बलरामपुर (राजेन्द्र ठाकुर)- इस कोरोना महामारी में चिकित्सक, पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी, स्वयंसेवी संस्थाएं, कोरोना वारियर्स से लोगों की जान बचाने में जी-जान से जुटे हैं। ऐसे ही प्रदेश की 108 एम्बुलेंस सेवा के कर्मचारी है। उन्हें इसबात की भी चिंता नहीं है कि वे भी संक्रमित हो सकते हैं। इन सभी तरह की चिंताओं को परे रखकर वे संदिग्धों और कोरोना पॉजिटिव मरीजों को लाने ले-जाने में जुटे हुए हैं।

जनसेवा उद्देश्य- चालक राहुल कुमार यादव ने बताया कि 108 ज्वाइन करने के पीछे उद्देश्य जनसेवा का था। जान-जोखिम में डालकर भी नहीं डगमगाना अपने माता-पिता से सीखा है, इस संकट की घड़ी में देश सेवा में 108 सेवा के कर्मचारी कैसे पीछे रहेंगे।

उन्होंने दैनिक छत्तीसगढ़ फ्रंटलाइन संवाददाता से बात करते हुए बताया कि 108 का काम ही इमरजेंसी सेवा देना है, फिर चाहे कोरोना हो या कुछ और। आमजन की सेवा करना हमारा धर्म है, फर्ज निभाते में जान जोखिम में डालकर भी सेवा कर रहे हैं। आगे भी करते रहेंगे।

चालक प्रवीण ने बताया कि एम्बुलेंस 108 की सेवा में जब किसी को अस्पताल लाते है और वह वापस ठीक होकर घर जाता है तो उससे मिलने वाली दुआएं हमारा सुरक्षा कवच है। हम साधन-संसाधनों के अलावा कर्म पर भरोसा करते हैं।कोरोना महामारी में हम लोग 108 में सेवा दे रहे हैं। हम परिवार को छोड़कर दिन-रात 108 में काम कर रहे हैं। क्योंकि देश की सुरक्षा ही हमारी सुरक्षा है और अपनी सेवा दे रहे है, ऐसे में मरीज चाहे पॉजिटिव है या नेगेटिव फिर भी हम उनको घर से चिकित्सालय छोड़ रहे हैं। ताकि वह जल्दी सही होकर घर जाएं। और हम इस महामारी को हराने में सफल हो सकें।

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