० कोरोना संक्रमण को देखते हुए हाईकोर्ट ने सभी जिला न्यायालयों में नियमित उपस्थिति व सुनवाई पर लगाई है रोक लेकिन नहीं मार रहे लोग

अंबिकापुर. कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ता देख हाईकोर्ट के आदेश पर सभी जिला न्यायालय में बुधवार से उपस्थिति व नियमित सुनवाई पर रोक लगा दी गई है। इसके बावजूद भी न्यायालय के बाहर हर रोज एजेंटों, स्टांप वेंडरों व नोटरीकर्ताओं द्वारा हाईकोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सुबह से शाम तक भीड़ एकत्रित कर सोशल डिस्टेंस का भी पालन नहीं किया जा रहा है। स्टांप वेंटरों द्वारा दस रुपए का स्टांप १०० रुपए में बेचा जा रहा है। ऐसे में जरूरतमंद लोग अधिक रुपए देकर स्टांप व नोटरी कराने को विवश हैं।


गौरतलब है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला न्यायालय में बुधवार से उपस्थिति व नियमित सुनवाई पर रोक लगा दी गई है। सिर्फ रिमांड आवेदनों पर सुनवाई की जानी है, इसके अलावा सभी तिथियों को आगामी आदेश तक बढ़ा दिया गया। कोरोना संक्रमितों की सं या लगातार बढऩे की वजह से व प्रांतीय न्यायालयीन कर्मचारी संघ की मांग को देखते हुए हाईकोर्ट द्वारा सभी अधीनस्थ न्यायालय में उपस्थिति व नियमित सुनवाई पर रोक लगा दी गई है। वहीं अंबिकापुर न्यायालय पूरी तरह सूनसान है। जबकि न्यायालय के बाहर काफी भीड़ देखी जा रही है। टाइपिस्ट, नोटरी करने वाले व स्टांप वेंटरों की भीड़ लगी हुई है। लोग न्यायालय परिसर के बाहर पेड़ के नीचे कुर्सी टेबल लगाकर काम कर रहे हैं।

सोशल डिस्टेंस की उड़ रही धज्जियां
हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला न्यायालय पूरी तरह बंद है लेकिन आदेश को दरकिनार कर स्टापं वेंडर व कार्यकर्ता काफी संख्या में एकत्रित होकर कोर्ट परिसर के बाहर काम कर रहे हैं। इस दौरान सोशल डिस्टेंस का भी पालन नहीं किया जा रहा है। काफी संख्या में भीड़ जमा हो रही है। इससे संक्रमण का भी खतरा बढ़ सकता है।

ज्यादा दाम पर बेचे जा रहे स्टांप व टिकट
न्यायालय बंद होने से स्टांप वेंडरों व नोटरी करने वाले लोगों की मनमानी बढ़ गई है। स्टापं वेंडरों द्वारा १० रुपए का स्टांप १०० रुपए में बेचा रहा है। जरूरत मंद परेशान होने के कारण ज्यादा रुपए देकर स्टांप व टिकट खरीदने को विवश हैं।

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