पूर्व विधायक ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक पर गंभीर आपराधिक प्रकरण में रामानुजगंज में छिपने का लगाया था आरोप

अंबिकापुर। कांग्रेस से निष्कासित व पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह तथा सरगुजा जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक में सोशल मीडिया पर वार-पलटवार जारी है। बृहस्पति सिंह द्वारा कांग्रेस नेत्री जरीता लैतफलांग पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष चुनाव में 5-7 लाख रुपये मांगने तथा विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट के बदले कुमारी शैलजा पर रुपये वसूलने के आरोप लगाए थे। वहीं उन्होंने बालकृष्ण पाठक पर गंभीर आपराधिक प्रकरण में रामानुजगंज में छिपने का आरोप लगाया। बालकृष्ण पाठक ने उनकी बातों को झूठा बताया है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि कांग्रेस में रहे तत्कालीन लुण्ड्रा विधायक व बृहस्पति सिंह हर माह सूर्यकांत तिवारी से 5-5 लाख रुपये लेते थे। सूर्यकांत की डायरी में इन दोनों का नाम है।

दरअसल बृहस्पति सिंह ने सोशल मीडिया में टीएस सिंहदेव की सोच को सरगुजा संभाग की राजनीति तक ही सीमित होना बताया था। इसके बाद उन्होंने जरीता लैतफलांग व कुमारी शैलजा पर रुपये मांगने व लेने के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने बृहस्पति सिंह के खिलाफ कोतवाली में एफआईआर दर्ज करने आवेदन दिया था। इसी बीच बृहस्पति सिंह ने सरगुजा जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक पर टिप्पणी कर दी। इस पर बालकृष्ण पाठक ने कहा कि बृहस्पति सिंह कह रहे हैं कि मैं गंभीर आपराधिक प्रकरण से बचने के लिए रामानुजगंज में छिपा था। उन्होंने कहा कि वे एक साल तक हायर सेकेंडरी की पढ़ाई करने वहां गए थे, क्योंकि वे अंबिकापुर में फेल हो गए थे। उनके बड़े भाई वहां प्रधानपाठक थे। मेरे बड़े भाई ने बृहस्पति सिंह को भी पढ़ाया था, लेकिन काफी मार खाने के बाद भी बृहस्पति 5वीं पास नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि वहां मैंने स्पोर्ट्स गतिविधि को आगे बढ़ाया। क्रिकेट खेला, मैदान में पिच बनवाया। यदि मैं आपराधिक प्रकरण में छिपा होता तो तत्कालीन एसडीएम आरबी सिंह के बंगले में पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों की उपस्थिति में बैडमिंटन कोर्ट कैसे बनवाता। मैं इनके साथ व उनके परिवार के साथ बैडमिंटन खेलता था। यह कैसा आपराधिक प्रकरण था कि मैं सबकी नजरों के सामने वहां छिपा था। उन्होंने रामानुजगंज के सभी जगहों के बारे में भी बताया।
बृहस्पति कर रहे अनर्गल बातें
कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने कहा कि बृहस्पति सिंह अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं। वह मेरे बड़े भाई के बेटे के साथ पढ़ा था।  पिताजी उन्हें जानते हैं। उस समय वह बच्चे टाइप का था, मेरे सामने आने की भी उसकी हिम्मत नहीं होती थी। उसका झूठा व अनाप-शनाप बयान देने की आदत है। उन्होंने स्वीकार किया कि मेरे ऊपर जनता पार्टी के शासन में कई राजनीतिक प्रकरण दर्ज हुए थे। इंदिरा गांधी से इस बात को मैंने बताया था, उन्होंने संजय गांधी से मिलवाया। संजय गांधी ने अर्जुन सिंह से कहकर मेरे ऊपर लगे मनगढ़ंत सभी आरोप को राजनीतिक प्रकरण मानते हुए हटवाया था। मेरे ऊपर जिलाबदर जैसे प्रकरण थे।
रिमोट कंट्रोल से चल रहे बृहस्पति
बालकृष्ण पाठक ने कहा कि मैं गंभीर आपराधिक प्रकरण में बृहस्पति की शरण में छिपा था, इससे ज्यादा आश्चर्यजनक व हास्यास्पद बयान हो ही नहीं सकता। उन्हें इस तरह का बयान देने से बचना चाहिए, इससे उन्हीं की छवि खराब होती है। बृहस्पति सिंह के पास इतना दिमाग ही नहीं है, वे रिमोट कंट्रोल से संचालित हो रहे हैं। अभी उन्हें 5 लाख, 7 लाख सूझ रहा है। जेल में बंद सूर्यकांत तिवारी की डायरी में लिखा हुआ है कि बृहस्पति सिंह हर माह उनसे 5-5 लाख रुपये लिया करते थे। उक्त डायरी आज भी ईडी ने जब्त कर रखा है।

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