मामला महामाया पहाड़ में 254 कब्जाधारियों द्वारा किए गए अतिक्रमण का
अंबिकापुर। अंबिकापुर के महामाया पहाड़ पर अतिक्रमण के मामले में एक तरफ जहां प्रशासनिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि 254 लोग अवैध कब्जाधारकों ने 3.39 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा कर रखा है, इन्हें जनप्रतिनिधियों ने बसाया है। अब प्रशासनिक जांच पर छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष शफी अहमद ने सवाल खड़े किए है। शफी अहमद का आरोप है कि जिला प्रशासन, भाजपा पार्षद के साथ सांठगांठ कर जांच रिपोर्ट तैयार की है।


अंबिकापुर के महामाया पहाड़ पर अतिक्रमण किए जाने के मामले में जिला प्रशासन द्वारा जांच रिपोर्ट जारी किया गया है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस हमलावर हो गई है। छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष शफी अहमद ने प्रेस वार्ता कर प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए हैं। शफी अहमद का कहना है कि जिला प्रशासन ने भाजपा पार्षद के साथ साठगांठ कर जांच रिपोर्ट तैयार की है। कुछ महीने पहले भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने गंभीर आरोप लगाए थे कि वोट बैंक के लिए कांग्रेस ने महामाया पहाड़ पर लगभग 500 विशेष समुदाय के लोगों को बिहार और झारखंड से बुलवाकर बसाया है। अतिक्रमण धारियों में रोहिंग्या भी शामिल है। इस मामले में भाजपा पार्षद ने जिला प्रशासन से जांच कर कार्रवाई की मांग की थी। पार्षद द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप के बाद राजस्व विभाग, वन विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम पूरे मामले की जांच की। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि महामाया पहाड़ पर 254 लोग अवैध कब्जा कर रह रहे है। इनमे से एक भी रोहिंग्या मुसलमान नहीं है। इधर प्रशासन द्वारा जारी किए गए जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि 254  लोगों को पूर्व पार्षद, सरपंच सहित शफी अहमद द्वारा बसाया गया है। सभी कब्जा धारियों का राशन कार्ड और वोटर आईडी भी जनप्रतिनिधियों द्वारा बनवाया गया है। शफी अहमद ने जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा जिन 254 अवैध कब्जाधारियों की वोटर आईडी बनवाने की बात जिला प्रशासन कहा रहा है, प्रशासन अपने ही बातों में फंस रहा है। क्योंकि वोटर आईडी बनवाने का कार्य जनप्रतिनिधियों का नहीं बल्कि जिला प्रशासन का होता है। प्रशासन के लोग ही पात्र नागरिकों का वोटर आईडी बनाते हैं। अपात्र व्यक्तियों का नाम वोटर लिस्ट से पृथक करते हैं। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी थी कि महामाया पहाड़ पर अवैध तरीके से रह रहे 254 लोगों का नाम वोटर लिस्ट से हटाए। श्रम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा शासनकाल के दौरान 2016 से पहले 130 बहुसंख्यक और 88 अल्पसंख्यक वर्ष के लोग अवैध कब्जा कर महामाया पहाड़ पर बसे थे। बावजूद इसके जिला प्रशासन और वन विभाग के द्वारा पूर्व में कब्जा खाली नहीं करवाया गया। जिला प्रशासन और वन विभाग की जिम्मेदारी थी कि महामाया पहाड़ पर हो रहे अतिक्रमण को रोका जाए। अब भाजपा पार्षद के साथ सांठगांठ कर जिला प्रशासन ने जांच रिपोर्ट तैयार की है। वहीं अब रोहिंग्या मुसलमानों की महामाया पहाड़ पर बसे होने की पुष्टि नही होने पर शफी अहमद ने भाजपा पार्षद आलोक दुबे से नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग की है।

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