करीब दो साल पहले निधि आगरा पुलिस की हिरासत में थी. अब सवाल ये है कि अंजलि की मौत की इकलौती चश्मदीद आखिर आगरा पुलिस की गिरफ्त में क्यों और कैसे आ गई थी? तो निधि का ये दूसरा चेहरा और पुराना सच जानने के लिए आपको दो साल पीछे जाना होगा.

निधि का अतीत नशे और जुर्म की कहानी बयां करता है

वो एक तरफ दिल्ली के कंझावला कांड यानी अंजलि की मौत के मामले की इकलौती चश्मदीद गवाह है, दूसरी तरफ आगरा पुलिस की नजर में एक ड्रग पेडलर. वो एक तरफ दावा करती है कि हादसे से पहले अंजलि नशे की हालत में थी, दूसरी तरफ वो खुद नशे यानी गांजे के साथ आगरा में गिरफ्तार हो चुकी है. अंजलि केस की गवाह निधि पिछले दो सालों से जमानत पर बाहर है. इससे पहले वो करीब 15 दिनों के लिए आगरा की जेल में बंद थी. अब अदालत में पेश ना होने की वजह से निधि पर फिर से गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है.

जीआरपी की हिरासत में थी निधि
हम उसी निधि की बात कर रहे हैं, जो अंजलि की मौत की इकलौती चश्मदीद और उसकी दोस्त होने का दम भरती है. करीब दो साल पहले यही निधि आगरा पुलिस की हिरासत में नजर आई थी. अब सवाल ये है कि अंजलि की मौत की इकलौती चश्मदीद आखिर आगरा पुलिस की गिरफ्त में क्यों और कैसे आ गई थी? तो निधि का ये दूसरा चेहरा और पुराना सच जानने के लिए आपको दो साल पीछे जाना होगा.

6 दिसंबर 2020, आगरा, यूपी
पुलिस की हिरासत में मौजूद निधि की तस्वीरें पुलिस और मीडिया रिकॉर्ड में मौजूद हैं. लेकिन निधि की तस्वीरों का सच जानने के लिए आपको आगरा के जीआरपी, आगरा कैंट थाने में 6 दिसंबर 2020 को दर्ज की गई एक एफआईआर पर निगाह डालनी चाहिए. ये एफआईआर एनडीपीएस एक्ट की धारा 8 और 20 के तहत दर्ज की गई थी. वक्त दोपहर के 1 बजकर 17 मिनट और जगह थी, आगरा कैंट स्टेशन का प्लेटफॉर्म नंबर 3. उस एफआईआर में निधि का नाम अभियुक्त यानी मुल्जिम नंबर एक के खाने में दर्ज है. पता लिखा था, सुल्तानपुरी सी 7/11, झुग्गी नंबर-1, पोस्ट और थाना सुल्तानपुरी, उत्तरी दिल्ली.

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