सरकार के साथ ऐसी शक्ति काम कर रही है, जो इस रेल मार्ग में लगा रही है पलीता-पांडेय

अंबिकापुर। अंबिकापुर-रेणुकूट रेललाइन के लिए चार राज्यों के सांसदों द्वारा लोकसभा, राज्यसभा तक आवाज उठाने, और विधानसभा में सर्वसम्मति से 26 जुलाई 2024 को प्रस्ताव पारित होने के बाद भी उत्तर छत्तीसगढ़ के जनता की मांग को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं है, जबकि इस प्रस्ताव को बहुमत से नहीं सर्वसम्मति से पारित किया गया था। छत्तीसगढ़ की सरकार अंबिकापुर-रेणुकूट रेल लाइन की जगह बरवाडीह रेललाइन को आज भी प्राथमिकता दे रही है, जिसे 12 बार हुए सर्वे में रेलवे के द्वारा नकार दिया गया है। सरकार के साथ कुछ ऐसी शक्ति काम कर रही है, जो इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग में पलीता लगाने का काम कर रही है। प्रदेश की जनता के मांग को लेकर मैं सुर में सुर मिलाने आया हूं।  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  इस रेललाइन को प्राथमिकता दें। उक्त बातें पूर्व वित्त आयोग के अध्यक्ष वीरेन्द्र पाण्डेय ने स्थानीय सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही।

उन्होंने आगे कहा जनतंत्र में जनता की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। प्रदेश की 3 करोड़ जनता के साथ पूरी सरकार को खड़ा होना चाहिए। इसके विपरीत देखने को यह मिल रहा है कि विधानसभा में पारित प्रस्ताव के अनुरूप आचरण नहीं किया जा रहा है। अंबिकापुर-रेणुकूट रेललाइन सिर्फ जनभावनाओं से नहीं बल्कि आर्थिक, राजनैतिक, स्वास्थ्य, शैक्षणिक, धार्मिक स्तर से जुड़ा मामला है, जो रेलवे की जेब भरेगा और आवागमन, सुविधा की दृष्टि से जनता का जेब कम खाली होगा। इसके साथ ही अंबिकापुर को कोरबा को रेलमार्ग से जोड़ने पर रायपुर और दक्षिण छत्तीसगढ़ के लोगों को भी कम दूरी का लाभ मिलेगा, समय और धन की बचत होगी। उन्होंने कहा उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश के सांसदों के साथ ही उड़ीसा के लोग भी अंबिकापुर-रेणुकूट रेललाइन के पक्षधर हैं। सांसदों ने इसके लिए केंद्रीय रेल मंत्री तक पत्र व्यवहार किया है, और लोकसभा में इस मुद्दे को उठाया है। उड़ीसा के मुख्यमंत्री ने भी इस रेललाइन पर सहमति जताई है। पुरी को झारसुगुड़ा-अंबिकापुर-प्रयागराज से जोड़ने की ओड़िशा सरकार की मांग बहुत पुरानी एवं समीचीन है, जो इस मार्ग से साकार हो सकेगी। इधर डबल रेललाइन का सर्वे करने के बाद सिंगल रेललाइन के सर्वे में सिर्फ समय बर्बाद करने की चाल चली जा रही है।
सारगर्भिक तथ्यों  के साथ रेल मंत्रालय से करंे पत्र व्यवहार  
सेवानिवृत प्राचार्य दिवाकर शर्मा ने कहा कि बरवाडीह रेललाइन को हर सर्वे में नकारात्मक और अलाभकारी बताया गया है। अंबिकापुर-रेणुकूट रेल मार्ग के प्रथम सर्वे में ही चेन्नई की कंपनी ने रेणुकूट के साथ सिंगरौली से इस लाइन को जोड़ने पर इसका रेट ऑफ रिटर्न 14 प्रतिशत अनुमानित बताया था। इस रेललाइन का फाइनल लोकेशन सर्वे संपन्न कर इसका डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट अक्टूबर 2023 में रेलवे बोर्ड में जमा किया गया है, जिसके अनुसार इसकी दूरी 152.30 किलोमीटर, आईआरआर 19.50 प्रतिशत, एफआईआरआर 5.51 प्रतिशत, कुल लागत 8217.97 करोड़ रुपये और अपेक्षित ट्रैफिक 19.50 एमटीपीए है, जो वैकल्पिक सभी मार्गों में सर्वाधिक अनुकूल व लाभप्रद है। यह रेलमार्ग सामरी व मैनपाट से बॉक्साइट परिवहन के लिए भी उपयोगी होगा। रेल मार्ग से सरगुजा संभाग के लोग कम दूरी व समय में सीधे वाराणसी व देश की राजधानी दिल्ली से जुड़ जाएंगे। इसे देखते हुए छत्तीसगढ़ की सरकार को रेल मंत्रालय से पत्र व्यवहार करके अंबिकापुर-रेणुकूट रेललाइन के विषय में सारगर्भिक तथ्यों को रखना चाहिए, क्योंकि इस मार्ग में फारेस्ट की भूमि भी कम है। अंबिकापुर-बरवाडीह रेललाइन में काफी वनभूमि है, जिसका क्लीयरेंस आसानी से मिल पाना संभव नहीं है। पर्यावरणीय संकट पर नजर डालें तो धरती का बुखार बढ़ रहा है।
रेलवे के पैरामीटर के लिहाज से यह मार्ग लाभकारी
सरगुजा क्षेत्र रेल संघर्ष समिति के मुकेश तिवारी ने कहा कि रेलवे के पैरामीटर और सुरक्षा, आबादी की दृष्टि से यह रेलमार्ग लाभकारी है। बरवाडीह मार्ग में हुई बड़ी घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। अंबिकापुर-रेणुकूट रेलमार्ग पर 25 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 414 ग्राम पंचायत एवं 3 नगरों की जनसंख्या 10 लाख से अधिक है। इस क्षेत्र में ऐसी कोई संस्था अथवा महत्वपूर्ण स्थल नहीं है, जो प्रस्तावित रेल मार्ग को बाधित करे। इस रेल मार्ग से उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग का मुख्यालय अंबिकापुर, सूरजपुर व बलरामपुर जिले से होते हुए उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के रेणुकूट से जुड़ जाएगा। अंबिकापुर से उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित रेणुकूट से जुड़ने पर दिल्ली, कानपुर, प्रयागराज, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, पटना, कलकत्ता आदि स्थानों की दूरी बहुत कम हो जाएगी। यह मार्ग भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर एवं जगन्नाथपुरी से जुड़कर विशाल धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन का अवसर उत्पन्न करेगा, जिसका लाखों लोगों को लाभ मिलेगा। प्रस्तावित मार्ग, अन्य वैकल्पिक मागों की तुलना में छोटा, कम लागत वाला व अपेक्षाकृत अधिक उपयोगी, लाभप्रद एवं व्यवहारिक सिद्ध होगा।

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