चंगुल में आने के बाद अवैध वसूली के लिए हर ट्रिक अपनाता है तैनात जवान

अंबिकापुर। शहर में यातायात व्यवस्था को दुरूस्त करने की काफी कवायदें हो रही हैं, पुलिस अधीक्षक से लेकर अन्य आईपीएस इसके लिए ताकत झोंक रहे हैं, लेकिन यातायात पुलिस जिसे वास्तव में इसकी कमान मिली है, वो कितनी ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में लगी है, इसका अंदाजा गांधी चौक से अनजाने में शहर की ओर नो एंट्री में प्रवेश करने वाली वाहनों से लगाया जा सकता है। गांधी चौक से शहर सीमा में भारी वाहनों का प्रवेश न हो, इसके लिए किसी प्रकार का संकेतात्मक बोर्ड नहीं लगा है। चौराहे में सिग्नल लगने के बाद यातायात पुलिस का ध्यान सिर्फ नियम तोड़ने वालों पर रहता है। चौराहे से कोई भारी वाहन का चालक अनजाने में शहर सीमा में प्रवेश कर रहा हो, तो उसे शुरूआत में ही रोकने का प्रयास नहीं किया जाता है। वाहन चालक जब कुछ दूरी तय कर लेता है, तो उसका कैसे दोहन किया जाए, इसकी कोशिश शुरू हो जाती है, पीछे से यातायात पुलिस का जवान एक सहयोगी के साथ दौड़ लगाने लगते हैं। गांधी चौक से चंद फासले में ही यातायात पुलिस का थाना है। यहां आने तक किसी अधिकारी की नजर नहीं पड़ी तो इन्हें थाना ले जाने के नाम पर यातायात पुलिस का एक सिपाही ट्रक या अन्य मालवाहक में सवार हो जाता है और उसे सुरक्षित नो एंट्री से बाहर निकालने धन उगाही के प्रयास में लग जाता है। बाहर से आने वाले ट्रक चालक के दिमाग में जब यह बात बैठ जाती है कि अभी बड़े साहब से पाला नहीं पड़ा है, उनका मूड बदल गया तो लंबी चपत लगेगी, नौबत अदालत से गाड़ी छुड़वाने की भी बन सकती है, तो वह पचड़े में फंसने के बजाए इन छोटे साहबों के सामने हाथ जोड़कर उन्हें खुश करने खींसे निपोरते नोट पकड़ाने लगता है।
जी हां…ऐसा नजारा आए दिन शहर के लोग खुली आंखों से देखते हैं। कभी किसी ट्रांसपोर्टर के गोदाम का चक्कर लगाते यातायात पुलिस के जवान दिखते हैं, तो कभी नो एंट्री में वाहनों के प्रवेश पर टकटकी लगाए नजर आते हैं। शुक्रवार की दोपहर कुछ ऐसा ही हुआ। बनारस चौक से होते गांधी चौक उत्तर प्रदेश का एक ट्रक चालक पहुंचा, यहां नो एंट्री जैसा कोई संकेतक नहीं रहने के कारण वह धोखे से शहर सीमा की ओर प्रवेश कर गया। चौक पर यातायात के सिपाही मौजूद थे, जो रोजाना की तरह जैसे इसके नियम तोड़ने का इंतजार कर रहे थे। गांधी चौक के दूसरे हिस्से में मौजूद यातायात पुलिस कथित रूप से इस ट्रक चालक को रोकने आवाज लगाई, लेकिन भीड़भाड़ और वाहनों के शोर के बीच ट्रक चालक के कानों तक यह आवाज नहीं पहुंच पाई। इसके बाद ट्रक में एक यातायात पुलिस का जवान सवार हो गया, दूसरा मोटरसाइकिल लेकर आगे-पीछे होते  कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन, केदारपुर स्कूल पार करते ट्रक को सुरक्षित स्टेडियम परिसर से लगे अग्निशमन विभाग के पुराने कार्यालय तक ले आया। यहां ट्रक को खड़ी करवा कर यातायात पुलिस के जवान व चालक में गुफ्तगूं चल ही रही थी कि, इसकी तस्वीर कैमरे में क्लिक हो गई। हालांकि इसके बाद उक्त जवान चालक को यह कहते हुए उलझाने के प्रयास में रहा कि गाड़ी लॉक करके साहब के पास चलो, बता देना गलती से नो एंट्री में प्रवेश कर गया हूं। चालक भी बड़ी सफाई से इनसे बचकर निकलने के प्रयास में लगा था।
एसपी बंगला से चंद फासले पर है यह चौक
पुलिस अधीक्षक के बंगला से चंद फासले पर मौजूद गांधी चौक कुछ यातायात पुलिस के जवानों के लिए कुबेर बनकर रह गया है। भारी वाहनों के चालक कब नियम तोड़ते नो एंट्री में प्रवेश करें, इसका इंतजार वे करते रहते हैं। आए दिन ऐसा परिदृश्य सामने आता है। चौक-चौराहों की व्यवस्था दुरूस्त करते वर्षों बीत गए पर आज तक यहां नो एंट्री के समय में भारी वाहनों का प्रवेश ना होने पाए, इसका संकेतक बोर्ड नहीं लग पाया है।

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