मनेंद्रगढ़ (शुद्धूलाल वर्मा) ! 21वीं सदी दूरसंचार क्रांति के नाम से पूरे देश में जाना जाता है जहां देश के कोने कोने से लोग संचार क्रांति से जुड़कर नए आयाम स्थापित  करते हुए एक नया कीर्तिमान गढ़ रहे हैं वहीं कुछ लोग  इस संचार क्रांति से  दूर रहकर अपना  वही पुराना जीवन यापन करने में लगे हुए हैं! इस क्रांति ने कुछ प्राइवेट कंपनियों द्वारा इस बात का ठेका  लेकर कि इस क्रांति  में हम अपना भी सहयोग देंगे ! परंतु आज भी ग्रामीण अंचलों या दूरस्थ अंचलों के लोग इस संचार क्रांति से परे दिख रहे हैं ! इनके साथ मृग मरीचिका अथवा यूं कहें दूर के ढोल सुहावने होते हैं कि चरितार्थ लागू होते हैं इसका जीता जागता उदाहरण विकासखंड मनेंद्रगढ़ के ग्राम पंचायत सोनहरी सहित गांव पढ़ेवा, नगवा, हंसपुर, जटाशंकर ,चपलीपानी ,कचौहान , कचोहर आदि ग्रामों के लोग आज भी अपने रिश्तेदारों से अपनी जरूरी बातें अपने लोगों को या अपनी समस्याओं को विभाग तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं !कारण  यह है कि इस अंचल में मशहूर नामी कंपनी जिओ कंपनी के द्वारा पिछले 2 वर्षों से ग्राम पंचायत  सोनहरी में वीरसाय नामक ग्रामीण के जमीन में स्थापित कर खड़ा कर उन्हें मानदेय देने की बात कह कर अभी तक उसे प्रारंभ नहीं किया गया है! जिसके भूमि में  टावर को खड़ा किया गया है उसे भी आज तक कोई मानदेय प्राप्त नहीं हुआ है ! दूरस्थ ग्रामीण अंचल  के ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें ग्राम हंसपुर में एक पेड़ के पास  टावर की कुछ लकीरें  उनके मोबाइल में  आ जाती है तो  वे किसी तरह   मोबाइल में अपनों से बात कर लेते हैं इसीलिए ग्रामीण पेड़ के नीचे झुंड में बैठकर मोबाइल में टावर आने का इंतजार करते रहते हैं! ग्रामीणों ने बताया कि हम यहां अपने मोबाइल को लेकर इसलिए बैठते हैं कि यहां पर यहां से कुछ दूर जिओ कंपनी का टावर लगा है उसका थोड़ा बहुत 1-2 डंडी नेटवर्क हमें प्राप्त होता है तो हम अपने दूर रहने वाले करीबियों से बात कर पाते हैं कभी-कभी तो बातें हो जाती है रुक रुक कर परंतु कभी ऐसा भी आता है कि हम लोग रात 10 बजे तक इस पेड़ के पास बैठे हुए रहते हैं कि शायद अब टावर आए तब टावर आए और जब टावर नहीं मिल पाता है तो हम लोग घर चले जाते हैं और दूसरे दिन सुबह सुबह आकर फिर इसी  पेड़ के नीचे बैठ जाते हैं  !

ग्रामीणों ने  बताया कि हमारे ग्राम पंचायत सोनहरी में जिओ कंपनी वालों ने जब टावर लगाया तो हमें बेहद खुशी हुई और हमें आशा जगी कि आने वाला समय हमारे लिए सुनहरा होगा दूर रहते हुए भी हम शहरों के अपनों के पास होंगे परंतु यह आज पिछले 2 वर्षों से वैसे कि वैसा बना हुआ है हम जाएं तो जाएं कहां शहर से 40 किलोमीटर दूर हम इस ग्रामीण बीहड़ जंगलों के बीच रहते आ रहे हैं कभी कोई आपदा आ जाए तो स्वास्थ्य केंद्र अथवा किसी को अपने हिफाजत के लिए खबर तक नहीं कर पाते  !  जहां  मोबाईल टावर लगा था उस घर के मालिक ने बताया कि यह टावर पिछले 2 वर्षों से लगा हुआ है और हमें किराया देने के लिए भी बोला था परंतु आज  तक न तो किराया देने आए और न ही  टावर को देखने आए चलाने की बात तो दूर है ! हम सब गांव वासी टावर प्रारंभ होने की आज तक राह देखते आ  रहे हैं !

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