सीआरपीएफ के अधिकारी को बैंक खाते में गैरकानूनी काम होने का धौंस दिखाया
अंबिकापुर। बैंक खाते का वेरीफिकेशन करने के नाम पर अनजान व्यक्ति ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में पदस्थ उपनिरीक्षक को फोन किया और ऑनलाइन 22 लाख रुपये की चपत लगा दी। फोन करने वाले ने खाताधारक को बैंक खाते में गैर कानूनी काम होने का धौंस दिखाया था।
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल अंबिकापुर में उपनिरीक्षक के पद पर पदस्थ आर. महेन्द्रन पिता के. रामास्वामी, 55 वर्ष ने पुलिस को बताया है कि 5 जून को वे अपने सीआरपीएफ कैम्प अंबिकापुर में थे, सुबह करीब 9.23 बजे उनके मोबाइल में अनजान व्यक्ति ने फोन करके अपना परिचय रविशंकर, टेलीकॉम डिपार्टमेंट गवर्मेंट ऑफ दिल्ली ओल्ड मिन्टो रोड के रूप में दिया और कहा कि आपके आधार नम्बर से 7 जनवरी 2025 को एक सिम कार्ड लिया गया है, इस नम्बर से गैर-कानूनी काम हो रहा है, इस कारण आपके नाम का यह सिम कार्ड दो घण्टे में बंद कर दिया जाएगा, दिल्ली पुलिस से इसका कम्पलेंट किया जा रहा है। 5 जून को ही सुबह 9.41 बजे उनके मोबाइल नम्बर में पुन: फोन आया। फोन करने वाले ने कहा कि दिल्ली पुलिस स्टेशन से बोल रहा हूं, आपका नाम महेन्द्रन आर है क्या। इसके बाद उसने व्हाट्सअप नम्बर पूछकर वीडियो कॉल किया। सामने वाला व्यक्ति पुलिस की वर्दी में था, जो अपना आईडी कार्ड दिखाते हुए अपना नाम निरीक्षक गोपेश कुमार बताया और कहा कि आपके आधार नम्बर से बैंक ऑफ बड़ौदा के ब्रांच नेहरू प्लेस दिल्ली में 23.01.2025 को आर महेन्द्रन के नाम से खाता खोला गया है, जिसमें गैर-कानूनी पैसों का लेन-देन हो रहा है, क्या यह खाता आपका है? जब उन्होंने कहा कि उनके द्वारा संबंधित बैंक में कोई खाता नहीं खोला गया है तो पुन: तथाकथित निरीक्षक ने कहा कि इस खाता में लगभग 2 करोड़ रुपये गैर-कानूनी पैसों का लेन-देन हुआ है। इस केस में पकड़े गए अपराधी ने बताया है कि इस लेन-देन का 10 प्रतिशत खाताधारक को दिया गया है, इसलिए आपका जो भी खाता है उसका फण्ड वेरीफिकेशन होगा। इसके बाद वह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का एक पत्र भेजा, और अलग-अलग खाता नम्बर देकर उनके खाते से पैसा मंगाया गया ताकि आरबीआई से वेरीफिकेशन हो सके। ठग ने वेरीफिकेशन के 48 से 72 घंटे के बीच उसी खाता में पैसा वापस आने के लिए आश्वस्त किया था।
तथाकथित डीएसपी से भी कराया बात
वीडियो कॉल में ही तथाकथित डीएसपी सीबीआई राजीव कुमार से भी उनकी बात करवाई गई और एचके इंटरप्राइजेज के खाता में दिनांक 06.06.2025 को 49 हजार 999 भेजने के लिए कहा गया, तो उन्होंने अपने खाता से वेतन का 49 हजार 999 रुपये पहला ट्रांजेक्शन किया। पुन: कहा गया कि उनके खाता में जितना पैसा है, पूरे का वेरीफिकेशन होगा। तत्समय उनके खाते में 2 लाख 54 हजार 648 रुपये के लगभग था, जिसे 6 जून को ही दिए गए अलग-अलग यूपीआई नम्बर में डाल दिया। 08.06.2025 को उन्हें फोन करके कहा गया कि आपके खाते का वेरीफिकेशन करने पर 17 हजार रुपये अपराधी के खाते से मैच कर रहा है, जिस कारण आपके ऊपर मनी लांड्रिंग का केस बनता है, और आज शाम तक आपको गिरफ्तार किया जाएगा। साथ ही यह भी कहा हम कोई रास्ता निकालने की कोशिश करते है जिससे आपको बेल मिल सके, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में बात करने की बात कहते हुए उन्हें गुमराह किया गया। थोड़ी देर बाद पुन: फोन करके 10 लाख रुपये का इंतजाम करके अगले दिन तक पैसा भेज देने के लिए कहते हुए हर एक घण्टे में अपना रिपोर्ट (आप ठीक हो ना) व्हाट्सअप में देते रहने के लिए कहा गया।
सुको से बेल कराने का झांसा देकर ऐंठे 10 लाख
ठग ने अगले दिन 09.06.25 को पुन: फोन करके पैसों का इंतजाम हुआ कि नहीं, पूछा गया, जिस पर उन्होंने मना किया तो बताया गया कि रुपये नहीं देने पर आपका बेल नहीं हो पाएगा और आपको आज शाम तक गिरफ्तार करना पड़ेगा। इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी के जेवर के माध्यम से गोल्ड लोन लेकर 10 लाख रुपये आरटीजीएस करके आईडीबीआई के दिए गए बैंक खाते में भेजा गया। इसके बाद उन्हें बेल मिलने की जानकारी देते हुए 10.06.2025 को एक बेल नोटिस भेजा गया। 11.06.2025 को तथाकथित गोपेश कुमार निरीक्षक ने पुन: फोन आया और मुझे बोला गया कि आपके व आपके परिवार का जितना भी एफडी और इंश्योरेंस है, उसका भी फण्ड वेरीफिकेशन होगा, और सात लाख रुपये का इंतजाम करने के लिए कहा गया, जिससे उन्हें छुटकारा मिल सके। उन्होंने अपने पुत्र का फिक्स डिपाजिट तोड़कर व पुत्र के दोस्त से रकम लेकर दिया। इसके बाद उन्हें बताया गया कि वेरीफिकेशन के बाद अपराधी के बातों से मेल खा रहे 17000 और 1000 रुपये को छोड़कर शेष रकम उनके खाते में वापस कर दिया जाएगा। पुलिस धोखाधड़ी के मामले में केस दर्ज करके अग्रिम वैधानिक कार्रवाई कर रही है।

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