अंबिकापुर। सरगुजा जिला के लुण्ड्रा थाना क्षेत्र से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल से छुट्टी के बाद संबंधियों के साथ नवजात को लेकर जा रही महिला दोपहिया से कूदकर झाड़ियों में छिप गई, और नवजात को पत्थर से दबा दी। खोजबीन में महिला मिली और संबंधियों ने बच्चे के बारे में पूछा तो कुछ नहीं बताई। हालांकि, कुछ ग्रामीणों की नजर महिला पर पड़ गई थी। उसे भागते देख संदेह हुआ और वे मौके पर पहुंचे तो जीवित अवस्था में बच्ची पत्थरों के बीच दबी हुई थी। बच्चे को सुरक्षित निकालने के बाद में इसे महिला के सुपुर्द कर किया गया। नवजात की मेडिकल काॅलेज संबद्ध जिला अस्पताल अंबिकापुर में मौत हो गई। महिला के द्वारा ऐसा कदम संभवतः गरीबी और नइहर व ससुराल पक्ष का साथ नहीं मिला है।
जानकारी के मुताबिक, लुण्ड्रा थाना क्षेत्र के ग्राम राता डांडपारा निवासी रामबाई पति स्व. विजय को 11 अगस्त को प्रसव पीड़ा होने पर बरगीडीह स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था, यहां वह स्वस्थ्य बच्ची को जन्म दी थी। बच्ची के पिता विजय की मौत करीब 5 माह पूर्व हो गई है। ऐसे में जीजा दादूराम और परिवार के सदस्य देखरेख के लिए अस्पताल में थे। 14 अगस्त को चिकित्सक ने प्रसूता की छुट्टी कर दी थी, और दोनों को घर ले जाने के लिए कहा गया था, लेकिन बारिश होने के कारण वे अस्पताल में ही रूके थे। 15 अगस्त को जीजा दादूराम ने अपने भतीजा पंकज को मोटरसायकल लेकर अस्पताल बुलाया और दोनों रामबाई को नवजात के साथ अस्पताल से उसके गृहग्राम राता जाने निकले थे। स्वजन का कहना है कि, गांव से करीब एक किलोमीटर पहले प्लांटेशन के आसपास नवजात बच्ची के साथ रामबाई मोटरसायकल से कूदकर दौड़ लगा दी और झाड़ियों में छिप गई। काफी खोजबीन के बाद महिला तो मिल गई, लेकिन नवजात उसके साथ में नहीं था। काफी पूछताछ के बाद भी वो बच्ची के बारे में कुछ नहीं बताई और वे उसे घर ग्राम राता लाकर छोड़ दिए थे।
*चरवाहों ने देखा भागते*
बताया जा रहा है कि, रामबाई जब मासूम बच्ची को पत्थर से ढककर भाग रही थी, उस समय कुछ ग्रामीण चरवाहों की नजर उस पर पड़ी थी, और वे मौके पर पहुंचे। यहां पत्थर के बीच रो रही की आवाज को सुनकर वे उसे सुरक्षित बाहर निकाले थे। इधर ग्राम राता पहुंचने के बाद महिला से बच्चे के बारे में पूछताछ करने पर वह कुछ नहीं बताई। 
*लगा पंचायती दरबार, खुला भेद*
गांव में ही रहने वाले महिला के पहले पति के स्वजन ने पंचायती दरबार बुलाया। यहां बच्ची के बारे में पूछने पर पत्थर के नीचे दबाकर आने की कहानी सामने आई। इसके बाद गांव के लोगों के साथ वे महिला को लेकर बच्चे को लेने रवाना हुए तो यहां गांव के चरवाहा, बच्ची को निकालकर रखे थे। महिला को डांट-फटकार लगाने के बाद इन्होंने बच्ची को उसके सुपुर्द किया और संजीवनी 108 एम्बुलेंस से धौरपुर अस्पताल भेजा। यहां से प्राथमिक जांच के बाद बच्ची के बेहतर उपचार के लिए मेडिकल काॅलेज संबद्ध जिला अस्पताल अंबिकापुर रिफर कर दिया गया था, यहां 15 अगस्त की शाम को बच्ची को जांच के बाद चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने नवजात के शव को पोस्टमार्टम के बाद स्वजन के सुपुर्द कर दिया है।

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