गिरजा ठाकुर

अंबिकापुर। सरगुजा जिला में क्षय बीमारी, महामारी की तरह पांव पसार रही है। क्षय बीमारी के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुये जिला क्षय उन्मूलन कंेद्र सरगुजा के द्वारा लगातार घर-घर खोजी अभियान संचालित किया जा रहा है। विगत वर्ष 1600 से ज्यादा मरीजों को चिन्हांकित कर इलाज प्रारंभ किया गया था, जबकि वर्ष 2023 में 1000 मरीज क्षय रोग के मिल चुके है, जिसमें 59 मरीज की मृत्यु क्षय रोग से हो चुकी है। क्षय बीमारी अदृष्य कण, मायको बैक्टीरिया ट्युबर कुलोसिस जीवाणु से होती है। ये क्षय रोग के मरीज के खांसने से वातावरण में फैल जाते हंै, सांस लेने से क्षय बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। वर्तमान में लाख की जनसंख्या में 196 मरीज में क्षय रोग कीटाणु रहने की संभावना है, जिसमें 3 से 6 प्रतिशत मरीज की मृत्यु होती है।

इसलिए आवश्यक है क्षय रोग का उन्मूलन
क्षय रोग शरीर को दुर्बल कर देता है। फेफड़ों को गला देता है, कमर की हड्डी को कमजोर कर मवाद बना देता है, जिससे पैर में लकवा की शिकायत होाती है। पेट में लगातार दर्द बने रहना, गले में गठान का पाया जाना, आंख में लालिमा का बने रहना व झटके या मिर्गी की परेशानी क्षय रोग के संक्रमण से हो सकती है। क्षय रोग से व्यक्ति कमजोर हो जाता है, यह जानलेवा साबित होता है। क्षय रोग के उपचार के लिए जिले में कई दवाइयां प्रतिदिन दी जाती हैं। किस मरीज को क्या दवाई दी जाएगी यह मरीज के बलगम जांच से निर्धारित होता है। बीमारी के उपचार की अवधि 06 माह से लेकर 21 महीने तक है। उपचार के दौरान मरीज को प्रोटीन युक्त पोषण आहार का सेवन करने की सलाह दी जी है।

इन्हें क्षय रोग होने की प्रबल संभावना
क्षय रोग होने की सबसे ज्यादा संभावना उच्च जोखिम मरीजों को होती है। एचआईव्ही संक्रमित मरीज आर्गेन ट्रांसप्लांट व कैंसर के मरीज, शुगर बीमारी से पीड़ित, तंबाखु व धूम्रपान करने वाले मरीज के बीमारी से घिरने की संभावना प्रबल होती है। क्षय रोग का लक्षण खांसी में बलगम, शरीर दुर्बल होना, बच्चों में शारीरिक विकास का ना होना, गले व पेट में गठान का पाया जाना, नपुसंकता या इलाज के बाद भी लंबे समय तक बीमार रहना है। रोग की पुष्टि के लिए एकमात्र जांच बलगम या खखार जांच है। इस जांच में क्षय रोग के कीटाणु के सूक्ष्म कण को भी ट्रूनॉट, सीबीनाट माध्यम से जांचा जाता है। शासकीय संस्थानों में ये जांच पूर्णत: नि:शुल्क हंै। विशेष स्थिति में क्षय रोग की पहचान एक्स-रे, सोनाग्राफी, सिटी स्केन व लक्षण के अधार पर की जाती है।

ऐसे करें क्षय रोग से बचाव
उच्च जोखिम समूह को क्षय रोग से बचाव के लिए सार्वजनिक स्थान में मास्क पहनना चाहिए। ऐसे व्यक्ति जो क्षय रोग के धनात्मक मरीज हैं, जिनके खखार में टीवी के कीटाणु हैं, उन्हें टीबी का प्रोफायलक्सिस इलाज 3 से 6 महीने का लेना चाहिए। क्षय रोगी जांच व इलाज पूर्णत: नि:शुल्क है, साथ में प्रत्येक क्षय रोगी को पौष्टिक आहार हेतु तीन हजार रुपये निक्क्षय पोषण आहार के तहत प्रदाय किया जाता है।

एक नजर में क्षय रोगियों के मामले
* सुरजपुर के सभ्रांत परिवार की 23 वर्षीय महिला जिन्हें क्षय रोग या पांच दिन से खांसी व कमजोरी की शिकायत थी। सभी जांच हुए परंतु क्षय रोग से संबंधित जांच नहीं हुई और मरीज कोमा में चली गई। तीन महीने तक वेंटीलेटर में रहने के बाद शरीर केवल हड्डी का ढांचा बनकर रह गया है।

* वाड्रफनगर के मरीज जिन्हें लंबे समय तक खांसी आती रही, जो दवाई लेने से कुछ कम हो जाती थी। पूरे ईलाज के लिए जब खखार जांच व छाती का एक्स-रे हुआ तो पता चला टीबी है। फेफड़ा पूरी तरह से गल चुका था, ये मरीज आक्सीजन के लिए महीने में 15 से 20 दिन अस्पताल में भर्ती रहता है।

* नमनाकला निवासी 16 वर्षीय मरीज के गले में गठान थी, इसके एक महीने बाद कमर में दर्द हुआ। एक्स-रे होने पर रीड की हड्डी का गलना पाया गया। बाद में चलने-फिरने में तकलीफ हुई तो पता चला पीठ की हड्डी में टीबी है और अब चलने में असमर्थ है। इसकी बीमारी ला-इलाज हो चुकी है।

* प्रतापपुर के सभ्रांत परिवार के 48 वर्षीय मरीज की दोनों किडनी काम करना बंद कर दी। किडनी की बायोप्सी होने पर किडनी का क्षय रोग से ग्रसित होना पाया गया। मरीज डायलिसिस पर निर्भर था, जिसे उच्च ईलाज के बाद बचाया नहीं जा सका।

डॉ.शैलेंद्र गुप्ता
राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अस्पताल के जिला क्षय उन्मूलन कंेद्र में माइक्रोस्कोपी सामान्य एवं फ्लोरोसेन्स विधि, टुनॉट, सीबीनॉट एवं एक्स-रे जॉच की नि:शुल्क सुविधा उपलब्ध है। सभी प्रकार के क्षय रोग की समान्य व बहुऔषिधीय प्रतिरोधी दवाई आइसोनियाजिड रिफामपिसिन पैराजिनामाइड, इथामबुटाल, मोक्सीफलोक्सासीन, लिवोफलोक्सासीन, साइक्लोसिरिन, इथोनामाइड, पास, लिनोजोलिड, क्लोफाजेमिन, बेडाक्लुलिन, डेलामिनेड, पैरीडाक्सीन दवाइयां उपलब्ध है। क्षय रोग का लक्षण होने की स्थिति में मरीज को त्वरित उपचार सुविधा लेनी चाहिए, ताकि बीमारी का समुचित उपचार समय रहते सके।  
डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता
जिला क्षय अधिकारी सरगुजा

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