एससी-एसटी एक्ट की धारा जोड़ने, संपत्ति कुर्क करके बुलडोजर कार्रवाई की मांग

मांगें पूरी नहीं होने पर विश्व आदिवासी दिवस के दिन गृहमंत्री का पुतला दहन और उग्र प्रदर्शन करने की चेतावनी

अंबिकापुर। कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम भफौली की एक नाबालिक अनुसूचित जनजाति पीड़िता से दुष्कर्म के मामले में एससी-एसटी एक्ट की धारा नहीं जोड़ने और उपसरपंच के पति की गिरफ्तारी नहीं होने से छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज सरगुजा में भारी आक्रोश है। घटना को लेकर आदिवासी समाज की ओर से बुधवार, 5 अगस्त को पुलिस अधीक्षक के कार्यालय का घेराव करने की चेतावनी दी गई थी। इसे देखते हुए पूरा कलेक्ट्रेट परिसर पुलिस के पहरे में था। कलाकेंद्र मैदान में एकजुट समाज के लोग जैसे ही नारेबाजी करते कलेक्टोरेट की ओर बढ़े, मुख्य प्रवेश द्वार को बंद कर दिया गया। समाज के लोगों ने जमकर हल्ला बोला और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले में वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की। चेतावनी दी गई है कि, यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो 09 अगस्त, विश्व आदिवासी दिवस के दिन गृहमंत्री का पुतला दहन करके उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।

बता दें कि, बीते 20 जुलाई की रात को ग्राम भफौली की नाबालिक आदिवासी लड़की ने गांव के ही तरुण जायसवाल नामक व्यक्ति पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में कोतवाली थाना अंबिकापुर में बीएनएस की धारा 65(1) और पॉक्सो एक्ट की धारा 4, 6 के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है। आदिवासी समाज का आरोप है कि, पीड़िता का जाति प्रमाण पत्र जमा करने के बाद भी पुलिस ने अभी तक मामले में एससी-एसटी एक्ट की धारा नहीं जोड़ी है, और न ही आरोपी को गिरफ्तार किया है। इससे लग रहा है कि पुलिस आरोपी को बचाने और संरक्षण देने में लगी है। समाज ने मांग की है कि, मामले में एससी-एसटी एक्ट की धारा जोड़ी जाए, आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए। पीड़िता को सहायता राशि दी जाए। आरोपी की संपत्ति कुर्क करके बुलडोजर कार्रवाई की जाए और आरोपी को संरक्षण देने वालों के खिलाफ भी अपराध पंजीबद्ध किया जाए। ज्ञापन सौंपने के दौरान छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज सरगुजा के जिलाध्यक्ष डॉ. अमृत सिंह मरावी, कार्यकारिणी जिलाध्यक्ष अनुक प्रताप सिंह टेकाम, जिला महासचिव तरुण कुमार भगत सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल थे।

मामले में अन्य लोगों को अभयदान

समाज के लोगों के बीच मौजूद एक्टिविस्ट अकील अहमद ने आरोप लगाया कि, घटना के बाद पीड़ित परिवार पर समझौते के लिए दबाव बनाने, न्यायालय को गुमराह करने जैसी बातें सामने आई हैं, जिस पर संबंधितों के विरूद्ध न तो किसी प्रकार की कार्रवाई की गई और न ही अपराध दर्ज किया गया है। बालिका का मजिस्ट्रेट के समक्ष लिए गए बयान को भी सवालों के घेरे में लिया गया। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी के समक्ष कार्रवाई से संबंधित इन्फार्मेशन लीक करने की बात भी सामने लाई गई। ग्रामीणों ने आरोपी को कब्जे में लेने के बाद छोड़ने का भी आरोप लगाया।

एसएसपी ने की है ईनाम की घोषणा

एफआईआर दर्ज होने की भनक लगते ही आरोपी तरुण जायसवाल गांव से फरार हो गया, 15 दिन बीत गए आरोपित पुलिस की पकड़ से बाहर है। हालांकि बढ़ते दबाव को देखते हुए डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश अग्रवाल ने आरोपी की सटीक सूचना देने वाले के लिए 5,000 रुपये के नकद इनाम की घोषणा की है। वहीं आरोपित की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश देने में पुलिस टीम लगी है। आरोपित की गिरफ्तारी नहीं होने से क्षुब्ध ग्रामीणों ने पूर्व में कोतवाली थाने का घेराव करके विरोध प्रदर्शन किया था, अब एसपी कार्यालय का घेराव करके अपनी मांगों से अवगत कराया है।

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