मनेंद्रगढ़ (शुद्धूलाल वर्मा)- समूचे मनेंद्रगढ़ अंचल में बुधवार को देवउठनी एकादशी श्रद्धा भाव के साथ मनाई गई तथा तुलसी विवाह संपन्न कराया गया। विवाह त्योहारों का मौसम नवंबर अपने अंतिम पड़ाव पर है। करवा चौथ से लेकर दिवाली और छठ पूजा जैसे पर्व समाप्त हो चुके है। बुधवार 25 नवंबर 2020 को तुलसी विवाह व देवउठनी एकादशी का त्यौहार मनाया गया जो साल का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार माना जाता है। तुलसी विवाह के साथ ही मांगलिक कार्यक्रमों के द्वार खुल जाएंगे तथा शहनाईयों की गूंज सुनाई देने लगेगी! कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में एकादशी को मनाने की परंपरा है। इस दिन से वैवाहिक जीवन में बंधने की इच्छा रखने वाले नये जोड़ो का विवाह आयोजन व अन्य धार्मिक अनुष्ठान आरंभ हो जाता है। दरअसल, चतुर्मास भी देवउठनी एकादशी से समाप्त हो जाती है। ऐसी मान्यता है कि देवउठनी एकादशी पर श्री भगवान विष्णु जी चार महीने की निद्रा से उठते है और वापस से सृष्टि का कार्य-भार संभालते है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की इसी एकादशी पर भगवान विष्णु ने माता तुलसी संग विवाह किया था। यही कारण है कि इस दिन तुलसी विवाह करने की भी परंपरा है। इस मामले के जानकारों की मानें तो देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह करना बेहद शुभ होता है। पारिवारिक या वैवाहिक जीवन काफी सुखद व्यतीत होता है। इस साल देवउठनी एकादशी 25 नवंबर 2020 बुधवार को मनाई गई! देवउठनी एकादशी बुधवार के दोपहर 02:42 बजे से शुरू होकर 26 नवंबर 2020 को 05 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। ऐसी मान्यता है कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी के दिन भगवान गहरी निद्रा में सो जाते हैं और कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी को शुभ मुहूर्त में जागते है। वैसे नवंबर व दिसंबर में शादियों के शुभ मुहूर्त काफी कम है। अगले साल भी अर्थात वर्ष 2021 में भी गुरु और शुक्र के अस्त होने के कारण शादियों के मुहूर्त काफी कम हैं। आपको बता दें कि 17 जनवरी से 15 फरवीर के बीच देव गुरु अस्त हो जायेंगे! ऐसे में इस दौरान शहनाईयां नहीं बजेंगी! वर्ष 2020 का अंतिम मुहूर्त 11 दिसंबर 2020 को है। जिसके बाद सीधे अप्रैल 2021 में ही शहनाई की गुंज सुनाई देगी।

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