मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पूर्व में बेंगलुरू में सेवा दे चुके चिकित्सक ने की सर्जरी


अंबिकापुर। राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध चिकित्सालय के नेत्र रोग विभाग में पदस्थ रेटिना व नेत्र सर्जन डॉ.ओम एस.श्रीवास्तव ने बतौली विकासखंड के ग्राम मंगारी से आए गरीब मरीज के आंख से 7.5 सेंटीमीटर लंबा लकड़ी का टुकड़ा निकाला, जिसकी मोटाई करीब डेढ़ सेंटीमीटर थी।
जानकारी के मुताबिक मंगारी निवासी देवानंद 35 वर्ष बीते शनिवार की दोपहर बाद अस्पताल के आपातकालीन चिकित्सा परिसर में पहुंचा था, जिसके आंख में साढ़े सात सेंटीमीटर लंबा लकड़ी का टुकड़ा पूरी तरह से घुस गया था। आंख के नाजुक हिस्से को भेदकर घुसी लकड़ी के कारण उसे काफी तकलीफ हो रही थी। स्वजनों ने चिकित्सक के पूछने पर बताया कि बैल को भगाते समय गिरने से उसके आंख में लकड़ी का टुकड़ा घुस गया था, जिससे वह छटपटा रहा था। स्वजनों ने जब उसकी स्थिति देखी तो सीधे जिला अस्पताल अंबिकापुर लेकर पहुंचे थे। मामला आंख से जुड़ा होने के कारण मरीज के स्वजनों को तत्काल नेत्र रोग विभाग के चिकित्सक से संपर्क करने के लिए कहा गया। चिकित्सक डॉ.ओम श्रीवास्तव ने मरीज की स्थिति देख उसे भर्ती कर लिया और दो घंटे की सर्जरी के बाद अथक प्रयास से निकाला गया। इस दौरान टीम में सर्जन चिकित्सक के साथ नेत्र सहायक अधिकारी रमेश घृतकर, सिस्टर रूपम, वंदना, अंजू व अरूणा शामिल रहे।  
बेंगलुरू में सेवा दे चुके हैं चिकित्सक  
नेत्र रोग विभाग में पदस्थ डॉ.ओम एस श्रीवास्तव पूर्व में बेंगलुरू में सेवा दे चुके हैं। ऑपरेशन के दौरान पीडि़त व्यक्ति के आंखों के रोशनी कैसे बच पाएगी, इसकी चिंता थी। ऑपरेशन टेबल पर ही जब मरीज ने कहा वह अपनी आंखों से लाइट देख रहा है तो पूरी टीम की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। डॉ.ओम रेटिना सर्जन हैं और वे सरगुजा जिला के रहने वाले हैं।  

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