स्टाइपेंड बढ़ाने सहित अन्य मांगों को लेकर 6 अगस्त से दे रहे धरना

अंबिकापुर। मेडिकल कॉलेज संबद्ध जिला अस्पताल परिसर में सोमवार को सफेद एप्रन पहने इंटर्न डॉक्टर हाथ में केतली और चाय के लिए डिस्पोजल कप लिए नजर आए। धरनास्थल पर अदरक मिश्रित चाय की खुशबू के साथ एक डिब्बा भी ये रखे थे जिसमें जितनी मर्जी रकम डाल सकते थे। ऐसे में अस्पताल परिसर का नजारा बदला हुआ था। इनकी मांग है कि राज्य के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में इंटन्र्स के वर्तमान स्टाइपेंड का तत्काल समीक्षा की जाए। इंटन्र्स के स्टाइपेंड में उचित एवं सम्मानजनक वृद्धि की जाए। स्टाइपेंड वृद्धि के संबंध में स्पष्ट एवं लिखित शासनादेश जारी किया जाए। संशोधित स्टाइपेंड के क्रियान्वयन हेतु स्पष्ट समय सीमा निर्धारित की जाए। भविष्य में इंटर्न स्टाइपेंड की समय-समय पर समीक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि यह महंगाई एवं वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बना रहे। इनका कहना था कि एमबीएस की पढ़ाई के बाद मिलने वाला स्टाइपेंड इतना कम है कि एक चाय बेचने वाला भी उनसे ज्यादा कमा लेता है।

बीते छह अगस्त से इन मांगों को लेकर धरने पर बैठे इंटर्न चिकित्सकों ने 12वें दिन सोमवार को प्रदर्शन का तरीका बदला। धरनास्थल पर ही इन्होंने चाय बनाई, और अस्पताल में आने-जाने वाले मरीजों के स्वजन, स्टाफ और आम लोगों को चाय पिलाते हुए अपनी पीड़ा को सामने लाने का इन्होंने प्रयास किया। चाय के साथ एक डिब्बा भी ये रखे थे। इंटर्न चिकित्सकों ने कहा कि अगर किसी को चाय की कीमत देनी हो तो वह स्वेच्छा से डिब्बे में राशि डाल सकता है। इस प्रतीकात्मक कदम के जरिए उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की, कि बाजार में एक चायवाला दिनभर में जो कमाता है, वह 24 घंटे ड्यूटी करने वाले इंटर्न डॉक्टर के दैनिक स्टाइपेंड से ज्यादा है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में एमबीबीएस चायवाला प्रदर्शन लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा था। बीच-बीच में ये नारेबाजी करके सरकार के द्वारा की जा रही अनदेखी के प्रति नाराजगी भी जाहिर कर रहे थे। इंटर्न चिकित्सकों का कहना है कि, वे पूरे समर्पण भाव से मरीजों का इलाज कर रहे हैं। आपातकालीन, ओपीडी और वार्ड में दिन-रात ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है।

अन्य राज्यों की तुलना में सबसे कम स्टाइपेंड

अन्य राज्यों की तुलना में प्रदेश में एमबीबीएस इंटर्न को मिलने वाला स्टाइपेंड सबसे कम है, जबकि दूसरे राज्यों में इंटर्न को कहीं अधिक स्टाइपेंड दिया जाता है। उन्हें स्टाइपेंड में वृद्धि के साथ ही अस्पताल में सम्मान और सुरक्षा भी चाहिए। छत्तीसगढ़ में 15900 रुपये स्टाइपेंड मिलता है, इसे कम से कम 30000 रुपये करना उनके हित में होगा। इंटर्न ने कहा, हम डॉक्टर बनने के बाद भी आर्थिक रूप से इतने कमजोर हैं कि स्वयं का खर्च चला पाना मुश्किल हो रहा है। अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो यह आंदोलन और तेज होगा।

प्रदेश के करीब 1000 इंटर्न चिकित्सक दे रहे धरना

बता दें कि प्रदेश स्तर पर सभी मेडिकल कॉलेजों के लगभग 1000 इंटर्न चिकित्सक स्टाइपेंड में वृद्धि को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में इंटर्न की संख्या 116 है, जो 6 अगस्त से रोजाना धरना में अपनी शांतिपूर्वक उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। सोमवार का एमबीबीएस चायवाला प्रदर्शन इसी आंदोलन का हिस्सा था। इंटर्न चिकित्सकों ने साफ कहा है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। इस अनोखे प्रदर्शन को देखकर अस्पताल आए लोग भी रुककर उनकी बातों को सुनते रहे। कई लोगों ने चाय पीने के साथ डिब्बे में सहयोग राशि भी डाली और इंटर्न की मांग का समर्थन किया।

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