विधायक की अपील बेअसर, तहसील कार्यालय नाम के लिए खुले रहे, मारपीट के विरोध में आंदोलन जारी

अंबिकापुर। मैनपाट तहसील के उप तहसील राजापुर में पदस्थ नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ विधायक व समर्थकों के साथ की गई मारपीट के मामले में विधायक सीतापुर राम कुमार टोप्पो के द्वारा राजस्व अमले से काम पर लौटने की गई अपील बेअसर साबित हुई है। आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से आक्रोश बढ़ते जा रहा है, बात नार्को टेस्ट की उठने लगी है। सोमवार को तहसील कार्यालय तो खुला रहा लेकिन तहसीलदार और नायब तहसीलदार के उपस्थित नहीं रहने से कामकाज ठप रहा। कार्यालय में लिपिक उपस्थित थे, इनसे मिलकर पक्षकार लौटते रहे। इसके साथ ही 01 जून से राजस्व पटवारी संघ ने भी प्रदेशव्यापी कलमबंद, कामबंद आंदोलन शुरू किया है, जिससे राजस्व से संबंधित कामकाज पर असर पड़ा। पटवारी और आरआई कलाकेंद्र मैदान में तहसीलदार और नायब तहसीलदारों के साथ कलाकेंद्र मैदान में डटे रहे। छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा संघ की सरगुजा इकाई ने भी सरगुजा कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम पत्र प्रेषित किया है, और मामले में कठोर वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।
बता दें कि, उप तहसील राजापुर, तहसील मैनपाट, जिला सरगुजा में पदस्थ नायब तहसीलदार एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट तुषार मानिक के साथ शासकीय कर्तव्य निर्वहन दौरान घटित मारपीट, अभद्रता एवं शासकीय कार्य में बाधा की गंभीर घटना के मामले में 5 दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जिससे छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ में रोष है। प्रदेश स्तर तक घटना को लेकर आवाज बुलंद हो रही है, तहसीलदार, नायब तहसीलदार आन्दोलन की राह पर अग्रसर हैं। सोमवार को आन्दोलनरत राजस्व विभाग की रीढ़ के साथ मौजूद पीड़ित नायब तहसीलदार तुषार मानिक ने कहा कि, राजस्व विभाग का कोई भी अधिकारी-कर्मचारी नहीं चाहता है कि उनके कारण शासकीय कामकाज प्रभावित हो, लेकिन शासकीय कार्य के समय विधायक सीतापुर और उनके समर्थकों ने जिस प्रकार मारपीट की घटना को बिना सोचे-समझे अंजाम दिया, सार्वजनिक स्थल पर एसडीएम के मौजूदगी में जिस प्रकार मारपीट की गई, यह स्वीकार योग्य नहीं है।
विधायक की बहन के द्वारा जिन दस्तावेजों पर दस्तखत करने के लिए कहा जा रहा था, वह पेरोल से संबंधित था, जिसमें दस्तावेजी कमी थी। अपूर्ण दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के बाद किसी भी परिस्थिति में पूरी जिम्मेदारी उनकी स्वयं को होती। सच्चाई सामने आये, इसके लिए वे सबसे पहले अपना नार्को टेस्ट कराने के लिए तैयार हैं। साथ ही अपूर्ण दस्तावेज लेकर पहुंची विधायक की बहन और सामने आई एक अन्य शिकायतकर्ता महिला का भी नार्को टेस्ट होना चाहिए, जिससे सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा शासन निष्पक्ष कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाए और आरोपियों की गिरफ्तारी हो, जब तक यह मांग पूरी नहीं होती है, प्रदेशस्तर पर लिए जाने वाले निर्णय के तहत आन्दोलन का क्रम जारी रहेगा। उन्होंने कहा कुछ दिन पहले भी उदयपुर में पटवारी के साथ मारपीट की घटना हुई थी, ऐसी घटनाओं का शासन का अंग के द्वारा ही पुनरावृत्ति की जाए, यह स्वीकार योग्य नहीं है।

दिक्कत थी तो करा सकते थे मेरा स्थानांतरण
तुषार मानिक ने कहा कि वे सीतापुर क्षेत्र में करीब ढाई वर्ष से पदस्थ हैं, उप तहसील राजापुर में उनकी पदस्थापना एक माह पहले ही हुई है, और वे अपने कर्तव्यों का नियमानुसार निर्वहन कर रहे थे। अगर किसी प्रकार की दिक्कत थी, तो विधायक उनका स्थानांतरण करा सकते थे। किसी प्रकार का पूर्वाग्रह रखकर मारपीट जैसे हद तक पहुंचना उचित नहीं है। घटना के विरोध में छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ द्वारा 29 मई को प्रदेशव्यापी सामूहिक अवकाश लेकर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया, और शासन-प्रशासन से दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की गई थी। इसके बाद भी आज दिनांक तक आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित नहीं होने से प्रदेश के राजस्व अधिकारियों एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेटों में गहरा आक्रोश एवं असंतोष है।

प्रशासनिक कार्यप्रणाली की गरिमा पर पहुंचा आघात
राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ के प्रांताध्यक्ष ़भागवत कश्यप ने कहा है कि, यह घटना केवल एक अधिकारी के साथ हुई व्यक्तिगत घटना नहीं है, बल्कि संपूर्ण राजस्व प्रशासन, न्यायालयीन व्यवस्था एवं विधिसम्मत प्रशासनिक कार्यप्रणाली की गरिमा पर सीधा आघात है। राजस्व पटवारी संघ इस घटना की कड़ी निंदा करता है। संघ का मानना है कि यह न केवल एक शासकीय कर्मचारी की गरिमा पर प्रहार है अपितु प्रशासनिक व्यवस्था और कानून को खुला चुनौती देने जैसा कृत्य है। घटना से राजस्व कर्मचारियों में भय का माहौल है। छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ की समस्त जिला कार्यकारिणी द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार 01 जून से प्रदेश के समस्त तहसीलदार, नायब तहसीलदार एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट अनिश्चितकालीन कलमबंद, कामबंद एवं सामूहिक अवकाश पर हैं। संघ ने स्पष्ट किया है कि, यह निर्णय पूर्णत: शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यमों से लिया गया है। यह तब तक प्रभावशील रहेगा जब तक घटना में शामिल मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित नहीं हो जाती है। संघ ने शासन से राजस्व अधिकारियों एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेटों की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वतंत्र कार्यप्रणाली की रक्षा हेतु प्रभावी कदम उठाने की भी मांग की है।

छात्रावास अधीक्षक संघ ने दिया समर्थन
घटना के विरोध में प्रदेश के विभिन्न अधिकारी एवं कर्मचारी संगठनों द्वारा भी खुलकर समर्थन व्यक्त किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय छात्रावास अधीक्षक संघ ने भी दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग करते हुए कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ को समर्थन दिया गया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष उदेश सिंह तोमर व कोषाध्यक्ष आशीष साहू सहित अन्य पदाधिकारियों ने नायब तहसीलदार के साथ हुई मारपीट एवं दुर्व्यवहार की कड़ी निंदा की है। संघ का मत है कि किसी भी शासकीय अधिकारी-कर्मचारी के साथ इस प्रकार का व्यवहार लोकतांत्रिक एवं प्रशासनिक मर्यादाओं के विपरीत है। संघ ने प्रकरण में कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के साथ पूर्ण एकजुटता एवं समर्थन व्यक्त किया है और निष्पक्ष एवं त्वरित जांच की मांग की है। संघ ने निर्णय लिया है कि घटना के विरोध में 3 जून को प्रदेश के समस्त छात्रावास अधीक्षक काली पट्टी धारण करके कार्य करेंगे, जिससे शांतिपूर्ण एवं प्रतीकात्मक रूप से घटना के प्रति विरोध एवं असहमति दर्ज कराई जा सके। संघ ने शासन से भविष्य में शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की गरिमा, सुरक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित करने की भी मांग की है।

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