कांग्रेस का जांच दल विशेषज्ञों से चर्चा करने के बाद पत्रकारों से हुआ रूबरू
अंबिकापुर। सरगुजा जिले का प्रसिद्ध भगवान श्री राम की तपोस्थली रामगढ़ इन दिनों ब्लास्टिंग और नए कोल खदान की कवायद के बीच चट्टानों में आती दरारों को लेकर सुर्खियों में है। भाजपा और कांग्रेस दोनों का ही जांच दल धार्मिक आस्थाओं से जुड़े इस स्थल का भ्रमण कर चुका है। भाजपा जहां एक ओर रामगढ़ के पुरातात्विक स्थल में किसी प्रकार का खतरा नहीं होने का संकेत देने में लगा है, वहीं कांग्रेस रामगढ़ की पहाड़ी तक कंपन, पत्थर गिरने और दरार आने जैसी घटनाओं को सामने लाकर यह बताने का प्रयास कर रहा है कि रामगढ़ में पुरातात्विक धरोहर खतरे में हैं, अगर समय रहते कोयले के लिए पौधों की कटाई और नए खदान को खोलने की कवायद को नहीं रोका गया, तो आने वाले समय में इस स्थल के अस्तित्व को बचा पाना मुश्किल होगा। इसे लेकर कांग्रेस के दल ने मंगलवार को रामगढ़ क्षेत्र का भ्रमण किया, और यहां के बैगा सहित विशेषज्ञों से मुलाकात करके वास्तविकता से रूबरू हुए। कांग्रेस का दावा है कि सिर्फ बैगा ही नहीं, बल्कि समाज के जागरूक लोग पेड़ों की कटाई को अविलम्ब रोकने की मांग कर रहे हैं। इनका कहना है कि रामगढ़ पर्वत संपूर्ण सरगुजा क्षेत्र के लिए धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केन्द्र है। इस क्षेत्र में संचालित परसा ईस्ट केते बासेन कोल माइंस में हो रहे ब्लास्टिंग के कारण पहाड़ पर दरारें पड़ रही हैं। इधर वन विभाग ने वास्तविक तथ्यों को छिपाते हुए पर्वत के करीब एक और कोल माइंस खोलने का रास्ता साफ कर दिया गया है। माइंस जिसे केंते एक्सटेंसन माइंस या 12 नंबर खदान कहा जाता है, के खुलने से रामगढ़ पर्वत के अस्तित्व पर गंभीर संकट खड़ा होगा।
राजीव भवन में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने कहा कि जांच दल ने मौके पर जाकर पर्वत में पड रही दरारों का अवलोकन किया। रामगढ़ पर्वत पर स्थित प्राचीन राममंदिर के बैगा सहित स्थानीय लोगों से बातचीत की। रामगढ़ पर्वत के साथ ही क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र के जानकार विशेषज्ञों से चर्चा की। इससे यह जानकारी निकलकर सामने आई कि पर्वत की चोटी पर जाने वाले सीढ़ी मार्ग के रास्तों में खडी चट्टानों में व्यापक रुप से दरार उत्पन्न हो गई है। मौजूदा परसा केते ईस्ट बासेन खदान जिसका विस्तार वर्तमान में इस पर्वत से विपरीत दिशा में किया जा रहा है, यहां कोल उत्खनन के दौरान होने वाले ब्लॉस्टिंग से पूरा पर्वत कांपने लगता है। मंदिर के बैगा चंदन सिंह ने बतलाया कि दोपहर में होने वाले ब्लॉस्टिंग के दौरान पर्वत में इतना अधिक कंपन होता है कि पर्वत पर मौजूद लोग भयक्रांत हो जाते हैं। खदान खुलने के बाद से ही पर्वत में दरारें पड़नी प्रारंभ हो गई हैं। पर्वत पर चढ़ने वाली सीढ़ी में लाल माटी और सिंहद्वार के पास चट्टानों में दरारें विशेष रुप से चौड़ी होती जा रही हैं। इस स्थान पर भविष्य में लैंडस्लाइट की संभावना है, जिससे पर्वत के ऊपर पवित्र राम मंदिर तक जाने का मार्ग पूरी तरह से बंद हो जाएगा। जांच दल ने पर्वत के शिखर के चारों ओर की चट्टानों में दरार को पाया है। जांच दल ने यह भी पाया है कि रामगढ़ पर्वत जिस स्थान से प्रारंभ हो रहा है, उससे प्रस्तावित केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक, 12 नंबर खदान 8.6 किमी की दूरी पर है। उन्होंने कहा कि रामगढ़ पर्वत पर दृष्टिगोचर हो रहे खतरे के बावजूद भाजपा के जांच दल के द्वारा खदानों को क्लीनचिट देने के कारण इस जांच की आवश्यकता पड़ी है। उन्होंने कहा कि पर्वत पर स्थित प्राचीन राम मंदिर हम सभी की आस्था का प्रतीक है। रामगढ़ पर्वत जाकर स्थितियों को देखने के बाद मैं आशंकित हूं कि जब न खदान के ब्लॉस्ट में मंदिर जाने का मार्ग क्षतिग्रस्त हो जाए और मंदिर पहुंचना नामुमकिन हो जाए। उन्होंने अपील की है कि राजनीति को छोड़ते हुए सभी राजनीतिक दल, सामाजिक और नागरिक संगठन रामगढ़ पर्वत को बचाने के लिए आगे आएंं और खदान नंबर 12 को खुलने से रोकें, अन्यथा रामगढ़ पर्वत जो पुराने खदान की वजह से अभी तक क्षतिग्रस्त ही हुआ है, नया खदान खुलने पर पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा।
भाजपा जांच दल के सदस्य भ्रम फैला रहे
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने कहा कि जांच दल के सदस्य अखिलेश सोनी ने यह हवाला दिया कि कांग्रेस शासनकाल में ही नई खदान के लिए वर्ष 2020 में कलेक्टर सरगुजा के द्वारा अनापत्ति जारी किया गया, जो सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि ऐसा कहकर भ्रम फैलाने का काम किया जा रहा है। कलेक्टर सरगुजा के द्वारा खदान के पक्ष में कोई भी अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया। जो पत्र जारी किया गया वो खदान नंबर 12 से सीताबेंगरा गुफा की दूरी के विषय में था, न कि खदान के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र था। उन्होंने कहा कि अखिलेश सोनी ने अपने बयान में यह नहीं बताया कि पेड़ कटाई के विरुद्ध पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के खड़े हो जाने के बाद इस क्षेत्र में पेड़ तो दूर एक डंगाल तक नहीं कटी। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि कांग्रेस के शासनकाल में विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर इस क्षेत्र में खदान आबंटन को रद्द करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा गया। इस प्रस्ताव पर तत्यमय के विधायक शिवरतन शर्मा के भी हस्ताक्षर हैं, जो भाजपा जांच दल के सदस्य हैं, और पता नहीं किस विशेष प्रभाव में खदान के पक्ष में रामगढ़ पर्वत को हो रहे नुकसान को नजरअंदाज कर रहे हैं। अंबिकापुर के विधायक व मंत्री राजेश अग्रवाल के इस बयान पर कि खदान रामगढ़ पर्वत के विपरीत दिशा में जा रहा है, प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि संभवत: उन्हें वस्तुस्थिति की जानकारी ही नहीं है। विधायक मौजूदा खदान को लेकर बात कर रहे हैं, जिससे रामगढ़ पर्वत को आलरेडी क्षति पहुंच चुकी है, खतरा नए खुलने वाले केते एक्सटेंशन 12 नंबर खदान से है।
सरकार केते एक्सटेंशन खदान को खोलने से रोके
पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता ने कहा कि हम विरोध के लिए राजनीति या आरोप-प्रत्यारोप नहीं करना चाहते। हमारा उद्देश्य इस क्षेत्र की धार्मिक आस्था के प्रतीक रामगढ़ पर्वत और उस पर मौजूद प्रचीन राम मंदिर को बचाने का है। उन्होंने कहा कि 16 जुलाई 2023 को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करते हुए कांग्रेस के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने कहा कि वर्तमान में संचालित परसा ईस्ट केते बासेन खदान में इतना कोयला है कि अगामी 20 वर्षों तक इस खदान की पेरेंट कंपनी राजस्थान राज्य विद्युत निगम के पॉवर प्लांट को आपूर्ति होती रहेगी। इसके बावजूद किसी कॉर्पोरेट दबाव में सरकार नया खदान खोलकर सरगुजा के धार्मिक आस्था के प्रतीक और सांस्कृतिक धरोहर रामगढ़ पर्वत के अस्तित्व को मिटाना चाहती है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि सरकार इस क्षेत्र में केते एक्सटेंशन खदान को खोलने से रोके।

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