दो बच्चियों के निजी स्कूल में शिक्षा का खर्च वहन कर रहीं, अब पिता से कमर से बंधकर स्कूल जाने वाली प्रिया का राह करेंगी आसान

गिरिजा  ठाकुर

अंबिकापुर। सेवा किटी समूह की महिलाएं समाज सेवा के ऐसे कार्यों में लंबे समय से हाथ बंटा रही हैं, जिससे मुसीबत में पड़े लोगों की राह आसान हो। इनके द्वारा गांधीनगर में रहने वाले एक ही परिवार की दो बच्चियां, जिनके पिता का सड़क हादसे में निधन हो गया, इनके निजी स्कूल में शिक्षा का खर्च बखूबी वहन कर रही हैं। दोनों बहनें वर्तमान में केजी टू और पहली में पढ़ रही हैं। इनके पिता की मौत कैटरिंग का काम करके आते वक्त सड़क हादसे में हो गई थी। इसके बाद सेवा किटी की महिलाएं इन बच्चियों के स्कूल फीस और आने-जाने के लिए वाहन सुविधा का खर्च निरंतर वहन कर रही हैं। बच्चियों की मां को सहारा मिले, इसके लिए रोजगारमूलक प्रबंध करने की दिशा में भी कदम बढ़ाने की मंशा है। दीपावली के मौके पर सेवा किटी की ओर से मासूम बच्चों को नए कपड़े व मिठाई देकर इनके दुख को बांटने का प्रयास किया गया। पुन: इन्होंने शहर की प्रिया नामक लड़की के मजदूर पिता को राहत देने के लिए कदम आगे बढ़ाने का फैसला लिया है। इस बच्ची को मजदूर पिता अपने कमर में बांधकर स्कूल लाता-ले जाता है। दिक्कत उस समय होती है, जब काम में भिड़े पिता को फुर्सत न मिले, उस दिन बच्ची स्कूल कैसे जाएगी, यह चिंता सताती है। बच्ची के परिवार को राहत मिले इसके लिए अगले सत्र में आसपास के स्कूल में बच्ची के दाखिला के साथ ही आने-जाने के लिए ऑटो की व्यवस्था करने का भरोसा स्वजन को सेवा किटी की सदस्यों ने दिलाया है। हाल में प्रिया के घर पहुंची सेवा किटी की वंदना दत्ता, लिलि बसु रॉय, अनामिका वर्मा, रानी कश्यप ने इस परिवार का हाल जाना और बच्ची के मजदूर पिता संजय से बातचीत करके हरसंभव सहयोग करने का भरोसा दिलाया। इनके द्वारा प्रिया के फिजियोथेरेपी की व्यवस्था और शिक्षा सहित अन्य जरूरतों को पूरा करने  की जिम्मेदारी ली गई है। सेवा किटी की महिलाएं जब प्रिया के घर उसका हाल जानने पहुंची तो उसकी आंखों में आंसू थे, पर हर कठिनाई को सहन करते हुए पढ़ने की प्रबल इच्छा उसकी सामने आ रही थी। प्रिया के छोटे भाई-बहन भी हैं, इनमें प्रिया बड़ी है। रोज कमर में बांधकर पिता उसे स्कूल छोड़ने और लेने के लिए जाते हैं। प्रिया के पिता ने बताया कि स्कूलों में बच्ची के दाखिले के समय उन्हें बहुत समस्या आड़े आ रही थी, लेकिन शासकीय कन्या विद्यालय में बच्ची को बेहिचक प्रवेश मिल गया। इनके पिता का कहना है कि शासन को कई आवेदन देने के बाद भी किसी प्रकार का सहयोग नहीं मिल पाया है। प्रिया की विवशता सामने आने के बाद प्रशासन बच्ची की मदद में कितनी रूचि लेगा, यह जानना शेष है। सेवा किटी की महिलाओं ने इस बच्ची के परिवार को आश्वस्त किया है कि प्रिया सिर्फ उनकी नहीं हम सबकी लाड़ली है। वंदना दत्ता ने बताया कि प्रिया को स्कूल जाने और ले जाने का काम महिला ऑटो चालक करेगी।

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