अधिकारी-पटवारी ही नहीं पंचायत के प्रतिनिधि भी भूमि की रजिस्ट्री से बेखबर
भू-माफियाओं के खिलाफ ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, कलेक्टर से की शिकायत


अंबिकापुर। शासकीय भूमि में कब्जा के बाद मिलीभगत से पट्टा बनवाने जैसे मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें शासकीय भूमि का पट्टा बनने के बाद पंचायत के पास सीमांकन के लिए आदेश पहुंचा। इस आदेश के बाद ग्रामीणों के साथ सरपंच, पंच ने बैठक की। ग्रामीणों को जब सरकारी भू-खंड का पट्टा बनने की जानकारी मिली तो उनके भी होश उड़ गए और उन्होंने बैठक में लिए गए निर्णय के अनुरूप अपने गांव की सरकारी भूमि को सुरक्षित करने भू-माफियाओं और बिचौलियों का विरोध करते हुए मोर्चा खोल दिया है। पट्टा कैसे बना, यह भी जांच का विषय है। इसकी शिकायत सरगुजा जिले के कलेक्टर से काफी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने की है। हैरत की बात यह है शासकीय भूमि की रजिस्ट्री से पटवारी से लेकर अधिकारी तक बेखबर रहे। ग्रामीणों का कहना है जिस व्यक्ति के द्वारा जमीन का पट्टा बनवाया गया है, उसका भाई तहसील कार्यालय में ऑपरेटर है। पहले तो निजी संपत्तियों की खरीद-बिक्री का खेल चलता था अब शासकीय भूखंड भी सुरक्षित नहीं हैं।
जानकारी के मुताबिक लुंड्रा विकासखंड के ग्राम पंचायत लमगांव में स्थित खसरा नंबर 3/15 व 2/15 शासकीय भूमि है, उसका अन्य ग्राम के व्यक्ति जहूर अली पिता रमजान द्वारा गलत तरीके से कागजात तैयार करवाने का ग्रामीणों ने आरोप लगाया है। इसके बाद जमीन के सीमांकन के लिए आदेश ग्राम पंचायत पहुंचा तो पंचायत प्रतिनिधियों ने इसकी जानकारी गांव के लोगों को बैठक करके दी। ग्रामवासी उक्त भूमि को आज तक शासकीय मानकर उसे गांव के उपयोग के लिए सुरक्षित रखे थे। बैठक में ग्रामीणों की मौजूदगी में निर्णय लिया गया कि वे अपने गांव की भूमि को भू-माफियाओं की भेंट नहीं चढऩे देंगे और वे एकमत होकर कलेक्टर सरगुजा के पास अपनी फरियाद लेकर पहुंचे। इनके द्वारा शासकीय जमीन को बचाने की मांग की गई है। मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने कलेक्टर सरगुजा को ज्ञापन सौंप सरकारी जमीन के पट्टे को निरस्त कराने और कूटरचना में शामिल लोगों पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। कलेक्टर से शिकायत करने पहुंचे ग्रामीणों में नेतराम कौशिक, कामता प्रसाद, कैलाश प्रसाद पटेल, महेंद्र कुमार पटेल, रफैल तिर्की, विनय कुमार, धर्मराज, अटल सिंह, पवन, सुखलाल, पातर साय, सुंदर साय, बंदेलाल पटेल, मोहन प्रधान, सत्यनारायण सिंह, शिवचंद सहित अन्य ग्रामीण शामिल थे।
पंचायत ने पंचवाटिका के रूप में विकसित किया है भूमि को-
ग्रामीणों ने कलेक्टर को जानकारी दी है कि जिस सरकारी जमीन के सीमांकन का आदेश मिला है, वह सरकारी है। पिछले कई वर्षों में यहां ग्राम पंचायत के द्वारा कई कार्य कराए गए हैं। जमीन को पंचवाटिका के रूप में पंचायत ने विकसित किया है। दिसंबर 2021 में यहां पर मनरेगा के तहत तालाब का निर्माण भी करवाया गया है। ऐसे में सरकारी जमीन का पट्टा बनना कई सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस व्यक्ति के नाम भूमि बता सीमांकन का कार्य करने पंचायत को आदेश जारी किया गया है, वह एक जमीन दलाल है। ग्रामीणों का कहना है कि इनके द्वारा बनाई गई संपत्ति व सरकारी संपत्तियों पर अतिक्रमण की जांच होनी चाहिए।

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