अयोध्या। नेपाल से चलकर छह दिन बाद अयोध्या पहुंची देवशिला (शालिग्राम) का चयन लंबे रिसर्च के बाद किया गया। काली गंडकी नदी की 40 शिलाओं के जियोलॉजिकल सर्वे के बाद विशेषज्ञों ने इन शिलाओं को चुना। भारत सरकार के भी फाॅरेंसिक विशेषज्ञों ने अपनी ओर से परीक्षण कराया। नेपाल सरकार की अनुमति मिलने के बाद इन शिलाओं को 26 जनवरी को अयोध्या के लिए रवाना किया गया।

नेपाल के भूगर्भ वैज्ञानिक डॉ.कुलराज ने अपनी टीम के साथ कई दिनों गंडकी नदी की शिलाओं का परीक्षण किया। 45 दिनों तक जांच-पड़ताल की गई। करीब 40 बड़ी-बड़ी शिलाओं के वैैैज्ञानिक परीक्षण के बाद ये दो शिलाएं चुनीं गईं। एक शिला 24 टन की तो दूसरी शिला 15 टन की है। 24 टन की शिला की ऊंचाई 7 फीट है जबकि 15 टन की शिला की ऊंचाई 6 फीट है।

श्रीरामजानकी मंदिर से जुड़े रामभूषण शरण ने बताया कि नेपाल से जो शिला आईं हैं वह शालिग्राम ही है। नेपाल में हम इसे देवशिला कहते हैं। भारत में इसे शालिग्राम शिला कहा जाता है। यह शिला भगवान श्रीहरि का स्वरूप मानी जाती है। नेपाल की काली गंडकी नदी का उद्गम हिमालय से है। गंडकी बिहार में आकर नारायणी बन जाती है।


बताया कि गंडक प्रदेश में समुद्र तट से 6400 फीट ऊंचे पहाड़ हैं। जब नदी हिमालय से निकलती है तो इन्हीं पहाड़ों से पत्थरों के छोटे-छोटे टुकड़े बन जाते हैं। लगातार बहाव के चलते इनका रंग काला भी हो जाता है।
बताया कि यहां विभिन्न स्वरूप में शालिग्राम शिला मिलती है। शालिग्राम शिला केवल काले रंग की होती है ऐसा नहीं है। बताया कि रिसर्च में सामने आया है कि इन पत्थरों की आयु लाखों वर्ष तक होती है।

देवशिला से बनेगी राम सहित चारों भाइयों की मूर्ति
ट्रस्ट सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राममंदिर की पहली मंजिल में बनने वाले राम दरबार के लिए श्रीराम व सीता की मूर्ति इन्हीं शिलाओं से बनाई जाएगी। वहीं, भरत, लक्ष्मण व शत्रुह्न की मूर्तियां भी इन्हीं शिलाओं से बनाई जानी है। अभी गर्भगृह में श्रीराम चारों भाइयों सहित विराजमान हैं। यह मूर्तियां अत्यंत छोटी हैं, जिसके चलते भक्त इनका दर्शन नहीं कर पाते। अब इनकी बड़ी मूर्तियां बनाईं जाएंगी।


मूर्तिकार करेंगे शालिग्राम पत्थरों की जांच
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि शालिग्राम शिला का टेस्ट कराया जाएगा। मूर्तिकारों को सबसे पहले यह पत्थर दिखाया जाएगा। पत्थर पर छेनी लगेगी तभी मूर्तिकार बता पाएगा कि इस पत्थर से मूर्ति बनेगी या नहीं।


ओडिशा, कर्नाटक व मध्यप्रदेश से भी पत्थर मंगवाए जा रहे हैं। नेपाल से आई शालिग्राम शिला को विकल्प के तौर पर रखा गया है। मूर्ति बनाने वाले कलाकारों को बुलाकर सारे पत्थरों की जांच कराई जाएगी। उसके बाद तय होगा कि क्या करना है।

Categorized in: