मनेन्द्रगढ ! एक ऐसा घराना जिसका हँसता खेलता परिवार की मानों जैसी दुनियां ही उजड गई, एक समय था जब यह छोटा परिवार मेहनत के दम पर अपना एवं अपनें बच्चो का पालन पोषण करते थे, मगर इस परिवार का मुखय सदस्य का कोरोना की चपेट में आनें से असमय काल के गाल में समां गया, और देखते ही देखते इस परिवार में मानों दुखों का सैलाब टुट पडा ! मनेन्द्रगढ के मनि मोहल्ले में निवासरत संध्या सिंह, जिनके पति की कोरोना के कारण मृत्यु हो चुकी है, संध्या सिंह जो स्वयं भी कोरोना पीड़ित थी और उन्हें ग्लुकोमा की बिमारी है जिसके कारण इस महिला को आँखों से 80 प्रतिसत दिखाई नहीं देता है, वहीं संध्या सिंह के दो मासुम बच्चे है , जिसमें प्रिंस सिंह सबसे बड़ा बेटा है, जो खुद चालिस प्रतिसत दिब्यांग है जो बोल नही नही पाता वहीं सबसे छोटी बेटी प्रियांशी सिंह जो कक्षा सातवी की बच्ची है, जो फिलहाल अपनें घर का सारा काम करते हुये अपनें बडे दिब्यांग भाई और अपनी अंधी मां का सहारा बन कर सेवा करती है ! आज से कुछ माह पुर्व इनके पिता पर ही घर की आर्थिक जिम्मेदारी थी वो नहीं रहे तो इन पर आर्थिक संकट आ गया है, और दानें दानें के लिये मोहताज हो गये, किसी तरह दुसरों की रहमों करम पर अपना एवं अपने बच्चो का पेट पालती रही! जब इस महिला की हालात के बारे में समाज सेवी संस्था प्रबल स्त्री फाउंडेशन को जानकारी हुआ तब संस्था के महिला सदस्यों नें जाकर संध्या सिंह से मिल कर उनका दर्द सुना ! और महिला की पुरी समस्या को जानकर फाउंडेशन ने मदद का हाँथ बढाया जिससे उस महिला और दो मासुम बचचो को दर दर भटकना ना पडे ! वहीं प्रबल स्त्री फाउंडेशन द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार के लिये सोशल मिडिया की मदद से मदद करनें की अपील किया गया, वहीं संस्था द्वारा अपील के बाद लोगों नें काफी बढ चढ कर मदद के लिये हाँथ बढाया, और अपनें अपनें सतर से मदद किया! खास कर प्रबल स्त्री फाउंडेशन की अपील पर चेतना महिला संगठन झगराखंड ने भी बढ़िया सहयोग किया, इस पूरे सहयोग मे प्रबल स्त्री फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ रश्मि सोनकर, शीला सिंह, प्रतिमा प्रसाद, प्रियंका राय, हीरा सिंग और अनामिका चक्रबर्ती का सहयोग शुरु से अंत तक मिला, और 11 हजार 100 रुपये की राशि जमा हुई, जो संध्या सिंह को मदद के रूप में दिया गया ! इस मौके पर संध्या सिंह ने कहा कि आज जिस तरह से प्रबल स्त्री फाउंडेशन की दीदी लोगो का सहारा मिला है, जो अब तक किसी भी जनप्रतिनिधियों ने हमारे एवं बच्चो को सुध लेने नही आया ! दानदाता के रूप में वीर सोनकर, रचना दुबे, परमानंद माली, अनामिका चक्रबर्ती, यशोदा सोनकर, वसुधा मिश्रा, जवाबर सोनकर, और गुप्त दानदाताओं ने भी सहयोग किया!

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