पार्क बनाने के लिए हटाये गये सुलभ शौचालय के बाद नहीं हुआ निर्माण

अंबिकापुर। सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर के कलेक्टोरेट परिसर में शौचालय की कमी लोगों को खल रही है। इस परिसर में रोजाना हजारों लोगों का किसी न किसी काम से आते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से मांगों और समस्याओं को लेकर सरगुजा जिले के ग्रामीण पहुंचते हैं। कलेक्टर जनदर्शन में सैकड़ों लोगों का ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से आना होता है। परिसर में वृहद हाईटेक कंपोजिट बिल्डिंग का निर्माण लगभग 25 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया गया है। बहुमंजिला आधुनिक भवन में लगभग 50 शासकीय विभागों को एक ही छत के नीचे लाया गया है, लेकिन यहां के भी शौचालयों का बुरा हाल है। ऐसे में कलेक्टोरेट में शौचालय की कमी बड़ी समस्या के रूप में सामने है, जिससे लोगों को खुले में लघुशंका के लिए जगह तलाशना पड़ता है। दीर्घशंका के लिए तो जगह ढूंढते रह जैसी स्थिति बनती है और सुलभ शौचालय का पता पूछते लोग नजर आते हैं।
नगर निगम के द्वारा पुलिस अधीक्षक कार्यालय के पीछे एक शौचालय का निर्माण कराया गया था, जिसकी दुर्गति हो गई है। सुलभ शौचालय के नाम पर ढांचा खड़ा है, जिसकी उपयोगिता शून्य है। कलेक्टोरेट परिसर में स्थित पुराने सभाकक्ष से लगा एक शौचालय था, जिसे पार्क निर्माण के समय हटा दिया गया, लेकिन अतिरिक्त शौचालय की व्यवस्था नहीं की गई। अधिकारियों के चेंबर में तो अटैच शौचालय है लेकिन आम लोगों के लिए शौचालय की सुविधा की ओर किसी का ध्यान नहीं है। ऐसे में विशेषकर किसी काम से यहां आने वाली महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे हालातों के बीच लोगों का कहना है, कि कलेक्टोरेट परिसर की खूबसूरती के लिए पार्क बना, इससे कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक शौचालय का निर्माण किया जाना चाहिए।

खूबसूरती के लिए पार्क जरूरी, लेकिन शौचालय भी अनिवार्य

शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अम्बष्ट ने कहा कि, कलेक्टोरेट परिसर की खूबसूरती के लिए पार्क जरूरी है, लेकिन शौचालय भी अनिवार्य है। अधिकारी-कर्मचारियों के चेम्बर में तो शौचालय है, लेकिन आम जनता के लिए किसी प्रकार की सुविधा नहीं है। लघुशंका और दीर्घशंका को कोई रोक नहीं सकता है। खुले में शौच करने से प्रदूषण फैलना लाजिमी है। परिसर में चौतरफा कार्यालय हैं, यहां किसी न किसी काम से जिले भर से लोग आते हैं, इसे देखते हुए जिस प्रकार गार्डन का निर्माण किया गया, उसी प्रकार ऐसे स्थल पर कलेक्टोरेट परिसर में शौचालय का निर्माण कराया जाना चाहिए, जो सभी के लिए उपयोगी हो।

पे एंड यूज शौचालय की ही करा दें व्यवस्था

शहर में मास्क मैन के नाम से चर्चित अजय अग्रवाल ने कहा कि कलेक्टोरेट के इस वृहद परिसर में शौचालय की कमी वास्तव में खल रही है। यहां अवकाश के दिनों को छोड़कर रोजाना हजारों लोगों का आना-जाना होता है। अगर किसी को शौच जाना हो, पूरे कैंपस में कहीं भी शौचालय नजर नहीं आएगा। वर्तमान में जहां पार्क का निर्माण कराया गया है, वहां शौचालय जरूर था, लेकिन स्थल सही नहीं था। इसे हटाने के बाद आम लोगों के लिए उपयोगी शौचालय बनाने की ओर ध्यान देना था ताकि कलेक्टोरेट में आने वाले लोगों को इसका लाभ मिल सके। अगर नि:शुल्क शौचालय की व्यवस्था नहीं दी जा सकती है तो पे एंड यूज जैसे शौचालय की व्यवस्था जिला प्रशासन को कराना चाहिए, ताकि लोगों को भटकना न पड़े।

पानी निकासी की व्यवस्था नहीं, शौचालय बंद

कलेक्टोरेट परिसर में निर्मित कंपोजिट बिल्डिंग में हर तल में शौचालय का निर्माण किया गया है, लेकिन यह आम लोगों के लिए उपयोगी नहीं है। हर किसी का इस भवन में बिना किसी काम के आना संभव नहीं है। तहसील कार्यालय सहित कलेक्टोरेट के पुराने भवन में स्थित कार्यालयों में ही रोजाना सैकड़ों की संख्या में लोग किसी ने किसी काम से पहुंचते हैं। तहसील के काम से आई एक सभ्रांत महिला ने बताया वे कंपोजिट बिल्डिंग के महिला शौचालय में गई थीं, लेकिन पानी नहीं था, वहीं दुर्गंध की स्थिति को देखकर उल्टे पांव वापस लौट गईं। बिल्डिंग के प्रथम तल में स्थित एक पुरुष शौचालय में ताला बंद है। इसके पीछे कारण पानी निकासी की व्यवस्था का नहीं होना है। यहां एक नोटिस चस्पा है, जिसमें उल्लेख है कि ‘पानी निकासी न होने के कारण बाथरूम बंद किया गया है। जनसंपर्क कार्यालय के बाजू वाले बाथरूम का उपयोग किया जा सकता है।Ó

 

 

 

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