प्रबंधन के नाक के नीचे प्रवेश द्वार से लेकर गैलरी तक रखी हैं दवाइयां

अंबिकापुर। शहर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दवाइयों को सुरक्षित और प्रभावी ढंग से रखने के मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही है, जबकि दवाइयों को रखने के लिए निर्धारित नियम रोगी की सुरक्षा को सुनिश्चित करता है। इसके बाद भी अस्पताल प्रबंधन दवाइयों के रख-रखाव की दिशा में बेपरवाह है। दवाओं को खुले स्थल या आम लोगों के पहुंच में रखना चिकित्सा सुरक्षा के मानकों की अवहेलना है। इसके बाद भी अस्पताल के प्रवेश द्वार से लेकर गैलरी तक दवाओं की पेटियों से अटा हुआ है। दवाओं को रखने के लिए लाखों रुपये व्यय करके गोदामनुमा भवन अस्पताल के गेट के पास तैयार किया गया है, इसके बाद भी दवाएं असुरक्षित तरीके से रखना समझ से परे है। ऐसे में दवाओं को चूहों के द्वारा कुतरकर बर्बाद करने का नजारा आए दिन देखने को मिलता है।
सरगुजा संभाग के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रोजाना सैकड़ों की संख्या में मरीजों का आना-जाना होता है। इन्हें अस्पताल से दवाओं की नि:शुल्क उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए ड्रग वेयर हाउस से सप्लाई की जानेवाली सरकारी दवाइयों को सुरक्षित रखने की दिशा में आज तक बेहतर पहल नहीं हो पाई है। पु_े के पेटियों में पैक होकर आने वाली दवाओं को अस्पताल के गेट से लेकर गैलरी तक भर दिया गया है, जबकि इस रास्ते से मरीजों का आना-जाना लगे रहता है। दवाओं के संधारण में बरती जाने वाली लापरवाही से मरीजों के लिए चिकित्सक के सलाह अनुसार वितरण करने के लिए आने वाली दवाओं तक जहां एक ओर आम आदमी की आसान पहुंच हो रही है, वहीं चूहों के द्वारा दवाओं को कुतरने से संक्रमण बढ़ने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है। लम्बे समय से दवाइयों के सुरक्षा की दिशा में अस्पताल प्रबंधन की ओर से पहल नहीं किया जाना चिंतनीय है। कई बार मरीज और उनके साथ आने वाले बच्चे दवा के पेटियों को फाड़ देते हैं। असामाजिक तत्वों के द्वारा भी इन दवाओं का दुरूपयोग किया जा सकता है।

आम आदमी के पहुंच तक दवा की पेटियां

दवाओं को रखने के नियम पर गौर करें तो ग्लूकॉज ड्रिप व बोतलों को निर्धारित तापमान में रखना चाहिए। दवाओं की दीवार से दूरी बनी रहनी चाहिए। स्टोर में अगर दवाएं रखी गई हैं, तो एक के ऊपर एक रखे जाने वाली दवा पेटियों की संख्या अधिक नहीं होनी चाहिए। दवाओं तक आम आदमी की पहुंच न हो, इसका ध्यान रखना चाहिए। दवाओं को जमीन की सतह से ऊपर रखना चाहिए। दवा के कार्टूनों में दूरी होनी चाहिए, लेकिन सारे मापदंडों की यहां अनदेखी हो रही है। दवाओं को खुले में जिस गैलरी तक जमा करके रखा गया है, उससे कुछ फासले पर शौचालय भी है। ऐसे में दवाओं के भंडारण के लिए अपर्याप्त जगह बड़ी समस्या के रूप में उभरकर सामने आ रही है।

ग्राउंड फ्लोर में कर्मचारी कर रहे वाहन पार्क
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या व भर्ती क्षमता में वृद्धि हुई है, लेकिन दवाओं की खपत अनुरूप भंडारण क्षमता का पूरी तरह से विकास नहीं हो पाया है। अस्पताल भवन में दवाओं को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया ढांचा भी किसी काम का साबित नहीं हो रहा है। अस्पताल के गेट से लगे नए भवन के प्रथम तल में दवाओं को स्टोर जरूर किया जा रहा है, लेकिन यह जगह अपर्याप्त है, जिस कारण दवा की पेटियां असुरक्षित छोड़ दी गई हैं। नए भंडारण इकाई में उपलब्ध स्थान का समुचित उपयोग नहीं किया जा रहा है। दवा भंडारण के लिए बनाए गए भवन के ग्राउंड फ्लोर को दवाओं के संधारण उपयुक्त नहीं बनाने से अस्पताल के कर्मचारी यहां अपनी वाहनों की पार्किंग कर रहे हैं।

प्रवेश द्वारा होने से मरीजों को हो रही दिक्कत
अस्पताल में जिस स्थान पर खुले में दवाओं का भंडारण करके रखा गया है, वहां स्थित प्रवेश द्वार से हमर लैब, ब्लड बैंक के अलावा एक्स-रे, सोनोग्राफी कक्ष की ओर मरीजों व उनके संबंधियों का आना-जाना लगे रहता है, जिन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गैलरी और मुख्य प्रवेश द्वार में दोनों तरफ दवाओं की पेटियां रखे रहने से अगर किसी मरीज को स्ट्रेचर में ले जाना असंभव रहता है। इसके पीछे कारण अस्पताल के स्टाफ, दवाओं को मांग अनुरूप दवा पेटियों से निकालकर लेते हैं, और उसे संबंधित वार्डों तक पहुंचाते हैं।

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