अंबिकापुर। इंजीनियरिंग कालेज डिगमा से ग्रामीणों ने सूचना दी कि एक बड़े आकार का पक्षी गिरा हुआ है। मौके पर स्नेकमैन सत्यम पहुंचा तो वहां पर बाज जाल में फंसकर तड़प रहा था। रात 10 बजे पशु चिकित्सालय नही खुला होने की वजह से सत्यम उससे अगले दिन पशु चिकित्सालय लेकर गया, परंतु रविवार होने की वजह से वह भी बंद मिला। बाद में पीएल सोरी द्वारा बाज का उपचार किया गया। उसके एक हिस्से के पंख में घाव था और कीड़े पड़ गए थे। सत्यम ने बताया कि उनकी संस्था के लोग बेजुबान जीवों को रेस्क्यू के बाद उपचार कर जान तो बचा लेते हैं परंतु उपचार के बाद संभाग में एक भी जगह नहीं जहां उन्हें कुछ दिन रखा जा सके। इसे देखते हुए सत्यम ने खुद से पशु पुनर्वास केंद्र का निर्माण किया है, जहां सभी बेजुबान जीव उपचार पश्चात स्वस्थ्य होते तक रखे जाते हैं। वन्य जीवों को वन विभाग को जानकारी देने बाद भी सीमित समय तक रखा जाता है। सत्यम ने बाज के रेस्क्यू और उपचार की सूचना डीएफओ पंकज कुमार कमल को दी। इनके उपचार का खर्च सत्यम अपने पास से ही वहन करते आ रहा है। अब तक उन्हें वन विभाग, नगर निगम से सहायता नहीं मिली है। पशु पुनर्वास केंद्र में वर्तमान में 20 से ज्यादा जीवों का आश्रय गृह है, भविष्य के यह संख्या बढ़ती रहेगी, इसलिए सत्यम ने पशु पुनर्वास केंद्र के संचालन हेतु सहयोग का आग्रह किया है। बेजुबान जीवों के रेस्क्यू, उपचार के लिए सत्यम ने अपना मोबाइल नंबर 9074123714 नेचर कंजर्वेशन सोसायटी आफ छत्तीसगढ़ साझा किया है, जो 24 घंटे सेवा में तत्पर है।

Categorized in: