चुनावी चर्चा के बीच हाईप्रोफाइल सीटों को लेकर चल रही बड़ी टीका-टिप्पणी

गिरिजा कुमार ठाकुर

अंबिकापुर। विधानसभा चुनाव तिथि की घोषणा के बाद जीत-हार की नहीं सरकार किसकी… इसे लेकर संभावित कयास लगने लगे हैं। नुक्कड़ों में चाय की चुस्की के बीच चलती चर्चा को सुनने के बाद सामान्य व्यक्ति भी टीका-टिप्पणी करने से नहीं चूक रहा है। सबके अलग-अलग तर्क हैं। एक बार फिर सरगुजा से ‘सीएम  का जुबानी तरकस छूट रहा है। कांग्रेस को पिछली बार मिली बड़ी सफलता के पीछे का मुख्य कारण जनसामान्य ‘सरगुजा से मुख्यमंत्री  के आलाप को मान रहे हैं। कहने को इस चुनाव में कुछ अन्य पार्टियों के प्रत्याशी दावेदारी करते सामने आएंगे लेकिन नुक्कड़ में सिर्फ दो राष्ट्रीय पार्टियां कांग्रेस व भाजपा ही चर्चा में हैं। सरल शब्दों में कहें तो मतदाता वर्ग के लिए तीसरे विकल्प के रूप में कोई अन्य पार्टी फिलहाल नहीं है। एक तरफ भूपेश-टीएस मतदाताओं के बीच जय-वीरू और काका-बाबा के रूप में बसे हैं, वहीं चाऊर वाले बाबा डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल को भी लोग याद कर रहे हैं।

नुक्कड़ में होती बातों के बीच कई ऐसे हैं जो चुनाव से नहीं बल्कि जीतकर आने वाले प्रत्याशियों से ऊब चुके हैं। बात करें विधानसभा चुनाव 2023 की इस बार नए मतदाता की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। महिला मतदाताओं के हाथों में भी प्रत्याशियों की तकदीर है। निर्वाचन आयोग की मंशा भी नए मतदाताओं को मतदान के लिए प्रोत्साहित करने की कुछ अधिक है। युवाओं को वर्तमान सरकार की रीढ़ भी माना जा रहा है। इसके पीछे कारण बेरोजगारों पर सरकार की विशेष अनुकंपा बताई जा रही है, जबकि यही मुद्दा विपक्ष के लिए बीते चुनावी वर्ष में किसी ढाल से कम नहीं रहा। आचार संहिता के पहले तक सरकार का अंग रहा प्रशासन भी मतदाता जागरूकता कार्यक्रम में युवाओं को अधिकतर भागीदार बना रहा है। महिला मतदाताओं की संख्या अधिक है। ऐसे में ये भी सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी। इन सबके बीच कांग्रेस की ओर से सरगुजा में सभी प्रत्याशियों की घोषणा कर दी गई है लेकिन भाजपा ने हाईप्राफाइल सीट अंबिकापुर से चुनाव मैदान में आज तक किसी को सामने नहीं किया है। यह बात अलग है कि कुछ नामों पर वजन देने में लोग लगे हैं। इन सबके बीच डमी कंडीडेट अंबिकापुर से खड़ा करने जैसी बातों को भी बल मिलने लगा है। बहरहाल बीते चुनाव के बाद कुर्सी-कुर्सी की ड्रामेबाजी के बीच मुख्यमंत्री की जगह उपमुख्यमंत्री का ताज पहनेे टीएस सिंहदेव के दांव-पेंच के बीच जिस प्रकार प्रत्याशियों में फेरबदल की जो तस्वीर सामने आ चुकी है, वह सत्ता पक्ष की वापसी में कारगर होगा या 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद पांच साल का वनवास काटे विपक्ष को जनता अंक लगाएगी, यह भविष्य के गर्त में दफन है।

अंबिकापुर से भाजपा प्रत्याशी पर टिकी निगाह
मतदाताओं की नजर सरगुजा संभाग की हाईप्रोफाइल विधानसभा सीटों में कुछ ज्यादा है। भाजपा व कांग्रेस दोनों ही अब सरगुजा संभाग में अंबिकापुर विधानसभा को छोड़कर सारी सीटों पर वॉक ओवर दे चुके हैं। भाजपा से अंबिकापुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुकों की कमी नहीं है। कुछ तो दिल्ली तक दौड़ लगा चुके हैं। कांग्रेस ने अविभाजित सरगुजा की सभी हाईप्रोफाइल सीटों से प्रत्याशी का चेहरा सामने ला दिया है। इसके साथ ही हाईकमान के समक्ष टीएस के दबदबा व पुन: सत्ता के सिंघासन में बैठने जैसी बातें होने लगी हैं।

कांग्रेस के प्रत्याशी मैदान में डटे, टिकट से वंचित ‘सिटिंग एमएलए मोबाइल में व्यस्त

कांग्रेस के द्वारा सरगुजा संभाग से प्रत्याशियों के चेहरे सामने लाने के बाद बनी उहापोह की स्थिति पर विराम लग गया है। इसके साथ ही लोगों के जुबां से सुनने को मिल रहा है कि टीएस सिंहदेव भले ही मुख्यमंत्री नहीं बने, लेकिन उन्होंने विधानसभा चुनाव के लिए टिकट वितरण के मौके पर अपने कद का एहसास करा दिया है। अविभाजित सरगुजा में सिटिंग विधायकों का टिकट कटना और नए चेहरों का सामने आना इसे पुष्ट करने के लिए काफी है। इधर चुनाव मैदान में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को कड़ी टक्कर देने की मंशा रखे कुछ विधायक मौन तो कुछ बयानबाजी कर भड़ास निकालने में पीछे नहीं हैं। नए विधायक प्रत्याशी, जिन्हें पार्टी ने मैदान में उतारा है वे भले ही राजनीति के साम, दंड, भेद से वाकिफ ना हों लेकिन जनता के बीच बतौर विधायक प्रत्याशी जाना इन्हें गौरवान्वित कर रहा है। बुधवार को बतौर प्रत्याशी नाम की विधिवत घोषणा करने के बाद इनकी पहले दिन की दिनचर्या बदली हुई रही। कोई पूजा-पाठ करके चुनावी वैतरणी पार कराने वाले मतदाताओं के बीच पहुंचा तो कोई अपने बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर। पहली बार जिन्होंने चुनाव में हिस्सा लिया है, उनके स्वजन भी प्रफुल्लित हैं। मतदाताओं के बीच पहुंचने पर पार्टी के कार्यकर्ता क्षेत्र के लोगों के साथ जिस प्रकार फूल-माला पहना कर इनका स्वागत कर रहे हैं, वह इनमें जोर भर रहा है। हालांकि नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद अभी कई मोड़ से उन्हें गुजरना है।

सदमा ऐसा कि ये विधायक कॉल बैक करना भूले

टिकट से वंचित विधायक बृहस्पति सिंह, चिंतामणी महराज, डॉ. प्रेमसाय सिंह से रूबरू होने का जब हमने प्रयास किया तो सामरी विधायक चिंतामणी सिंह ने लंबे समय तक मोबाइल व्यस्त रहने के बाद डॉयल हो रहे कॉल को रिसीव नहीं किया। रामानुजगंज विधायक बृहस्पति सिंह और प्रतापपुर विधायक रहे डॉ. प्रेमसाय सिंह का फोन लगातार व्यस्त बता रहा था। तीनों विधायकों के मोबाइल में वेटिंग कॉल गया, लेकिन इन्होंने कॉल बैक करने का प्रयास नहीं किया। इससे समझा जा सकता है कि ये विधायक क्षेत्र की आम और सामान्य जनता के लिए कितनी संजीदगी रखते होंगे।

बृहस्पत ने टीएस पर निकाली है कुछ ऐसे भड़ास

इधर विधायक बृहस्पति सिंह का सोशल मीडिया में टीएस सिंहदेव के प्रति भड़ास निकालने वाला एक बयान वायरल हुआ है। इसमें उन्होंने भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के बीच समझौता होने की बात कही है। उन्होंने कहा है डमी कंडीडेट खड़ा करके टीएस सिंहदेव अपनी राह आसान करने में लगे हैं, वहीं रामानुजगंज से रामविचार नेताम का रास्ता साफ किया है। बृहस्पत सिंह ने कहा है टीएस सिंहदेव लगातार कांग्रेस के खिलाफ काम कर रहे हैं, इसके बाद भी कांग्रेस के हाईकमान क्यों चुप हैं, यह तो बड़े नेता ही जानते हैं।

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