक प्रोग्रामर के पद पर पदोन्नति कर वॉयरोलॉजी लैब में नियुक्ति का मामला तो सुर्खियों में है ही, छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव दौरान लगी आचार संहिता हटते ही 05 दिसंबर 2023 को कार्यालय अधिष्ठाता राजमाता श्रीमति देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर द्वारा जारी आदेश संदेह के घेरे में है। इस आदेश में चिकित्सा शिक्षकों को उनके नाम के सम्मुख दर्शित पद एवं समेकित वेतन में 31 मार्च तक 2025 तक के लिए अथवा आरक्षित संवर्ग के उपयुक्त उम्मीदवार की नियुक्ति होने तक अथवा अन्य कोई आदेश होने तक, उसमें से जो भी पहले हो, संविदा भर्ती शर्तों के अधीन संविदा सेवा वृद्धि प्रदान करने का उल्लेख किया गया है। आदेश में गौर करने वाली बात यह है कि चिकित्सा शिक्षक के नाम की सूची में माइक्रोबायोलॉजी, एनाटामी विभाग के दो प्रदर्शक/ट्यूटर के अलावा एक जूनियर रेसीडेंट चिकित्सक, एक स्टेटशियन कम प्रदर्शक, दो जूनियर साइंटिस्ट के अलावा वायरोलॉजी लैब के 17 लैब टेक्नीशियन व 10 अटेेंडेंट, 06 डॉटा एंट्री ऑपरेटर, 08 स्वीपर के नाम शामिल हैं। इन्हें तीन वर्ष अतिरिक्त संविदा सेवा में वृद्धि का लाभ दिया गया है। आदेश में चिकित्सा शिक्षकों को दर्शित पद पर समेकित वेतन में नियुक्ति देने का उल्लेख होने के बाद कुल 37 कर्मचारियों की नियुक्ति संदेह के घेरे में है। चर्चा वायरालॉजी विभाग के एक कर्मचारी के गोद पुत्र की तरह तरक्की के पायदान तक पहुंचने की हो रही है, जो वायरोलॉजी लैब में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में लगा है। छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने इसे लेकर आवाज उठाई, लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का अभयदान होना ही सामने आया है। सत्यता यह भी है कि मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदार इन बातों को नकारते आ रहे हैं। जांच में सारी सच्चाई का पर्दाफास होकर रहेगा।

संभाग आयुक्त के संज्ञान में लाया मामले को
वायरोलॉजी लैब में की नियुक्ति में एक ही परिवार के तीन भाइयों, जिम्मेदार कर्मचारी के सगे संबंधियों की पदस्थापना भी संदेह के घेरे में है। भर्ती छह माह के लिए की गई थी, लेकिन ये आज दिनांक तक कार्यरत हैं। अगर मामले की सूक्ष्मता से जांच हो कई तथ्य सामने आ सकते हैं। इनकी सेवा वृद्धि किसके अनुमति से की गई, यह भी जांच का विषय है। स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने इसकी जानकारी आयुक्त सरगुजा संभाग को भी दी है और जांच किसी प्रशासनिक अधिकारी के द्वारा गठित कमेटी से कराने की मांग की गई है।

सेवा भर्ती नियमों के उल्लंघन का आरोप
छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री अनिल कुमार पांडेय का आरोप है कि कार्यालय अधिष्ठाता राजमाता श्रीमति देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर के जिस आदेश क्रमांक के तहत आठ जनवरी 2021 को कृपासागर पैकरा स्टेनो कम कंप्यूटर ऑपरेटर को सहायक प्रोग्रामर (जिस पद का उल्लेख सेवा भर्ती नियम 2011 में नहीं है) के पद पर पदोन्नत किया गया है। इस पद पर पदोन्नति के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में पांच वर्ष का अनुभव आवश्यक है। इधर सेवा भर्ती नियम 21 सितंबर 2011 को संशोधित या अधिसूचित किए बगैर सेटअप में स्वीकृत दो अलग-अलग पदों को समान पद मानकर पदोन्नति की गई है, यह सेवा भर्ती नियम का उल्लंघन है। कार्रवाई विवरण अनुसार स्टेनो कम कंप्यूटर ऑपरेटर के पद से सहायक प्रोग्रामर के पद पर पदोन्नति करने से अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आने का उल्लेख किया गया है। वहीं संबंधित अभ्यर्थी का वेतनमान 25300-80500 लेबल-6 को 38100-120400 लेबल-9 पर पदोन्नत किया गया। इससे वित्तीयभार संभावित प्रतीत होता है। इसका सत्यापन सेवा पुस्तिका से किया जा सकता है। यही नहीं चहेतों को नियुक्ति का लाभ दिलाने कोरोना काल में शासन के द्वारा निर्धारित अहर्ता को भी बदल दिया गया।

मेडिकल कॉलेज का यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। नियुक्ति में गड़बड़ी की गई है, तो इसकी जांच करा नियम सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
श्याम बिहारी जायसवाल
मंत्री-स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग

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