कलेक्टर कार्यालय के पोर्च की ओर जाने वाले मार्ग में बैठे मवेशियों को देखकर अफसर हड़बड़ाए

अंबिकापुर। शहर से लगभग 13 किलोमीटर के फासले पर स्थित ग्राम भकुरा के ग्रामीणों ने बुधवार ने कथित रूप से नगर पालिक निगम की ओर से छोड़े गए गौ वंश से बनी मुसीबत की स्थिति को बयां करने अनोखा प्रदर्शन किया। इन मवेशियों को पैदल हांकते वे सीधे कलेक्टोरेट कार्यालय के अंदर पहुंच गए, और कलेक्टर कार्यालय के पोर्च की ओर जाने वाले प्रवेश मार्ग पर ही बैठा दिया। अचानक कलेक्टोरेट परिसर के मुख्य द्वार पर मवेशियों का जमावड़ा देखकर अधिकारी-कर्मचारी भी हैरान-परेशान हो गए। हालांकि तत्समय कलेक्टर अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे। इन्हें चिंता इस बात की सता रही थी कि, कलेक्टर का आगमन पर उनकी वाहन पार्किंग पोर्च स्थल तक नहीं जा पाएगी। इसके बाद मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार ने चौकीदारों से मवेशियों को कलेक्टोरेट परिसर में ही खुले मैदान की ओर करने कहा।

ग्रामीणों का कहना है कि, पशुपालकों की मनमानी के कारण गांव ही नहीं शहर की सड़कों पर गौ वंश का आतंक बढ़ गया है। दूध दुहने के बाद मवेशियों को दिन-रात सड़कों और गांव-शहर की गलियों में छोड़ दिया जाता है। इससे रोजाना सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। कई बार दोपहिया वाहन चालक मवेशियों से टकराकर घायल हो चुके हैं। खेतों में भी मवेशी घुसकर फसल बर्बाद कर रहे हैं। कई बार शिकायत करने के बाद भी प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की, शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा मवेशियों के लिए उचित गौशाला, कांजी हाउस की व्यवस्था की जाए। लापरवाह पशुपालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो जो मवेशियों को सड़कों पर छोड़ देते हैं। नियमित अभियान चलाकर आवारा घूम रहे मवेशियों को पकड़ा जाए।

निगम मवेशियों को गांव में छोड़ रहा

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि नगर निगम पकड़े गए मवेशियों को कांजी हाउस में रखने के बजाए गांव में छोड़ दे रहा है, और इन मवेशियों के कारण खेतों में लहलहा रही उनकी फसल बर्बाद हो रही है। मवेशी मालिकों से गांव के लोग अनजान हैं। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाया और समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है। हालांकि ग्रामीणों को कलेक्टर के आने का इंतजार था। अब देखना होगा प्रशासन कब तक गौशाला बनाता है।

मौत और हादसों से दहशत में लोग

आवारा छोड़े जाने वाले गौवंशों के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं। कुछ दिन पहले ही एक महिला की सांड के हमले में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। गांधी चौक में ड्यूटी के दौरान पुलिस विभाग का एक ट्रैफिक जवान भी मवेशी की चपेट में आकर घायल हुआ था। वहीं गोधनपुर में हाल में गौवंश के कारण एक व्यवसायी गंभीर रूप से घायल हो गया, जिन्हें आसपास मौजूद लोगों ने डॉयल 112 की टीम के सहयोग से अस्पताल पहुंचवाया था, इन्हें सिर सहित शरीर के अन्य हिस्से में गंभीर चोटें आई थी।

रोजाना छोड़ दिए जाते हैं मवेशी

पालतू मवेशियों को उनके मालिक रोजाना आवारा की तरह गली-गली में छोड़ देते हैं। इससे न सिर्फ सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, बल्कि यहां रहने वालों को कई प्रकार की क्षति का सामना करना पड़ रहा है। गोबर के कारण लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। स्कूलों के सामने भी मवेशियों का विचरण किसी बड़ी घटना को दावत दे रहा है।

निगम के पास कोई कार्ययोजना नहीं

शहर में घूमते गौवंशों के कारण बढ़ती दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने नगर निगम के पास कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है। इन्हें पकड़कर गांव की ओर छोड़ देना विकल्प नहीं है। लोगों का कहना है कि बला टालने जैसी स्थिति बनाने से अच्छा गौठानों के तर्ज पर व्यवस्था सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

गौठान बंद करने से बिगड़े हालात

कलेक्टोरेट पहुंचे ग्रामीणों ने कहा कि, कांग्रेस सरकार के समय गांव-गांव तक गोठान संचालित हो रहे थे। गोबर और गौ मूत्र की खरीदी होने के कारण आवारा मवेशी कम ही घूमते नजर आते थे। भाजपा सरकार ने गोठान बंद कर दिया, इसके बाद से समस्या और बढ़ गई है। गौवंश मौत-हादसे का कारण बन रहे हैं। ऐसे में प्रशासन मवेशी मालिकों के प्रति कठोर जिम्मेदारी तय करे।

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