भारत के चार धामों में से एक बदरीनाथ धाम के कपाट 30 अप्रैल को ब्रह्म मुहुर्त सुबह चार बजकर 30 मिनट पर खुलेंगे. बदरीनाथ के रावल ईश्वरी प्रसाद नम्बूदरी के हाथों कपाट खोलने की परंपरा का पालन किया जाएगा, लेकिन रावल इन दिनों लॉकडाउन के चलते केरल में ही फंसे हैं. ऐसे में उन्हें प्राथमिकता पर उतराखंड लाने के प्रयास किए जा रहे हैं.

लॉकडाउन का असर बद्रीनाथ धाम के कपाट खोलने की प्रक्रिया पर पड़ना तय है। कपाट खुलने के समय की धार्मिक परम्परा का पालन सांकेतिक रूप से होगा. टिहरी राज दरबार से निकलने वाली तेल कलश गाडू घड़ा यात्रा भी सांकेतिक रूप से ही होगी.

सूत्रों के अनुसार कपाट खुलने के दिन प्रधान रावल और उनके तीन चार सहयोगियों के साथ ही हूक हकूक धारियों और कर्मचारियों को मिलाकर करीब 80 लोगों को धाम में रहने देने की लिस्ट बनाकर जिला प्रशासन ने आयुक्त कार्यालय को भेजी है. इनमें से अंतिम तौर पर कितने लोगों की मंजूरी मिलती है, यह अभी तय नहीं है

j4-15 अप्रैल तक उत्तराखंड आ सकते हैं रावल
बताया जा रहा है कि रावल ईश्वरी प्रसाद नम्बूदरी इन दिनों केरल के कन्नूर स्थित अपने गांव चेरुपल्ली गए हैं. अब जिला प्रशासन उन्हें 14-15 तक यहां लाने का प्रयास कर रहा है. ताकि कपाट खोलने के दिन वो उपस्थित रह सकें. बदरीनाथ के रावल को सम्मान सहित केरल से लाने की ब्यवस्था राज्य सरकार कर रही है. जिला प्रशासन से इस कार्य में जो भी सहयोग मांगा जाएगा, वो प्रदान किया जाएगा