वरिष्ठ पार्षद आलोक दुबे को स्थान नहीं मिलना सवालों के घेरे में
अंबिकापुर। अंबिकापुर नगर निगम में सोमवार को शहर सरकार के सुचारू कामकाज का संचालन करने के लिए मेयर-इन-काउंसिल का गठन किया गया, जिसमें 10 विधिवत पार्षदों को जगह दिया गया है। बड़ी बात यह है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता व पार्षद आलोक दुबे को मेयर-इन-कौंसिल में स्थान नहीं मिल पाया। इसके पीछे अंदरूनी टसक को लेकर जहां एक ओर गाल बज रहे हैं, वहीं पत्रकारों से निगम कार्यालय में चर्चा के दौरान निगम की नवनिर्वाचित महापौर मंजूषा भगत ने कहा कि पार्षद आलोक दुबे ने स्वयं मेयर-इन-काउंसिल मेें खुद किसी विभाग का प्रभार लेने से इन्कार कर दिया, वे हमारे मार्गदर्शक हैं। इधर मेयर-इन काउंसिल की घोषणा होने के बाद मिले दायित्वों को लेकर कुछ पार्षद निराश भी नजर आए और दबे जुबां शिकवा-शिकायत जैसी बातें भी सामने आ रही हैं। इधर मेयर-इन-काउंसिल गठन के बाद महापौर ने एक बड़ी बात यह भी कही है कि इसमें काम करने वाले लोगों को ही स्थान मिलेगा, सभी के कार्यों पर उनकी नजर रहेगी, जरूरत पड़ने पर फेरबदल भी संभव है।
महापौर मंजूषा भगत ने चर्चा के क्रम में आगे कहा कि मेयर-इन-कौंसिल का गठन छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 37 सहपठित छत्तीसगढ़ नगर पालिक के कामकाज के संचालन के लिए नियम 1998 के प्रावधानों के तहत किया गया है। इसमें पहले नम्बर में शामिल दूसरी बार पार्षद बने मनीष सिंह को आवास, पर्यावरण एवं लोक निर्माण विभाग का बड़ा दायित्व दिया गया है। इसी क्रम में जल कार्य विभाग का कार्यभार जितेन्द्र सोनी अज्जू को, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग का श्रीमती ममता तिवारी को, बाजार विभाग का श्रीमती अनिता रविन्द्र गुप्त भारती को, शिक्षा विभाग का सुशांत कुमार घोष को, महिला एवं बाल कल्याण विभाग को श्रीमती प्रियंका गुप्ता को, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का विपिन कुमार पाण्डेय को, पुनर्वास तथा नियोजन विभाग का रविकांत उरांव को, राजस्व विभाग का श्रीमती श्वेता गुप्ता को, विधि तथा सामान्य प्रशासन विभाग का दायित्व विशाल गोस्वामी (दूधनाथ) को दिया गया है।
पहली बार चुनाव जीते 05 पार्षदों को मिला स्थान
मेयर-इन-काउंसिल में शामिल 10 पार्षदों में 05 पार्षद ऐसे हैं, जिन्होंने पहली बार चुनाव में हिस्सा लिया और भाजपा से जीत दर्ज कराए 32 पार्षदों के बीच अपना स्थान बनाया है। मनीष सिंह और श्रीमती अनिता रविन्द्र गुप्त भारती ने लगातार दूसरी बार लगातार जीत हासिल की है, वहीं श्वेता गुप्ता, सुशांत कुमार घोष और विशाल गोस्वामी (दूधनाथ) तीसरी बार पार्षद के चुनाव में बाजी मारने में सफल हुए, हालांकि विशाल गोस्वामी की धर्मपत्नी भी पार्षद का दायित्व निर्वहन कर चुकी हैं। जितेन्द्र सोनी (अज्जू), श्रीमती ममता तिवारी, श्रीमती प्रियंका गुप्ता, विपिन कुमार पाण्डेय, रविकांत उरांव पहली बार चुनाव में शामिल हुए जीत हासिल करके पार्षद निर्वाचित हुए, एमआईसी में भी इन्हें विभिन्न दायित्व सौंपा गया है।
शशिकांत भी मेयर-इन-काउंसिल में
फोटो-शशिकांत जायसवाल
अधिसूचना पत्रक में उल्लेखित 10 नामों की सूची को सार्वजनिक करने के बाद पहली बार पार्षद चुनाव में हिस्सा लेकर जीत हासिल किए शशिकांत जायसवाल को स्वच्छता प्रभारी का दायित्व मौखिक में सौंपने की बातें सामने आ रही है। मेयर-इन-काउंसिल में इन्हें यह जिम्मेदारी मौखिक रूप से देने को लेकर कई तरह के कयास लग रहे हैं। भाजपा का दामन थामकर पहली बार चुनाव में हिस्सा लिए व कुछ अन्य पार्षद भी इस उम्मीद में थे कि उन्हें मिली जीत की बदौलत मेयर-इन-काउंसिल में स्थान मिल सकता है, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया।
करेंगे शहर के विकास का मेनिफेस्टो तैयार
महापौर मंजूषा भगत ने कहा कि मेयर-इन-काउंसिल का गठन सभापति का चुनाव होने के बाद सात दिवस के अंतराल में होना था, लेकिन इसमें कुछ विलम्ब की स्थिति बनी है। अब बजट के लिए निगम क्षेत्र के 48 वार्ड के रहवासियों से चर्चा के बाद मेनिफेस्टो तैयार होगा। फोर लेन सड़क का डीपीआर तैयार है। सड़क निर्माण के दौरान किसी को बड़ी जनहानि न हो, इसे देखते हुए कलेक्टर से चर्चा की गई है। जनता से जिस प्रकार का जनादेश मिला है, इसे ध्यान में रखते हुए काम किया जाएगा। स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर भी पूरी टीम के साथ काम करते हुए शहर के विकास को गति दिया जाएगा।

Categorized in: