बिश्रामपुर। प्रकृति से जुड़ाव और कुछ कर गुजरने की लालसा ने दो लोगों को पर्यावरण मित्र बना दिया। अब तक दोनों के प्रयास से कोयलांचल समेत आसपास इलाको में कई हरे भरे वृक्ष जगह जगह लह लहा रहे हैं। हम बात कर रहे हैं एसईसीएल बिश्रामपुर के वित्त विभाग के एकाउंटेंट शैलेश चौबे और रेलवे में पदस्थ स्टेशन प्रबंधक एसएन सिंह की। जो कि शैलेश चौबे चार दिनों पूर्व 31 मई को कंपनी की सेवा से सेवानिवृत्त हो गए हैं। श्री चौबे विगत दस पंद्रह वर्षों से पर्यावरण मित्र का दायित्व निभा रहे हैं। हरियाली उन्हें पसंद है सो उन्होंने अपने वन बी कॉलोनी स्थित कंपनी आवास को नर्सरी में बदल दिया और यहीं तैयार किए गए पौधों को आवास के बाजू डीएवी विद्यालय के चाहर दिवारी से लगे खाली क्षेत्र में दर्जन भर से अधिक पीपल, बरगद, नीम, गुलर, कदम के पौधे लगा दिए और खुद के पैसे से सभी पौधों में ट्री गार्ड भी लगवा सभी की नियमित देखभाल की और यही पौधे अब विशाल वृक्ष का रूप ले रहे हैं।उन्होंने वीरान पड़े एकता स्टेडियम के पास भी बड़ी संख्या में पौधे रोपित कराए और पौधों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग कराई। अब सभी पौधे बड़े हो चुके है और एकता स्टेडियम में पहुंचने वालों को हरियाली का संदेश देते हुए सुकून भी दे रहा है। इसके अलावा श्री चौबे एसईसीएल कॉलोनी के अलग अलग जगहों पर लोगों को प्रेरित कर पौधा लगवा रहे हैं। उन्होंने पौधों को तैयार करने घर में नर्सरी बनाई हुई है। उन्हें इस कार्य के लिए कई मौकों पर पुरस्कृत भी किया जा चुका है।श्री चौबे की ही तरह रेलवे में बतौर स्टेशन मास्टर सेवा दे रहे सच्चिदानंद सिंह का पर्यावरण से गहरा जुड़ाव और प्रकृति से प्रेम अनोखा है। वे अपने ड्यूटी और परिवार से समय निकाल बाकी का समय पौधों की देखरेख में लगाते हैं। सच्चिदानंद सिंह दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के वर्तमान में चिरमिरी स्टेशन प्रबंधक हैं। अपने अंबिकापुर, कमलपुर, बिश्रामपुर स्टेशन में पदस्थापना के दौरान कई पौधे खुद से रोपित किए और उनकी नियमित देखभाल की, जिससे आज तीनों स्टेशनों में उनके लगाए गए पौधे लोगों को राहत और सुकून दे रहे हैं और सभी पौधों ने अब विशाल रूप ले लिया है। उनकी प्रेरणा आमजन और सहकर्मियों को खासा प्रेरित भी कर रहा है। एसएन सिंह ने बताया कि विकास के इस अंधे दौड़ में पर्यावरण और प्रकृति पर सबसे अधिक मार पड़ रही है।खदान खोलने, सड़क बनाने, बड़े बड़े प्रोजेक्ट खोलने से पहले हजारों लाखों पेड़ की बलि दी जाती है, जिससे पर्यावरण तेजी से बिगड़ रहा है। ऐसे में पर्यावरण पूरी तरह असंतुलित हो रहा है। यदि हम आज भी नहीं चेते तो इसका खामियाजा हमारी आने वाली पीढ़ी को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि केवल पर्यावरण दिवस पर बड़ी बड़ी बातें होती है लेकिन दूसरे दिन हम फिर उसी ढर्रे पर फिर से चलने लगते हैं, हम सबको इस विषय में सोचना होगा।

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