बिश्रामपुर। कोयला श्रमिकों का 11 वां वेतन समझौता ऐतिहासिक समझौते के रूप में संपन्न हुआ था, जो बात कुछ लोगों को हजम नहीं हुआ। वे लोग अब इसमें बाधा डालकर औद्योगिक शांति को भंग करना चाहते हैं। उक्त बातें शुक्रवार को बिश्रामपुर के वीआईपी रेस्ट हाउस में पत्रकार वार्ता के दौरान भारतीय मजदूर संघ के कोयला प्रभारी के लक्ष्मा रेड्डी ने कही। उन्होंने कहा कि सीएमओआई के सदस्यों द्वारा जबलपुर व बिलासपुर के अलावे दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका डालकर जिस तरह कोयला कर्मचारियों के हितों को नुकसान पहुंचाने प्रयास किया है, उसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालयों में दायर याचिका में परिवादियों द्वारा अपने वेतन भत्तों को बढ़ाने की मांग न कर कोयला श्रमिकों के बढ़े वेतन भत्तों को रुकवाने का प्रयास कर अपना घिनोना चेहरा सामने ला दिया है। अपने हक के लिए लड़ना सबका अधिकार है, न कि दूसरे के हक को छीनना। यह विकृत मानसिकता का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि रांची में कोयला उद्योग के पांचों यूनियनों की बैठक में इन सभी मुद्दों पर चर्चा हुई और यह तय किया गया है कि अगर उच्च न्यायालय जबलपुर के निर्णय का हवाला देकर प्रबंधन अगर मजदूरों के नए वेतन समझौता के अनुरूप सितम्बर माह का वेतन भुगतान नहीं करता है, तब आगामी 5, 6 व 7 अक्टूबर को कोयला उद्योग में राष्ट्र व्यापी हड़ताल किया जाएगा।उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों का हर 10 वर्ष में वेतन निर्धारण होता है, जिसकी अवधि दिसम्बर 2026 तक है। अगर प्रबंधन इस बीच में उनका वेतन बढ़ाता है, तो वे भी इसका पुरजोर विरोध करेंगे। श्रमिकों का सालाना बोनस 70 से 80 हजार तक होता है जबकि अधिकारी वर्ग एसी कक्ष में बैठकर हर वर्ष पीआरपी के रूप में लाखों रुपए प्राप्त करते हैं। उन्होंने प्रबंधन के दोहरे रवैय्ये का उल्लेख करते हुए कहा कि आश्रित रोजगार मामले में यदि मजदूर के बच्चे को रोजगार देने की बात हो तो वह जितना भी अधिक पढा हो उसके केटेगरी मजदूर की नौकरी मिलती है, वहीं दूसरी ओर अधिकारी के बच्चे को सीधा क्लर्क का जॉब मिलता है यह अन्याय नही तो क्या है? अधिकारियों को पर्क में 35 प्रतिशत की राशि मिलती है जबकी मजदूर को महज 5 प्रतिशत। उन्होंने प्रबंधन व सरकार से इस ओर ध्यान देते हुए न्याय की मांग की है। साथ ही कहा कि औद्योगिक शांति को भंग करने के पीछे कौन-कौन हैं, इसकी भी जांच होनी चाहिए। हड़ताल से होने वाले नुकसान की भरपाई भी इन्ही षड्यंत्रकारियों से ही कराई जानी चाहिए। पत्रकार वार्ता के दौरान मजदूर संघ के मजरुल हक अंसारी, महामंत्री सुजीत सिंह व महेश गुप्ता उपस्थित थे।
राष्ट्र व्यापी हड़ताल में एचएमएस भी होगा सहभागी
एचएमएस नेता व जेबीसीसीआई सदस्य शिवकुमार यादव ने कहा कि रांची में आयोजित बैठक में हड़ताल को लेकर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है, लेकिन एचएमएस को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि वे कोयला कामगार को आश्वस्त करते हैं कि रांची की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार एचएमएस हड़ताल को समर्थन करेगा। रांची की बैठक में एचएमएस के वरिष्ठ नेता राघवन उपस्थित थे और उन्होंने मजदूर हित में एकमत होकर हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। एचएमएस हड़ताल के निर्णय पर अडिग है। उन्होंने यह भी कहा कि हड़ताल को लेकर कौन क्या कहा रहा है, इस पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। ज्ञात हो कि उक्त बैठक में अस्वस्थ होने के कारण एचएमएस के वरिष्ठ नेता एवं जेबीसीसीआई सदस्य नाथूलाल पांडेय उपस्थित नहीं हुए थे। बैठक के बाद श्रमिक नेता नाथूलाल पांडेय ने हड़ताल के निर्णय से असहमति जताते हुए कहा था कि स्ट्राइक की क्या जरूरत है। उन्होंने कहा था कि जिन बातों का उल्लेख कर स्ट्राइक का नोटिस दिया गया है, पहले उसे कोल इंडिया प्रबंधन से कन्फर्म कर लेना चाहिए था। उन्होंने सवाल किया था कि क्या सीआईएल प्रबंधन ने पेमेंट नहीं देने का कोई नोटिस जारी किया है। साथ ही एरियर वापस लेने की बात कही है। यदि प्रबंधन ऐसा कोई भी कदम उठाता है तो नियमतः उसे सेक्शन 9 के तहत सूचना जारी करनी होगी। कोल इंडिया प्रबंधन कह रहा है कि हम कोई पेमेंट वापस नहीं लेंगे, क्यों न हमारे ऊपर अवमानना हो जाए। ऐसे में स्ट्राइक की क्या जरूरत है।

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