एसजीजीयू में 15 नए पाठ्यक्रम की शुरूआत, हिन्दू अध्ययन पहली बार, डिजिटल मूल्यांकन होगा लागू

अंबिकापुर। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा द्वारा विश्वविद्यालय शिक्षण विभाग (यूटीडी) में आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 15 नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। कुलपति डॉ. राजेन्द्र लाकपाले ने बताया कि इन पाठ्यक्रमों से सरगुजा संभाग में उच्च शिक्षा के नए अवसर मिलेंगे और विद्यार्थियों को कौशल विकास के साथ रोजगारपरक शिक्षा भी उपलब्ध होगी। हालांकि इन पाठ्यक्रमों में कुछ महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों को शामिल नहीं किया गया है। वहीं उधार, जुगाड़ के भवन की तलाश में भी विवि प्रशासन लगा है। भकुरा में निर्मित विश्वविद्यालय का भवन आज भी अपूर्ण है। जहां एक ओर प्रशासनिक और एकेडमिक भवन के लिए 14 करोड़ की जरूरत है, वहीं व्यवस्थित सड़क के लिए 26 करोड़ की दरकार है।

कुलपति ने कहा कि, विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पारंपरिक विषयों के साथ नवीन, बहुविषयक, कौशल आधारित और रोजगारपरक पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की पहल की गई है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बदलते शैक्षणिक एवं व्यवसायिक परिदृश्य के अनुरूप तैयार करना तथा उच्च शिक्षा में विषयों के व्यापक विकल्प देना है। विश्वविद्यालय का यह प्रयास पहुंच, समानता, गुणवत्ता, वहनीयता और जवाबदेही के मूल उद्देश्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि शासन के द्वारा चालू वित्तीय वर्ष में विश्वविद्यालय के लिए 25 नए विभागों की स्वीकृति दी थी, लेकिन स्थानाभाव के कारण 15 विभाग ही प्रारंभ किए जा रहे हैं। हर विभागों के लिए अतिथि प्राध्यापकों की भर्ती प्रारंभ की जाएगी। उन्होंने कहा कि नए पाठ्यक्रम शुरू होने से सरगुजांचल के विद्यार्थियों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा। कुछ विषयों में मान्यता संबंधी समस्याएं आड़े आने के कारण इन्हें अगले वर्ष तक शुरू करने की योजना है।

2008 के बाद सबसे बड़ा विस्तार

डॉ. लाकपाले ने बताया कि 2008 में विश्वविद्यालय स्थापना के समय केवल कंप्यूटर साइंस और फार्मेसी विभाग शुरू हुए थे। 2011 में एमएससी फार्म फॉरेस्ट्री, एमएससी बायोटेक्नोलॉजी और 2014 में एलएलएम, प्रयोजनमूलक हिन्दी, एमएससी इन्वायरमेंटल साइंस जोड़े गए। अब 12 साल बाद 15 नए विषय जोड़े जा रहे हैं।

भवन के अभाव में 10 पाठ्यक्रम टले

कुलपति ने बताया कि नेप के तहत 25 नए पाठ्यक्रमों की स्वीकृति मिली थी, लेकिन भवनों के अभाव के कारण अभी केवल 15 ही शुरू किए जा रहे हैं। शेष 10 के लिए केन्द्रीय संस्थानों से स्वीकृति लेना बाकी है। भवन की कमी दूर करने और कक्षाओं के संचालन के लिए नगर पालिक निगम से गौरव पथ में नगर निगम के भवन के पास स्थित सामुदायिक भवन की मांग की गई है।

इन 15 पाठ्यक्रमों की शुरूआत  

ग्रामीण प्रौद्योगिकी, वनस्पति विज्ञान, रसायन शास्त्र, प्राणी विज्ञान, भौतिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, ललित कला, अंग्रेजी, मानवशास्त्र एवं जनजातीय अध्ययन, वाणिज्य, भूगोल, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, इतिहास, अर्थशास्त्र और हिन्दू अध्ययन। इनमें हिन्दू अध्ययन छत्तीसगढ़ के किसी विश्वविद्यालय में पहली बार शुरू हो रहा है।

डिजिटल मूल्यांकन की प्रक्रिया

कुलपति ने बताया कि, विश्वविद्यालय परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, शीघ्रता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था प्रारंभ कर रहा है। इसके अंतर्गत उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा। कुलपति ने इसे पॉयलट प्रोजेक्ट बताया और कहा कि, इससे मूल्यांकन में समय बचेगा, निष्पक्षता बढ़ेगी और मानवीय त्रुटियां कम होंगी। कॉपी किस विश्वविद्यालय की है, किस छात्र की है, इसका किसी को पता नहीं चलेगा।

डिजिटल मूल्यांकन के प्रमुख लाभ

उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में पारदर्शिता एवं निष्पक्षता.

मूल्यांकन प्रक्रिया में समय की बचत.

परीक्षा परिणामों का शीघ्र प्रकाशन.

मूल्यांकन कार्य की बेहतर निगरानी.

मानवीय त्रुटियों में कमी.

डिजिटल रिकॉर्ड का सुरक्षित रखरखाव.

परीक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक एवं प्रभावी बनाना.

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