न्यायालय भवन निर्माण के लिए कॉलोनी को खाली कराने अधिवक्ता थे लामबंद

अंबिकापुर। न्यायालय भवन को वर्तमान स्थल पर ही निर्मित करने की मांग को लेकर 6 नवम्बर से प्रारंभ जिला अधिवक्ता संघ, सरगुजा का अनिश्चितकालीन कलमबंद आंदोलन बुधवार, 12 नवम्बर को समाप्त होने के बाद गुलाब कॉलोनी में स्थित शासकीय आवासों को जमींदोज करने की प्रक्रिया गुरूवार को शुरू कर दी गई है। पहले दिन तीन खाली मकानों को जेसीबी लगाकर राजस्व अमले की मौजूदगी में तोड़ना शुरू किया गया। इन मकानों में रहने वाले लोग किराए का मकान तलाशते नजर आए, कुछ कर्मचारी अपना सामान मालवाहकों में लोड करवाकर ले जा रहे थे। कॉलोनी से लगे निजी मकान और दुकान के स्वामियों को भी नोटिस जारी किया गया है, जो नजुल भूमि पर काबिज हैं। इनमें से 6-7 लोगों ने उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया है।

बता दें कि गुलाब कॉलोनी में कुल 13 शासकीय मकान हैं, इनमें से तीन मकान आज की स्थिति में पूरी तरह से खाली हैं। जिला न्यायालय भवन निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने की दृष्टि से पहले इन्हीं मकानों को जमींदोज करने की शुरूआत हुई है। कुछ मकानों में रहने वाले लोग अपना सामान किराए के मकानों में शिफ्ट कर रहे हैं, लेकिन ये मकान पूरी तरह से खाली नहीं हुए हैं। सभी को जल्द से जल्द मकान खाली करने के लिए कहा गया है, ताकि इन्हें तोड़ने की प्रक्रिया पूरी हो। एक कर्मचारी के द्वारा उच्च न्यायालय से स्टे मिलने की बात कही जा रही है, हालांकि स्टे संबंधी कागजात संबंधित कर्मचारी के पास है या नहीं, इसे लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। इधर लोक परिसर बेदखली अधिनियम के प्राधिकृत अधिकारी की ओर से 4 नवम्बर को जारी किए गए आदेश में स्पष्ट किया है कि इस आदेश की तामिली तारीख से 15 दिवस के भीतर गांधी चौक अंबिकापुर के पास गुलाब कॉलोनी में अवस्थित शासकीय आवास क्रमांक एच-8 को रिक्त कर दें। इस आदेश का विर्निदिष्ट कालावधि के भीतर अनुपालन करने से इंकार या रिक्त नहीं करने की दशा में अनावेदक को उक्त परिसर से बलपूर्वक बेदखल किया जाएगा। मकानों को खाली करने के लिए नोटिस के माध्यम से डेड लाइन एसडीएम की ओर से जारी किया गया है, इसलिए राजस्व अमले का ध्यान पहले पूरी तरह से खाली मकानों और खाली किए जा रहे मकानों की ओर है।
पुरानी स्मृतियों के बीच खोज रहे किराए का मकान
गुलाब कॉलोनी के शासकीय मकानों में रहने वाले कर्मचारी परिवारों का कहना है कि वर्षों से वे यहां रह रहे हैं। दीपावली के समय ही पूरी कॉलोनी के घरों का रंग-रोगन और सुधार कार्य उन्होंने करवाया था। इसके बाद मकान खाली करना पड़ेगा, इससे वे बेखबर थे। वे इसके लिए दिया गया समय भी पर्याप्त नहीं मान रहे हैं। इनका कहना है कि अपना काम, बच्चों को स्कूल भेजना छोड़कर किराए का मकान खोजना मजबूरी बन गई है। यहां रहने वाले कई परिवार ऐसे हैं, जिनका विवाह, बच्चों का जन्म सहित अन्य संस्कार इसी आवास में हुआ है। टूटते मकानों को देखकर इनके बच्चे रोते हुए पूछ रहे हैं, अब वे कहां जाएंगे। लम्बे समय तक इन मकानों में रहने और समय-समय पर किए गए पौधारोपण की स्मृतियां उन्हें कचोट रही है।
1983 में किया गया था इन मकानों का आबंटन
राजस्व अमले का कहना है कि गुलाब कॉलोनी शासकीय रिकार्ड में देवीगंज रोड से लगा हुआ है, जिसका निर्माण और आबंटन वर्ष 1982-83 में हुआ है। इसके बाद कई शासकीय कर्मचारियों को इन आवासों का लाभ मिला, जिसमें न्यायिक सहित अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल रहे। गुलाब कॉलोनी से लगे नजुल भूमि पर कई लोगों ने अतिक्रमण करके मकान भी बना लिया है। मौके की स्थिति को देखें तो गुलॉब कॉलोनी के अंतिम मकान से लगी पुरानी बाउंड्री देखने को मिल जाएगी। इस बाउंड्री से लगा एक खपरैल मकान है, जिसके स्वामी ने अपने मकान का दरवाजा भी कॉलोनी की ओर निकाला है। और भी कई छोटे-बड़े मकान यहां बने हैं, जिसमें परिवार के साथ लोगों का रहना होता है। इनमें से आधा दर्जन से अधिक लोगों के द्वारा हाईकोर्ट से स्टे प्राप्त करना राजस्व अमला बता रहा है। इसका निराकरण नहीं होने तक संबंधित मकानों को तोड़ना आसान नहीं होगा।
मुख्य न्यायाधीश से अधिवक्ताओं ने की थी मुलाकात
मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर से 11 नवम्बर को जिला अधिवक्ता संघ एवं संघर्ष समिति सरगुजा, अंबिकापुर का एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल मुलाकात किया था, और न्यायालय भवन निर्माण के लिए शहर से दूर ग्राम चठिरमा में कलेक्टर सरगुजा द्वारा भूमि आबंटित करने की जानकारी देकर, न्यायालय के स्थानांतरण से होने वाली असुविधा संबंधित तथ्यात्मक स्थिति से अवगत कराया था। अधिवक्ताओं की बात को सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश ने कलेक्टर सरगुजा से दूरभाष पर चर्चा करके गुलाब कॉलोनी को 15 दिन के अंदर खाली कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद राजस्व अमला बिना देरी किए हरकत में आया, और शासकीय मकानों को तोड़ने में भिड़ गया, जो चर्चा का विषय बना हुआ है।

प्रस्तावित न्यायालय भवन निर्माण 0.93 एकड़ भूमि में संभव नहीं

कार्यालय कार्यपालन अभियंता, लोक निर्माण विभाग (भ/स) संभाग अंबिकापुर ने 01 अप्रैल 2025 को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अंबिकापुर को जिला न्यायालय भवन के पुर्ननिर्माण के संबंध में संदर्भित आदेश व पत्रों का हवाला देते हुए अवगत कराया है कि जिला न्यायालय भवन के पुर्ननिर्माण कार्य हेतु 4602.52 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। वहीं कलेक्टर सरगुजा द्वारा आबंटित भूमि 0.93 एकड़ में प्रस्तावित नवीन न्यायालय भवन का निर्माण, वर्तमान में संचालित हो रहे न्यायालय की संख्या, न्यायालय कक्ष एवं न्यायालय के अन्य महत्वपूर्ण अनुभाग को सम्मिलित करते हुए कराना संभव है या नहीं, के संबंध में प्रतिवेदन चाहा गया है। बताया गया है कि न्यायालय भवन के निर्माण हेतु कुल 3.522 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जिसमें वर्तमान में संचालित कोर्ट भवन, गुलाब कॉलोनी एवं अतिक्रमण भूमि शामिल है। वर्तमान में गुलाब कॉलोनी 0.84 एकड़ में निर्मित है। उक्त कॉलोनी का संपूर्ण भूमि प्राप्त होने पर 76.0 मीटर चौड़ाई व 45.0 मीटर गहराई प्राप्त होगी, परन्तु न्यायालय भवन का निर्माण प्रारंभ करने के लिए भवन हेतु कम से कम 80.0 मीटर चौड़ाई व भवन के दोनों तरफ 6-6 मीटर मिलाकर कुल 92.0 मीटर चौड़ाई एवं 45 मीटर गहराई की आवश्यकता होगी। ऐसे में आबंटित 0.93 एकड़ भूमि में प्रस्तावित न्यायालय भवन निर्माण संभव नहीं है।

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