260 से अधिक दुकानदार, 170 व्यापारियों के नाम की निकली लॉटरी
अंबिकापुर। शासकीय पीजी कॉलेज मैदान में फुटकर पटाखा दुकान आबंटन प्रक्रिया एक साथ कराने का आग्रह सरगुजा कलेक्टर के जनदर्शन में व्यापारियों ने किया है। बताया गया है कि कुछ व्यापारियों के द्वारा 170 लोगों का नाम और लिस्ट नगर पालिक निगम में देकर दुकानों के आबंटन की प्रक्रिया पूरी करा ली गई है, जबकि पटाखा दुकानों के लिए 260 से अधिक दुकानों का आबंटन होना है।
बता दें कि दीपावली के मौके पर फुटकर पटाखा विक्रय के लिए राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मैदान में अस्थायी दुकानों का संचालन हर वर्ष नियमानुसार किया जाता है। पटाखा व्यापारियों के द्वारा इस वर्ष भी टेंट हाउस के संचालक को विभिन्न साइजों के पटाखा दुकान, पंडाल बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। टेंट लगाने का काम शुरू हो गया है। आरोप है कि इस बीच कुछ व्यापारियों के द्वारा आधा-अधूरा सूची नगर पालिक निगम के समक्ष मनचाहा दुकान पाने की लालसा में दे दिया गया और दुकान के आबंटन की प्रक्रिया पूर्ण करा ली गई। 260 की जगह 170 व्यापारियों का लिस्ट दिए जाने की जानकारी मिलने के बाद शेष 90 दुकानदारों के लिए संशय की स्थिति बन गई है। ऐसे में वे सोमवार को सरगुजा कलेक्टर के जनदर्शन में आवेदन देकर अवगत कराया है कि नगर पालिक निगम एवं कॉलेज प्रशासन की भूमि के लिए तय राशि कब ली गई, किस आधार पर 170 व्यापारियों के लिए पटाखा दुकान के आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई, इससे कई व्यापारी अनभिज्ञ हैं। इधर 260 दुकानदारों ने टेंट पंडाल लगाने के लिए निर्धारित की गई राशि जमा कर दी है। मांग की गई है कि हर वर्ष की भांति शासन के निर्देशानुसार टेंट पंडाल लगाने का कार्य संपन्न होने को बाद ही सभी व्यापारियों का एक साथ दुकान आवंटन करने की कार्रवाई की जाए।
लॉटरी निकालने के पहले ग्रुप को किया लॉक
पटाखा संघ के ग्रुप को लॉक करके, नेतागिरी का धौंस दिखाकर, बिना व्यापारियों को विश्वास में लॉटरी निकालने का आरोप भी व्यवसायी लगा रहे हैं। इनका कहना है कि कुल 264 दुकानों में 75: दुकानें 16 फिट की एवं 25: दुकानें 10 फिट की हैं। 10 फिट की दुकानों का लॉटरी नहीं कराया गया है। जबकि टेंट, निगम और कॉलेज को दी जाने वाली रकम सभी व्यापारियों से बराबर ली गई है। असंतुष्ट पटाखा व्यवसायियों ने विधिवत सभी दुकानों का लॉटरी प्रशासनिक अधिकारियों के मौजूदगी में एक साथ कराने की मांग की है।

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