बिश्रामपुर। संभाग मुख्यालय से लगे सरगुजा जिले के ग्राम कोलडीहा में वन भूमि को लेकर एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जिसने न केवल ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि शासन-प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। युवक कांग्रेस भटगांव विधानसभा अध्यक्ष ने विक्की समद्दार ने सूरजपुर कलेक्टर को पत्र लिखकर एक संगठित धोखाधड़ी की शिकायत की है। कलेक्टर को दिए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि ग्राम पंचायत कोलडीहा के पूर्व सरपंच सुमित केरकेट्टा और उसके परिवारजनों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लगभग 90 से 95 एकड़ वन भूमि का अधिकार पत्र एक ही परिवार के सदस्यों के नाम पर हासिल कर लिया है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि वन अधिकार पट्टा खसरा नंबर पीएफ 2533 आमगांव प्लांटेशन वन विभाग सूरजपुर की भूमि पर जारी किए गए वन अधिकार पत्र को ग्राम पंचायत कोलडीहा के पूर्व सरपंच पति सुमित केरकेट्टा एवं भतीजा महेश केरकेट्टा पिता प्रताम केरकेट्टा, उमेश केरकेट्टा पिता प्रताम केरकेट्टा, हरदयाल केरकेट्टा पिता प्रताम केरकेट्टा, रजनी केरकेट्टा, पिता प्रताम केरकेट्टा, समिता केरकेट्टा पति महेश केरकेट्टा, सुमित केरकेट्टा पिता मंगलू केरकेट्टा के नाम प्राप्त किया गया है, जबकि उक्त सभी नाम एक ही परिवार से संबंधित हैं। आरोप यह भी है कि आवेदन प्रक्रिया, दस्तावेजी सत्यापन और पंचायत स्तर की स्वीकृति में गंभीर अनियमितता बरती गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि फर्जी हस्ताक्षर कराए गए हैं और पात्र लोगों को आवेदन तक नहीं करने दिया गया है। पारिवारिक गठजोड़ से वन भूमि हड़प ली गई है। यह प्रकरण इसलिए और भी चौंकाने वाला है क्योंकि गांव के अन्य वास्तविक पात्र लोगों का वन अधिकार पट्टा वर्षों से लंबित पड़ा है, लेकिन जिन परिवारों ने आवेदन ही नहीं किया, उन्हें भारी-भरकम जमीन का पट्टा एकाएक जारी कर दिया गया। ग्रामीणों का यह भी दावा है कि न तो ग्रामसभा की सहमति ली गई, न ही जनसुनवाई हुई है। युवक कांग्रेस भटगांव विधानसभा अध्यक्ष विक्की समद्दार ने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया है कि यदि प्रशासन 10 दिन के भीतर इस मामले की निष्पक्ष जांच कर फर्जी पट्टों को निरस्त नहीं करती है, तो ग्रामवासियों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन किया जाएगा। यह मामला सिर्फ एक जमीन का नहीं है, बल्कि पूरे वनाधिकार कानून की साख, पारदर्शिता और ग्राम अधिकारों की रक्षा से जुड़ा है। अब देखना यह होगा कि सूरजपुर प्रशासन इस गंभीर फर्जीवाड़े पर क्या कदम उठाता है। यदि जल्द कार्यवाही नहीं हुई, तो यह मामला न केवल राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन सकता है, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी समान प्रकरणों की पड़ताल की मांग को जन्म दे सकता है।

 

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