अंबिकापुर। सूरजपुर जिला के पहाड़गांव पण्डोनगर में जलग्रहण परियोजना की शुरुवात होने से गांव में बहुत बड़ा वदलाव आ रहा है। जलग्रहण परियोजना से यहां के मजदूर कृषकों को रोजगार एवं लाभ मिल रहा है, जिससे वे अपने ही गांव में काम कर रहे हैं। यहां नाबार्ड जलग्रहण परियोजना के द्वारा विभिन्न कार्यों में मेड़बंदी, डबरी निर्माण, एलवीएस, ईजीपी, एसपी, स्टोन आउटलेट, कन्दूखंडिंग एवं चेकडेम निर्माण जैसे अनेक कार्य का सृजन हुआ है। नावार्ड जलग्रहण परियोजना के अंतर्गत न केवल रोजगार बल्कि जीविकोपार्जन का साधन भी वितरण किया जाता है, जिससे यहां के जिन ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, वे स्वरोजगार शुरू करके अपनी आर्थिक स्थिति में बदलाव ला सकें। ऐसे ही एक विशेष पिछड़ी जनजाति पण्डो ग्रामीण के जीवन की दिशा बदल दी एमएसएसव्हीपी नाबार्ड जलग्रहण परियोजना ने।

सूरजपुर जिला के ग्राम पण्डोनगर निवासी भोजराम पण्डो पिता स्व. बानराम पण्डो 42 वर्ष की पत्नि एक गृहणी हंै, इनका 3 बेटियों एवं एक बेटा सहित भरा पूरा परिवार है। कमाऊ सदस्य में एकमात्र भोजराम पण्डो हैं। भूमिहीन होने के कारण खेती-किसानी जैसा कोई माध्यम भी इसके पास नहीं था। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने एवं परिवार का सारा भार भोजराज के कंधे पर ही था। खरीफ के मौसम में दूसरों के खेतों पर काम करने पर गांव में मजदूरी मिल जाती थी, शेष मौसम में वे काम के तलाश में गांव से बाहर चले जाते थे। परिवार की मृलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था और बच्चों के शिक्षा की चिंता होनेे लगती थी। परिवार को एक बेहतर जीवन देने की चिंता से भोजराज को मुक्त कराया पहाड़गांव, पण्डोनगर में कार्यरत एमएसएसव्हीपी के तकनीकी सहायक एवं नाबार्ड जलग्रहण समिति ने। भोजराज पण्डो का चयन जीविकोपार्जन का साधन उपलब्ध कराने के लिए किया गया, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके। समिति के सदस्यों ने इसके लिए सहमति दी और नाबार्ड जलग्रहण परियोजना के तहत भोजराज पण्डो को धान चक्की मशीन प्रदान किया, जिससे उनके जीवन की दिशा ही बदल गई। भोजराज पण्डो अब अपने परिवार को बेहतर जीवन दे पा रहे हैं, जो कभी वे सोचा करते थे।

धान चक्की मशीन मिलने से आर्थिक स्थिति में हुआ सुधार

ग्राम पण्डोनगर में धान चक्की मशीन गांव में नहीं होने के कारण यहां के लोगों को बाहर से धान कुटाई करवाना पड़ता था। अब गांव के लोग भोजराज पण्डो के घर जाकर धान कुटाई कराते हैं, जिससे उसे घर में ही रोजगार का साथन मिल गया और कमाई भी होने लगी, इससे भोजराज पण्डो की आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हुई है। धान चक्की मशीन से मिले पैसों से वे अपने बच्चों को शिक्षा देने में सक्षम हुए एवं खुद भी पेंटिंग का कोर्स कर लिए, जिससे उन्हें पेंटिंग का काम भी कभी-कभी मिल जाता है, जो इनके लिए आय का एक और जरिया बन गया। जब वे पेंटिंग कार्य करने बाहर जाते तब घर के सदस्य थान कुटाई मशीन को चलाते हैं, जिससे इनका काम हमेशा जारी रहता है, और इनकी आर्थिक स्थिति और बेहतर हो रही है। भोजराज पण्डो व उनके परिवार ने एमएसएसव्हीपी, नाबार्ड जलग्रहण परियोजना का इसके लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है, जिनके कारण उनके परिवार के जीवन स्तर में आर्थिक परिवर्तन आया है।

Categorized in: