अंग्रेजी हुकूमत की परिकल्पना को साकार करने 1936 से जारी सर्वे का सिलसिला नहीं थमा
अंबिकापुर। बरवाडीह-झारखंड से अंबिकापुर होते हुए चिरमिरी को रेल मार्ग से जोड़ने की अंग्रेजी हुकूमत की परिकल्पना भले साकार नहीं हो पाई, लेकिन इस रेल मार्ग का जिन्न आज भी सरकारी फाइलों में मंडरा रहा है। रेल लाइन के नाम पर 1936 से शुरू हुआ सर्वे आज भी जारी है, वह भी ऐसी स्थिति में जब एसईसीएल के द्वारा इस रेल लाइन को बिना किसी काम का बताते हुए किसी प्रकार का इन्वेस्ट करने से इन्कार कर दिया गया हो, या कहा जाए सरकार के प्रस्ताव तक को ठुकरा दिया गया हो। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के समय सीआरसीसी बनने के बाद भी एसईसीएल ने इस रेल लाइन के प्रति किसी प्रकार की रुचि नहीं दिखाई, और यह कहते हुए हाथ खींच लिया कि कोई कोल ब्लॉक अंबिकापुर-बरवाडीह रेललाइन में नहीं है। इसके बाद भी सर्वे के नाम पर लाखों, करोड़ों रुपये की बर्बादी का सिलसिला थमा नहीं है। प्रासंगिक यह भी है कि 8 केंद्रीय मंत्रियों ने इस परियोजना को रद्द करने की बात कही है।
बता दें कि वर्ष 1936 से वर्ष 2025 तक अंबिकापुर-बरवाडीह रेल मार्ग हेतु 15 से 20 बार सर्वे किया जा चुका है। इस रेल मार्ग को लेकर संसद में 100 से अधिक प्रश्न किए गए, चर्चा की गई। सर्वे रिपोर्ट पब्लिक डोमेन में नहीं, लेकिन रिकॉर्ड में है और संसद में किए गए प्रश्नों तथा चर्चाओं के उत्तर भी अकाईव में हैं, जिससे प्रतीत होता है कि यह रेल मार्ग लाभकारी एवं व्यवहारिक नहीं है, फिर भी न जाने किस दबाव में सर्वे का सिलसिला अनवरत जारी है। इसे लेकर टिप्पणी यह भी हो रही है कि किसी एक रेल मार्ग के लिए सर्वाधिक सर्वेक्षण का विश्व कीर्तिमान अंबिकापुर-बरवाडीह रेल मार्ग बना सकता है। इसके साथ ही सर्वे की और भी संभावनाएं बनी हुई हैं, यह शृंखला अभी समाप्त नहीं होगी, जो वर्ल्ड रिकार्ड से कम नहीं होगा।
जितने में सर्वे उतने में तो बन जाती नई रेललाईन
अंबिकापुर-बरवाडीह रेल लाइन को सन् 1936 से चल रही कवायद पर अल्पविराम भी नहीं लगा है। लाखों करोड़ों रुपये हर बार सर्वे के नाम पर फूंके जा रहे हैं, जो फिजूल के बर्बादी के सिवाय कुछ नहीं है। लाभकारी रेल परियोजना को छोड़कर बरवाडीह रेललाइन का समीकरण हल करने में लगे लोग या तो क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति से अनभिज्ञ हैं, या फिर इनकी रुचि सर्वे के खेल में समय जाया करने की ज्यादा है। इस रेल मार्ग के लिए पूर्व में दो बार स्वीकृति भी मिली है, लेकिन अपेक्षित अनुमोदन के शर्त पर संबंधित राज्य से नि:शुल्क भूमि प्राप्त करने कहा गया, जो पूरा नहीं हुआ। रेल लाइन की दूरी पूर्व में सरनाडीह, रामनगर, बरगड़, कुटकू से बरवाडीह तक 135 किलोमीटर थी, जो पुन: सर्वे में अंबिकापुर से परसा, बरियो, राजपुर रोड, कर्रा, पस्ता, झलरिया, दलधोवा, जाबर, बरगड़, नवकी, बिन्दा, पारो, हुतार होते बरवाडीह 182 किलोमीटर लम्बी हो गई। अब इस रेल लाइन की दूरी 200 किलोमीटर हो गई है, इसके पीछे कारण मणिपुर अंबिकापुर से होकर रेलवे लाइन को मिलाना बताया जा रहा है। वर्तमान में इस रेल मार्ग के सर्वे का काम 4 करोड़ की लागत से कराया जा रहा है। सर्वे के खेल में फूंकी जा रही धन राशि से रेलवे लाइन विस्तार से संबंधित कई महत्वपूर्ण कार्य हो सकते थे, जिसके लिए फंड की आस में भारतीय रेलवे पलक पांवड़े बिछाए रहता है।
मुंबई से कोलकाता के बीच दूरी घटने की बातें तथ्यहीन
अंबिकापुर-बरवाडीह रेल लाइन को लेकर एक बात और फैली है कि इसके बन जाने से मुंबई से कोलकाता के बीच की दूरी 400 किलोमीटर कम हो जाएगी। इसका विश्लेषण करें तो कोलकाता से बरवाडीह 532 किमी, बरवाडीह से अंबिकापुर की प्रस्तावित दूरी 200 किमी, अंबिकापुर से रायपुर ट्रेन रुट 424 किमी, रायपुर से मुंबई 1138 किमी है, अर्थात कोलकाता से मुंबई की कुल दूरी 2294 किमी होगी। दूसरा संभावित मार्ग कोलकाता से बरवाडीह-अंबिकापुर-जबलपुर होते हुए मुंबई का है, जिसमें जबलपुर से अंबिकापुर की दूरी 432 किलोमीटर व जबलपुर से मुंबई की दूरी 984 किमी है, ऐसे में इस रूट से भी कोलकाता से मुंबई की कुल दूरी 2148 किमी होगी। वर्तमान में कोलकाता से मुंबई के बीच रेल यातायात के लिए बिलासपुर, नागपुर से होकर जो रेल मार्ग गुजरी है, उसकी कुल दूरी 1970 किलोमीटर है। ऐसे में इस मार्ग को लेकर मुंबई से कलकत्ता के बीच की दूरी घटने की बातें तथ्यहीन हैं।
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फोटो-मुकेश तिवारी
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा अंबिकापुर-बरवाडीह रेल लाइन का डीपीआर 23 जुलाई 2023 को रेलवे बोर्ड में जमा कर दिया गया है। अंबिकापुर-रेणुकूट रेल लाइन का डीपीआर 14 अक्टूबर 2023 को रेलवे बोर्ड को जमा कर दिया गया है। तुलनात्मक रूप से अंबिकापुर रेणुकूट रेल लाइन रेट ऑफ रिटर्न, आतंरिक वित्तीय प्रतिफलता, दूरी लागत, उपयोगिता, संभावित आय, कोयला और बॉक्साइट परिवहन, पर्यावरण स्वीकृति हर मापदण्ड पर श्रेष्ठ और कारगर है। अंबिकापुर बरवाडीह रेल लाइन का वर्ष 1935-36, 1960-61, 1971-72, 1978-79 और 2011 सहित अनेकों बार सर्वे हो चुका है। अभी हाल में संपन्न फाईनल लोकेशन सर्वे में अंबिकापुर बरवाडीह रेल लाइन की लागत 9030 करोड व इसका एफआईआरआर (-0.52 प्रतिशत) नकारात्मक आया है। इस अव्यवहारिक और अलाभकारी परियोजना को लेकर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे एक बार पुन इसका सिंगल लाइन के रूप में सर्वे करने जा रहा है, जो औचित्यहीन, अनुपयोगी और धन व समय की बर्बादी है। अबिकापुर-रेणुकूट रेल लाइन छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश की जन भावनाओं से जुड़ा है। इन दोनों प्रदेशों के अतिरिक्त झारखण्ड और मध्यप्रदेश के कई सांसदों ने इसकी स्वीकृति के लिए रेल मंत्री को पत्र लिखा है। 26 जुलाई 2024 को छत्तीसगढ़ विधानसभा से सर्वसम्मति से अंबिकापुर-रेणुकूट रेल लाइन के निर्माण का प्रस्ताव पारित हुआ है। ऐसे में कम दूरी, कम लागत, अधिक रेट ऑफ रिटर्न, ज्यादा उपयोगिता वाली अंबिकापुर-रेणुकूट रेल लाइन को स्वीकृति प्रदान कर इसका क्रियान्वयन करने हेतु समुचित निर्देश दिया जाना चाहिए।
मुकेश तिवारी, सदस्य
क्षेत्रीय रेल उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर

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