बिश्रामपुर | ग्राम पंचायत कल्याणपुर कोटबहरा के बाद खुटहनपारा में हाथियों का दल बीती रात धावा बोल आधा दर्जन मकानों व मोटरपंप को नुकसान पहुंचाया है। हाथियों के भय से ग्रामीणों को खुले आसमान के नीचे बारिश में रात गुजारने विवश होना पड़ रहा है। पूर्व विधायक ने आज गांव में पहुंचकर वस्तुस्थिति का जायजा लेते हुए प्रभावित लोगों से मुलाकात की है। गौरतलब है कि सुरजपुर वन मंडल अंतर्गत ग्राम पंचायत कल्याणपुर के खुटहनपारा में मंगलवार की रात अचानक छह सदस्यीय हाथियों का दल धावा बोल दिया। यहां पर हाथियों द्वारा गांव के रंजीत पिता दशरथ गोंड, सुबेदी पिता रामचरण गोंड, जग साय पिता मनियार गोंड, ननकु पिता दिलराज गोंड, बीजू पिता प्रेम, नंदू पिता बुढू के मकान को क्षतिग्रस्त कर दिया है। साथ ही हाथियों के दल ने सोसायटी के मोटरपंप व ड्रिल को भी क्षतिग्रस्त कर दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों के दल के रात में अचानक मुहल्ले में पहुंचने से यहां अफरा तफरी की स्थिति निर्मित हो गई थी। लोग यहां पर बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे पूरी रात गुजारने विवश रहे। मामले की जानकारी मिलते ही बुधवार को पूर्व भटगांव विधायक पारसनाथ राजवाड़े ने कल्याणपुर गांव में पहुंचकर प्रभावित लोगों से मुलाकात कर वस्तुस्थिति का जायजा लिया। साथ ही वन कर्मचारियों को जल्द ही प्रभावितों को सहायता राशि दिलाए जाने की बात कही। बताया जा रहा है कि उक्त हाथियों के दल द्वारा बीती रात ही ग्राम पंचायत अखोराकला के घाघीटिकरा में भी तीन ग्रामीणों क्रमशः दीपकरन राजवाड़े, बहादुर राजवाड़े व मुकेश राजवाड़े के भी मकान को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। यहां भी पूर्व विधायक पारसनाथ राजवाड़े ने पहुंचकर प्रभावित लोगों से मुलाकात की है। हाथियों का दल आज भी कल्याणपुर जंगल में ही डेरा डाले हुए हैं। इस दौरान लटोरी ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष व कल्याणपुर सरपंच गोवर्धन सिंह मरकाम, भुनेश्वर सिंह व अन्य उपस्थित रहे। ज्ञात हो कि पखवाड़े भर से छह सदस्यीय हाथियों का दल विचरण कर रहा है। हाथियों के दल ने दो दिन पूर्व ही गांव के रघुनाथ दास और शेरु नगेसिया के कच्चे मकान को भी काफी क्षतिग्रस्त कर दिया था। लोगों ने बताया कि हाथियों की मौजूदगी की वजह से बच्चे स्कूल भी नहीं जा पा रहे हैं, किसान खेतों में काम नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वन विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की जा रही है। ग्रामीणों की मांग है कि हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा जाए। पीड़ितों को शीघ्र मुआवजा मिले। हाथियों के रिहायशी इलाकों में विचरण किए जाने से लोगों में भय व्याप्त हो गया है।

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