आफत की बारिश से वार्डों के सामने की गैलरी हुई जलमग्न

अंबिकापुर। शहर के राजमाता श्रीमती देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध जिला अस्पताल में आफत की बारिश भारी पड़ रही है। अस्पताल के मुख्य भवन में संचालित सर्जिकल, आर्थो, बर्न सहित अन्य वार्ड की ओर जाने वाला रास्ता पानी से अटा हुआ है। नर्सों, चिकित्सकों के कक्ष का भी बुरा हाल है। पानी से बचाव के लिए कहीं प्लास्टिक की पन्नी लगाने की विवशता बन रही है, तो कहीं बाल्टी रखकर टपकते पानी का बहाव रोकने की कोशिश की जा रही है। सोनोग्राफी कक्ष में छत का प्लास्टर गिरने से खतरे की स्थिति बन गई, हालांकि इसमें कोई जख्मी नहीं हुआ है। स्वच्छकों के काम पर वापस नहीं लौटने के कारण अस्पताल के वार्डों के सामने गैलरी में जमा हो रहे पानी को निकालने वाले कर्मचारियों की कमी सामने गई। नर्सें अपना कक्ष छोड़ने के लिए विवश हैं। बिजली के स्विच बोर्ड के अंदर से पानी की धार निकलने से दीवारों में करंट का खतरा बना हुआ है। गनीमत है कि कोरोनाकाल में वार्डों की बदली सूरत के कारण वार्डों में पानी नहीं चू रहा है। कई जगह छत में लगे सिलिंग पानी में तर होकर गिर गए हैं, जिससे खतरे की स्थिति बन रही है।
अंबिकापुर में शुक्रवार की शाम से ही मौसम में बदलाव आया, इसके बाद लगातार हो रही आफत की बारिश ने लोगों को हलाकान कर दिया। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अस्पताल के पुराने भवन में स्थित पुरूष सर्जिकल वार्ड, बर्न वार्ड सहित अन्य वार्डों के सामने की गैलरी पानी से अट गया। ऐसे में यहां सेवा देने वाले स्वास्थ्य कर्मियों, चिकित्सकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों की देखरेख के लिए वार्डों के आसपास बने नर्सिंग कक्ष की स्थिति बदतर है। हड्डी वार्ड पुरूष, यूनिट-2 और बर्न वार्ड के सामने सिलिंग का बड़ा हिस्सा पानी में गलकर गिर गया है। शुक्रवार की शाम से बारिश की बनी स्थिति के बीच शनिवार को मरीजों के आए संबंधियों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। वार्ड के बाहर गैलरी में पानी जमा रहने और छत से पानी टपकने के कारण इन्हें बैठने की जगह भी नहीं मिल पा रही थी। सर्जिकल वार्ड के सामने स्थित ड्यूटीरत चिकित्सक और नर्सों के लिए बने कक्ष की पूरी दीवार से पानी की अविरल धारा बह रही है। बिजली के बोर्ड के अंदर तक पानी जाने से दीवार को टच करना खतरे से खाली नहीं है। कक्ष के अंदर पानी का बहाव रोकने के लिए दरवाजे से ही प्लास्टिक का पन्नी लगाया गया है, इसके बाद भी हालात बदतर है। मरीजों के संक्रमित होने का खतरा भी बना हुआ है। बर्न वार्ड के सामने स्थित कक्ष को छोड़ने के लिए नर्सें मजबूर हैं, और घूम-फिरकर सुरक्षित जगह तलाश रही हैं।
शेड के प्रस्ताव को नहीं मिली स्वीकृति
अस्पताल प्रबंधन की ओर से बारिश के पूर्व पुराने अस्पताल भवन में छत टपकने की बनने वाली स्थिति को देखते हुए शेड निर्माण के लिए शासन के समक्ष करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपये का प्रस्ताव पूर्व में दिया गया था, लेकिन इसे स्वीकृति नहीं मिली, जिसका खामियाजा भारी बारिश के बीच मरीजों और उनके संबंधियों को भुगतना पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि अस्पताल भवन को बारिश के पानी से बचाने के लिए राशि की मांग संभागीय बैठक में की गई है, लेकिन यह राशि संभवत: बरसात के बाद ही मिल पाएगी।
टाइल्स में फिसलकर चोटिल हो रहे
शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध जिला अस्पताल में लगाए गए टाइल्स कब किसके लिए शारीरिक क्षति का कारक बनेंगे, कह पाना मुश्किल है। पूर्व में लगे अच्छे-खासे टाइल्सों को निकलवाकर चिकनाहट भरा टाइल्स लगा दिया गया है, जिसमें लोगों को कदम थामकर चलना पड़ रहा है। इसके बाद भी कई लोग फिसलकर जख्मी हो चुके हैं। छत से टपक रहे पानी के बाद तो संभलकर चलने वाले भी खतरा महसूस कर रहे हैं।

Categorized in: