आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं ने कहा-सरकार का दिल नहीं पसीजा तो रायपुर में करेंगे प्रदर्शन
अंबिकापुर। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं एक सूत्रीय प्रमुख मांग व 12 सूत्रीय मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ जुझारू आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका संघ के बैनर तले 13 अगस्त को एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करके महारैली निकाली और नारेबाजी करते हुए हल्ला बोलते हुए जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद भी सरकार का दिल नहीं पसीजा तो 01 सितम्बर को पूरे छत्तीसगढ़ की लाखों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं एक दिवसीय प्रांत स्तरीय धरना-प्रदर्शन करेंगे। इनकी प्रमुख मांग कार्यकर्ता, सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी घोषित करना है।
बता दें कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में एक लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं वर्ष 1975 से राज्य शासन के महिला बाल विकास विभाग के अधीन हैं। 50 वर्षों से कार्यरत कार्यकर्ता व सहायिका छत्तीसगढ़ राज्य के सभी जिलों एवं विकासखण्डों में प्रत्येक गरीब, निम्न एवं मध्यम वर्ग के परिवार तक अपनी पहुंच रखती हैं। गर्भधारण से लेकर प्रसूती, प्रसूता के टीकाकरण, जांच एवं डिलीवरी उसका आहार एवं पूरक पोषण, बच्चों का वजन एवं टीकाकरण, 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों को पूरक पोषण आहार, अनौपचारिक शिक्षा, कुपोषण से बचाव, गोद भराई, अन्नप्रासन, बाल भोज, सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना, महतारी वंदन योजना, सहित 16 योजनाओं का क्रियान्वयन वे करते आ रही हैं। अन्य विभागों के कार्य व राष्ट्रीय योजनाओं के सुचारू संचालन की कड़ी में भी वे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रही हैं। केन्द्र के अंदर आने वाले हितग्राहियों का देखरेख, संरक्षण जैसे कार्य व माह में सुपरवाइजर के माध्यम से परियोजना अधिकारी द्वारा राज्य शासन को रिपोर्ट भेजने की जिम्मेदारी भी वे निर्वहन कर रही है।
समस्याओं से जूझकर कर रहे काम
संघ की जिला अध्यक्ष भुनेश्वरी सिंह ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को मध्य प्रदेश के तर्ज पर प्रति वर्ष 10 प्रतिशत मानदेय वृद्धि का लाभ मिलना चाहिए। पर्यवेक्षकों की भर्ती करते हुए आयु सीमा का बंधन हटाकर 50 प्रतिशत कार्यकर्ताओं को पदोन्नति व सहायिकाओं में उम्र का बंधन हटाकर शत-प्रतिशत पदोन्नति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पोषण ट्रेकर ऐप में वर्जन बार-बार बदलने की समस्या आड़े आ रही है, ऐसे में उन्हें 5 जी मोबाइल एवं नेट में खर्च होने वाली राशि बढ़ाकर दी जाए। कार्यकर्ता व सहायिका को सेवा समाप्ति पर 10 लाख रुपये, गंभीर बीमारी होने पर मेडिकल छुट्टी के साथ मानदेय, प्रभार में दिए गए कार्यकर्ता व सहायिका को प्रोत्साहन राशि, छ.ग. महिला कोष की तरह कार्यकर्ता व सहायिका को विभागीय ऋण,र् इंधन की राशि समय सीमा में देने व सभी केन्द्रों में 01 सिलिंडर व 01 चुल्हा उपलब्ध कराने जैसी अन्य मांगों को लेकर सड़क में आने वे मजबूर हुए हैं।
बच्चों की संख्या बढ़ाने सरकार ले निर्णय
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि आरटीई के तहत 3 से 6 साल के बच्चों को स्कूल में भर्ती करने के कारण आंगनबांड़ी में बच्चे कम हो रहे हैं। इसके लिए शासन स्तर पर ठोस निर्णय लेने की जरूरत है, ताकि आंगनबाड़ी में बच्चों की कमी ना हो। सुपोषण चैपाल की राशि एवं मातृत्व वंदना की राशि प्रत्येक माह नहीं मिल पाती है। आंगनबाड़ी में प्रशिक्षण के नाम पर शासन के द्वारा कार्यकर्ताओं के लिए दी जाने वाली धनराशि का सही व्यय होना चाहिए। वर्तमान की स्थिति पर नजर डालें, तो उन्हें नए ऐप का सही प्रशिक्षण नहीं मिल पाया है, जिससे काम में बाधा की स्थिति बनती है। हितग्राहियों का आधार कार्ड अपलोड करने में दिक्कत आ रही है। हितग्राही साइबर क्राइम के कारण ओटीपी बताने से इन्कार करते हैं। ऐसे ही कई दिक्कतों का काम के समय उन्हें सामना करना पड़ता है।

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