मानव तस्करी और अवयस्क बच्चियों के शोषण के गंभीर मामले में विशेष न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
अंबिकापुर। मानव तस्करी और अवयस्क बच्चियों के शोषण के गंभीर मामले में विशेष न्यायाधीश (एन.आई.ए.) अम्बिकापुर के पीठासीन अधिकारी के.एल. चरयाणी ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन महिला आरोपियों को दोषी करार देते हुए 14-14 वर्ष की कठोर सजा सुनाई है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने बताया कि न्यायालय विशेष न्यायाधीश अंबिकापुर के पीठासीन अधिकारी केएल चरयाणी द्वारा भा.दं.सं. की धारा 120बी, 363, 365, 366, 368 एवं 370 के अपराध में आरोपी विमला यादव, नीलू उर्फ निर्मला नायक व कोमल अहिरवार को उक्त अपराध में दोषसिद्ध घोषित किया है।
अभियुक्त विमला यादव, नीलू उर्फ निर्मला नायक एवं कोमल अहिरवार द्वारा 12 अप्रैल 2024 से 18 अप्रैल 2024 के मध्य ग्राम पुराईनबंध में साथ मिलकर तीन अवयस्क बच्चों का सदोष परिरोध कर उनका दुर्व्यापार करने हेतु आपराधिक षडयंत्र करने, अवयस्क बच्चों का व्यपहरण करने, उनका गुप्त रीति से सदोष परिरोध करने एवं अव्यस्क बच्चियों को अयुक्त संभोग करने हेतु विवश या विलुब्ध करने के आशय से उन्हें विवाह करने हेतु लड़कों से मिलने के लिए उत्प्रेरित करने तथा अव्यस्क बच्चों का सदोष परिरोध कर यह जानते हुए कि उनका शोषण किया जा सकता है, के मामले में 22 जुलाई 2025 को निर्णय पारित किया गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश केएल चरयाणी ने संपूर्ण साक्ष्य विवेचना उपरांत यह पाया कि अभियुक्त विमला ने अन्य अभियुक्त नीलू उर्फ ठुनी एवं कोमल अहिरवार के साथ मिलकर अपराधिक षड्यंत्र रचा। उक्त आपराधिक षड्यंत्र के पालन में अव्यस्क पीड़ित बच्चों को बहला-फुसलाकर उनका व्यपहरण कर अपने साथ ले गई और उनको नीलू और उनके पति कोमल के आधिपत्य में सौंप दिया, जिन्होंने पीड़ित कमांक 1 को अवयस्क होने के बाद भी विवाह करने के लिए प्रलोभित किया और उसे देखने के लिए लड़के भी बुलाए थे। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पाया कि यदि अव्यस्क पीड़ित कमांक 1 का विवाह हो जाता तो निश्चित रूप से वह अयुक्त संभोग के लिए विवश की जाती, इस तरह तीनों अभियुक्त का अंतत: आशय एवं उद्देश्य पीड़ित बच्चों का दुर्व्यापार कर उससे लाभ अर्जित किया जाना था। पीठासीन अधिकारी केएल चरयाणी द्वारा अपराध में दोषसिद्ध घोषित कर विमला यादव, नीलू उर्फ निर्मला नायक एवं कोमल अहिरवार को अपराध अंतर्गत धारा 363, 365 (जिसमें धारा 368 भा.दं. सं. का अपराध समाहित है) के तहत 3-3 वर्ष का कठोर कारावास एवं प्रत्येक को एक हजार रुपये अर्थदंड, धारा 366-क भा.दं.सं. के तहत 4-4 वर्ष का कठोर कारावास एवं प्रत्येक को एक हजार रुपये अर्थदंड तथा उक्त अपराधों में अर्थदंड की राशि अदा नहीं करने पर 3-3 माह का साधारण कारावास एवं धारा 370 भा.दं.सं. के तहत 14-14 वर्ष का कठोर कारावास एवं प्रत्येक को पांच हजार रुपये के अर्थदंड से तथा अर्थदंड की राशि अदा नहीं होने पर छह माह का साधारण कारावास से दण्डित किया गया है। मानव तस्करी के इस जघन्य अपराध पर न्यायालय का यह निर्णय समाज के लिए एक सशक्त संदेश है कि बच्चों के विरुद्ध किसी भी प्रकार के अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को कठोरतम दंड की कार्रवाई की जाएगी।

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