भैयाथान/सूरजपुर(दीपक गुप्ता)- आज के दौर में शिक्षा की विधि किस तरह की है इस पर ध्यान और गौर करने की जरूरत इसलिए नही है क्योंकि आज भारत में शिक्षा के स्तर को उन्नयन करने हेतु योग्य शिक्षक है, इन योग्य शिक्षक के कड़े परिश्रम से भारत आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, चाहे वो विज्ञान हो, खेल हो, मनोरंजन हो या वाहिनी के क्षेत्र हो। नैतिक शिक्षा में भी शिक्षकों का एक अहम योगदान होता है जिसे एक समाज हर तरह की बुराइयों से योजनाबद्ध तरीके से लड़ सकता है चाहे वो दहेज प्रथा हो या फिर समाज मे पसरी जुवे की लत, पर अगर एक शिक्षक यह पूर्वोदाहरण दर्शाये की वो सर्वोच्च है और उसके किये हुए कार्य समाज को प्रभावित नही करेंगे तो शायद उनकी यह अनिभूति गलत है।

क्योकि एक शिक्षक जिसे आने वाली पीढ़ी आदर्श मानती है जब वही समाज मे जुआँ जैसी नकारात्मकता को बढ़ावा देते है तो कही न कही शिक्षा का स्तर और शिक्षा प्रणाली में विश्वास खत्म होता दिखता है।

आइये जानते है क्या था मामला…

16 मार्च को भटगांव पुलिस को यह सूचना मिली की ग्राम चुनगडी उरांवपारा में कुछ जुवारी पैसों के जीत हार का दांव लगा रहे थे, यह सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत उस स्थान पर पहुँची और 12 लोगो को गिरफ्तार किया गया, जिसमे से 1 व्यक्ति पेशे से शिक्षक है, उन 12 लोगो के पास से पुलिस को 54000 रुपये नकद मिले जिन्हें वो सट्टे के तौर पर इस्तेमाल करने वाले थे। शिक्षक संतोष कुमार उपाध्याय जो कि विकासखंड सूरजपुर मिडिल स्कूल करंजी के हेडमास्टर है और अन्य 11 लोगो पर जुआँ अधिनियम की धारा 13 के तहद FIR दर्ज किया गया। दरअसल धारा 13 जमानतीय अपराध है और आसानी से इसमें जमानत हो जाती है। जबकि नियम यह है कि अगर पुलिस को घर में या किसी अड्डे पर सट्टा होते हुए पकड़े गए अपराधियो पर कार्यवाही करनी है तो उनके ऊपर धारा 13 नही बल्कि धारा 3/4 के तेहद कार्यवाही की जाए। सूरजपुर जिले के शासकीय शिक्षक करंजी मिडिल स्कूल के हेडमास्टर संतोष कुमार उपाध्याय जुआ में अपना दांव-पेच लगा रहे थे, और बहुत लंबे समय से यह शिक्षक इन खेलो में आसक्त है। सवाल यहाँ ये उठता है कि शिक्षा विभाग द्वारा संतोष कुमार उपाध्याय पर कोई कार्यवाही क्यू नही की गई, क्या शिक्षा विभाग को शिक्षकों का जुवा खेलना पसंद है या फिर उन्हें कार्यवाही करने से रोका जा रहा है। अंदाजा ये भी लगाया जा रहा है कि इन शिक्षकों पर राजनेताओ का आशिर्वाद है? और उन्हें हर बार राजनेताओ द्वारा संरक्षण दिया जा रहा है? शिक्षक, नेता इनकी क्या अब परिभाषा बदल रही है, शिक्षक जो कि विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणा की मूर्ति है उनके द्वारा ऐसी त्रुटियाँ भारत के दिशा को किस ओर आधरित करेगी, और नेता जो को जनकल्याण के लिए राजनीति में आते है और जनता के दुखों और मुसीबतों पर नीतियां बना कर जनता के समस्याओ का निवारण करते है तो क्या उनमे इतनी भी नैतिकता नही बची की वो सही और गलत के बीच का फर्क समझ सके और अगर उन अध्यापक पर कार्यवाही में बाधा राजनेताओ के संरक्षण से आ रही है? तो ये कही न कही जनता और विद्यार्थियों के भरोसे और पतियाना का अपमान है।

विगत दिनों पहले विनोद राय जिला शिक्षा अधिकारी सूरजपुर से बात की गई थी, उन्होंने कहा अगर अपराध पंजीबद्ध होती है तो हम शिक्षक के खिलाफ़ कार्रवाई करेंगे, क्लेक्टर दीपक सोनी सर को भी वॉट्सअप के माध्यम से मामला को अगवत कराया गया था, सूरजपुर विकास खंड शिक्षा अधिकारी केसी साहू को भी इस मामले से अवगत कराया गया था, सभी जनप्रतिनिधियों को भी जानकारी है और छत्तीसगढ़ सूरजपुर जिला के रहने वाले प्रेम साय सिंह टेकाम जो छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री है, कार्रवाई नही होने का कारण ऐसा तो नही की राजनीतिक दल में बैठे नेता का इसे संरक्षण प्राप्त है? और मामला रफा-दफा तो नहीं हो गया, अब आगे क्या कार्रवाई होती है देखने योग बात होगी।

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