शिमला। राजधानी में दो दिन से हो रही भारी बारिश से तबाही का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। शिमला शहर में दिनभर रिहायशी भवनों, सड़कों और गाड़ियों पर पेड़ कहर बनकर गिरते रहे। शाम 5:00 बजे तक करीब 75 पेड़ धराशायी हो गए। शहर में भूस्खलन से भी भारी नुकसान हुआ है। इससे 5 से ज्यादा मकानों को खतरा पैदा हो गया है।
राजधानी का सर्कुलर रोड भी रविवार दिन भर हिमलैंड के पास बंद रहा। यहां सुबह 7:00 बजे भूस्खलन होने से यातायात ठप हो गया। लोक निर्माण विभाग ने मलबा तो हटा दिया लेकिन भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। यहां सड़क के ऊपर बने बहुमंजिला भवन को भी खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते यहां बसों की आवाजाही रोक दी गई है। एहतियात के तौर पर भवन के नींव के पास तिरपाल लगा दिए गए हैं। शहर के टुटीकंडी आईएसबीटी पर सुबह एक पेड़ निजी बस पर जा गिरा। यह बस सड़क किनारे खड़ी थी। साथ में खड़ा एक ट्रक भी इसकी चपेट में आ गया। दोनों को भारी नुकसान पहुंचा है। गनीमत यह रही कि कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है।

दुधली में दबी गाड़ियां, नाभा में ढही सड़क
भराड़ी के दुधली में भी भूस्खलन और पेड़ ढहने से सड़क किनारे खड़ी तीन गाड़ियां दब गईं। इन्हें दोपहर बाद मलबा और पेड़ हटाकर निकाला गया। अब यहां यातायात बहाल हो गया है। नाभा में सुबह 8:30 बजे भूस्खलन और पेड़ ढहने से 103 टनल से फागली बाईपास को जोड़ने वाली सड़क बंद हो गई है। पेड़ लोक निर्माण विभाग की कालोनी में जा गिरा। इससे भवन परिसर में लगी रेलिंग टूट गई। बिजली का पोल भी टेढ़ा हो गया है। पार्षद सिमी नंदा के अनुसार एक और पेड़ ढहने की कगार पर पहुंच गया है। इसे काटने के लिए वन विभाग को सूचना दे दी है।

समरहिल, खलीनी में गिरे 38 पेड़
खलीनी के मिस्ट चैंबर स्थित वन विभाग की रिहायशी कालोनी में सुबह एक के बाद एक देवदार के 17 पेड़ ढह गए। इससे एक भवन की छत टूट गई। शाम को 6 और पेड़ गिर गए। गनीमत यह रही कि कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। वन विभाग के अनुसार निजी जमीन पर खड़े ये पेड़ अचानक ढह गए। इसके चलते सुबह खलीनी में यातायात भी ठप रहा। दोपहर तक इन्हें काटकर यातायात बहाल किया गया। उधर, समरहिल में भी 15 पेड़ सड़क पर ढह गए। गर्ल्स हॉस्टल और सांगटी की सड़कें पेड़ ढहने से बंद हो गई। पार्षद वीरेंद्र ठाकुर ने बताया कि शाम 4:00 बजे तक हॉस्टल की सड़क बहाल कर दी गई है।

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