खदानों को निरस्त करने की मांग को लेकर कलेक्टोरेट पहुंचे अरण्य क्षेत्र के आदिवासी

अंबिकापुर। हसदेव अरण्य क्षेत्र में पेड़ों की कटाई व वन्य प्राणियों, पशु-पक्षियों के रहवास को नष्ट करने का मलाल ग्रामीणों को है। जंगल के साधनों से प्राप्त होने वाली आय से ग्रामीण वंचित होते जा रहे हैं। वनों की समाप्ति के बाद अमूल्य जड़ी-बूटी प्राप्ति का माध्यम, पक्षियों का कलरव समाप्त हो रहा है। हजारों पशु-पक्षियों के घोसले टूट गए, अंडे-बच्चे समाप्त हो गए। जंगल के विनाश के बाद हाथी उदयपुर के ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं। इससे क्षुब्ध होकर हसदेव अरण्य क्षेत्र के घाटबर्रा, साल्ही, फतेहपुर, हरिहरपुर के ग्रामीण व युवा-युवती, गुरूवार को कलेक्टोरेट पहुंचे। इन्होंने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा से एक बार फिर उन्हें अवगत कराने का प्रयास किया। इन्होंने कहा कि कलेक्टर से उन्हें मिलने नहीं दिया गया। ऐसे में वे आदिवासी समाज के हुए अपमान को इंगित कराते हुए क्षेत्र के सभी खदानों को निरस्त करने और जंगल की जमीन को खदान के लिए नहीं देने की मांग की है। इन्होंने कहा आलम यही रहा तो वे आंदोलन की राह पर अग्रसर होंगे। साल्ही व घाटबर्रा के कुसरो सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा छत्तीसगढ़ में आदिवासी मुख्यमंत्री जरूर बन गए, समाज के हैं, लेकिन वे उनका सुनने वाले नहीं हैं। इन्होंने प्रदेश सरकार को रिमोट कंट्रोल वाली डबल इंजन व कठपुतली सरकार की संज्ञा दे डाली और कहा आदिवासियों के लिए हानिकारक है यह सरकार। सरकार ही विनाश कर रही है, इससे सबसे अधिक परेशान आदिवासी समाज के लोग हैं। अब हम जंगल को बचाने के लिए जान की बाजी तक लगा देंगे।

कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में किया यह उल्लेख
कलेक्टर के नाम सौंपे गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि 90 प्रतिशत आदिवासी समाज के गोड़, मझवार, अगरिया जनजाति के लोग इस क्षेत्र में रहते हैं, इनके आय का प्रमुख साधन जंगलों से मिलने वाले वनोपज, प्राकृतिक संसाधन हैं। साल में छह माह वे जंगलों से आय प्राप्त करते हैं। महुआ, साल बीज, तेन्दुपत्ता, चार, चिरौंजी के अलावा कई प्रकार की बीमारियों के उपयोग में आने वाली जड़ी-बूटी इसी जंगल से मिलती है। वृक्षों की वजह से गर्मी के मौसम में तापमान क्षेत्र में कम रहता है। वर्तमान में लाखों की संख्या में क्षेत्र के पेड़ काटे गए हैं। हजारों पशु-पक्षियों के घोसले टूट गए, अंडे फूट गए, पक्षियों के बच्चे मरे, इसका किसी को मलाल नहीं है। आदिवासी समाज की ओर से इसकी घोर निन्दा की गई है। ग्रामीणों ने कहा है कि अब इस क्षेत्र में एक भी पेड़ उन्हें काटने के बाद ही कट पाएगा। मानव के साथ ही जंगली पशु-पक्षियों के रहवास, आय के साधन को नष्ट करने से पहले इसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसकी सोच बनाने का प्रयास नहीं किया गया। विकास के नाम पर आदिवासी समाज के प्राकृतिक संसाधनों व पर्यावरण से खिलवाड़ करने का काम किया गया है।

आदिवासी समाज का हुआ घोर अपमान
ग्रामीणों ने बीते 21 दिसंबर 2023 को हुए घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा है गांव के लोगों को बगैर सूचना दिए, क्षेत्र के सरपंचों को कपड़ा पहनने का मौका दिए बगैर निर्लज्जता पूर्वक पुलिस प्रशासन अलसुबह उठाकर ले गई, जो आदिवासी समाज का घोर अपमान है। समाज की ओर से इस कृत्य की घोर निन्दा की गई है और कहा है कि पूरा आदिवासी समाज खुद को अपमानित महसूस कर रहा है।
खदान के लिए अडानी को ऑक्सीजन हब देना भाजपा की प्राथमिकता-राजेश दुबे

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी विधि विभाग के महामंत्री एवं सरगुजा संभाग प्रभारी राजेश दुबे अधिवक्ता ने बयान जारी करके कहा है कि भाजपा सरकार सरगुजा के हरे-भरे हसदेव अरण्य के कटाई का विरोध कर रहे वनवासियों के जनआंदोलन को बलपूर्वक कुचलने में लगी है। हसदेव अरण्य की कटाई पर आक्रोश एवं दु:ख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार बने अभी एक पखवाड़ा भी नहीं हुआ और सरकार पहली प्राथमिकता देते हुए पूरी ताकत के साथ वनवासियों के जनआंदोलन को कुचलने मध्य भारत के ऑक्सीजन, हसदेव अरण्य की कटाई शुरू कर दी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी सरगुजा संभाग से हैं। आदिवासी वर्ग से होने के नाते उन्हें भली-भांति ज्ञान है कि आदिवासियों एवं वनवासियों की जीवनधारा जल, जंगल और जमीन होती है। इन्हें यह अधिकार पुरातन काल से मिला है। ऐसा प्रतीत होता है भाजपा यह तय कर रखी थी कि सरकार बनते ही सबसे पहले हसदेव अरण्य का सफाया कर खदान के लिए अडानी को देना है। पर्यावरण पर चिंतित आज पूरा विश्व जंगलों की सुरक्षा करने में जुटा हुआ है, ठीक इसके विपरीत भाजपा जंगलों का सफाया करने पर आमादा है। राजेश दुबे ने आगे कहा है कि भाजपा सरकार सिर्फ इतना बता दे कि हसदेव अरण्य के कटे हुए पेड़ों से पर्यावरण के लिए हुए बड़े नुकसान की भरपाई वो कैसे करेगी, उसके पास क्या योजना है? पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पहले ही अगाह किया था केंद्र की भाजपा सरकार की नजर छत्तीसगढ़ में नई खदान खोलकर अपने मित्रों को देने की है, आज उनकी बातें सच साबित हो रही हैं। ऐसे में स्पष्ट है कि भाजपा आदिवासियों, वनवासियों की हितैषी कभी नहीं हो सकती।

Categorized in: