जामुन की बंपर पैदावार से ग्रामीण महिलायें हो रही समृद्ध

अंबिकापुर। सरगुजा के लखनपुर विकासखंड में जामुन की बंपर पैदावार ने ग्रामीणों की किस्मत बदल दी है। मानसून की पहली बारिश के साथ ही जंगलों और खेतों की मेड़ों पर लगे सैकड़ों जामुन के पेड़ काले-मीठे फलों से लद गये हैं। ग्रामीण परिवारों के लिए जामुन अब ‘काला सोना’ साबित हो रहा है।

बता दें कि इन दिनों लखनपुर विकासखंड के ग्राम तराजू और आसपास के इलाके से जामुन की जबरदस्त आवक है। ग्रामीण सुबह 4 बजे से ही अपने खेत के आसपास लगे पेड़ों से जामुन तोड़ने के लिये निकल पड़ते हैं। पेड़ों से टपके और तोड़े गए 35-40 किलो जामुन एक कैरेट में भरकर महिलाएं बस से अंबिकापुर पहुंचती हैं, और शहर के कलेक्टोरेट मार्ग में स्थित स्वामी विवेकानंद चौक में बेचती हैं। ग्राम तराजू की सोनमतिया, रसोईया, शिमला, रूकमेन, लालोबाई ने बताया कि शुरूआती दौर में जामुन का भाव 80 से 100 रुपये किलो रहा, जो अब 40-50 रुपये तक पहुंच गया है। पूर्व में शाम तक दो से ढाई हजार रुपये तक का जामुन वे बेच लेती थीं, वर्तमान में भाव कम होने के कारण एक कैरेट जामुन बिक्री के एवज में उन्हें 12 से 15 सौ रुपये रोजाना मिल जाता है, यह उनका शुद्ध मुनाफा रहता है, क्योंकि वे जामुन खरीदकर नहीं बल्कि अपने खेत, बगीचा में लगे पेड़ों से तोड़कर लाती हैं। महिलाओं ने बताया कि लगभग 10 दिन से वे रोजाना जामुन लेकर अंबिकापुर पहुंचती हैं, जिसमें करीबन 25 हजार रुपये तक आय अर्जन कर चुकी हैं। सिर्फ लखनपुर इलाके में दर्जनों महिलायें जामुन संग्रहण करके बेचने के लिए पहुंचती हैं। शाम होते तक इनका कैरेट पूरी तरह से खाली हो जाता है, और ये अपने घर के लिए रवाना हो जाती हैं।

जामुन से घर की कई जरूरतें हो रही पूरी

शिमला बताती है कि, पहले काफी जामुन खराब हो जाता था, अब कई बार खरीददार घर तक जामुन खरीदने के लिये पहुंच जाते हैं, लेकिन घर-गांव होने के कारण मुनाफा कम होता है। जामुन बिक्री से अच्छी खासी आय होने के कारण इनकी कई जरूरतें पूरी हो जाती हैं। बच्चों की फीस, घर का राशन सहित अन्य जरूरतों को वे आसानी से पूरा कर लेती हैं।

काला जामुन देखकर ठिठक जाते हैं कदम  

जामुन की मांग सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि डायबिटीज, पेट रोग और खून की कमी में फायदेमंद होने के कारण भी बढ़ जाती है। आयुर्वेदिक कंपनियां भी बड़े पैमाने पर इसकी खरीदी करती हैं। लखनपुर का जामुन आकार में बड़ा और ज्यादा मीठा होने के कारण इसकी मांग अधिक है। बाहर से आने वालों के कदम भी काले जामुन की चमक को देखकर ठिठक जाते हैं।

बन सकता है आय अर्जन का बड़ा जरिया

वन अधिकार के तहत ग्रामीण लघु वनोपज के संग्रहण को आय अर्जन का बड़ा जरिया बना सकते हैं। बाजार लिंकेज की जानकारी नहीं होने से कई बार चुनौती जैसी स्थितियां भी बनती हैं। कई जगह महिलायें स्व-सहायता समूह के माध्यम से जामुन से सिरका, जेली और गुठली का चूर्ण बनाकर अतिरिक्त आय अर्जन कर रही हैं।

Categorized in: